
2016 की नोटबंदी के दर्द को भुलाए अभी पूरी तरह देश नहीं भूला था कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंक एक्सिस बैंक को करारा झटका दिया है। आयोग ने बैंक को दिल्ली की प्रॉक्योर लॉजिस्टिक्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को 3.19 करोड़ रुपये मूलधन समेत 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। यह फैसला 13 मार्च 2026 को सुनाया गया, जो नोटबंदी के दौरान बैंकों की मनमानी पर सवाल खड़े करता है। कंपनी के पास बची 3.2 करोड़ रुपये की नकदी जमा न होने से महज कागज के टुकड़ों में तब्दील हो गई थी, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
नोटबंदी का संदर्भ और घटना का खुलासा
8 नवंबर 2016 को तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने अचानक 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था। इसका मकसद काला धन, आतंकवाद की फंडिंग और नकली मुद्रा पर लगाम लगाना था। आम लोगों को 50 दिनों की मुद्दत दी गई, जो 30 दिसंबर 2016 तक बढ़ा दी गई। इस दौरान देशभर में लंबी-लंबी कतारें लगीं, लेकिन प्रॉक्योर लॉजिस्टिक्स जैसी कंपनियों को बैंकिंग सिस्टम की मनमानी का शिकार होना पड़ा।
कंपनी ने नोटबंदी की शुरुआत में ही बैंक में 1.3 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कर दिए थे। विभिन्न तारीखों पर यह जमा हुआ, जो KYC नियमों का पूरी तरह पालन करता था। लेकिन जब कंपनी ने बाकी 3.19 करोड़ रुपये (कुल 3.2 करोड़ के करीब) जमा करने की कोशिश की, तो एक्सिस बैंक ने साफ मना कर दिया।
बैंक की दलील और आयोग की कड़ी फटकार
बैंक ने NCDRC के समक्ष अपनी सफाई में कहा कि कंपनी का खाता ‘संदिग्ध’ और ‘हाई रिस्क’ था, इसलिए नकदी जमा की अनुमति नहीं दी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने इसे सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन आयोग की बेंच- जे. राजेंद्र और ए.के. मेंदीरत्ता- ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट कहा कि भले ही बैंक को नकदी पर शक हो, तब भी उसका कर्तव्य था कि वह राशि स्वीकार कर ले और RBI या अन्य सक्षम अधिकारियों को रिपोर्ट करे।
एकतरफा फैसला बैंक की अकर्मण्यता और सरकार की नीतियों तथा RBI अधिसूचनाओं का घोर उल्लंघन था। नोटबंदी के नियमों के तहत सभी वैध खाताधारकों को नकदी जमा का हक था, बशर्ते KYC पूरा हो। बैंक ने ऐसा न करके कंपनी को जबरन नुकसान पहुंचाया।
कंपनी को हुआ कितना नुकसान
नोटबंदी की डेडलाइन (31 दिसंबर 2016) समाप्त होते ही कंपनी के पास बची 3,19,58,500 रुपये की नकदी बेकार हो गई। यह राशि व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण थी, लेकिन बैंक की जिद ने उसे रद्दी बना दिया। NCDRC ने बैंक को न केवल मूल राशि लौटाने का आदेश दिया, बल्कि 2016 से चक्रवृद्धि 6 प्रतिशत ब्याज भी लगाया। यह ब्याज कंपनी को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई का प्रतीक है। आयोग ने जोर देकर कहा कि बैंक का निर्णय किसी आधिकारिक जांच पर आधारित नहीं था, बल्कि यह उनकी स्वेच्छाचारी कार्रवाई थी। कंपनी ने सभी नियम माने थे, लेकिन बैंक ने उसे मौका ही नहीं दिया।
बैंकों के लिए चेतावनी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद 99.3 प्रतिशत से अधिक अमान्य नोट (15.31 लाख करोड़ रुपये) बैंकों में लौट आए थे। लेकिन ऐसे मुकदमों से साबित होता है कि कुछ बैंकों ने ग्राहकों के हितों की अनदेखी की। यह फैसला निजी बैंकों के लिए बड़ा सबक है, खासकर जब सरकार डिजिटल इंडिया और नकदी रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। प्रॉक्योर लॉजिस्टिक्स का केस अन्य कंपनियों के लिए मिसाल बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बैंकों की जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही पर लगाम लगेगी। नोटबंदी के 10 साल बाद यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की ताकत दिखाता है।









