
साल के आखिरी महीने के खत्म होने के साथ ही भारत के अधिकांश राज्यों में भीषण ठंड शुरू हो गई है। लगातार चल रही शीतलहर के कारण तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों के हाथ‑पैर कांप उठे हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि दुनिया की सबसे ठंडी आबाद जगह कौन‑सी है, जहां -50°C या उससे भी नीचे तापमान में बर्फीले मौसम में ज़िंदगी आम है।
ओयम्याकॉन और याकुत्स्क
दुनिया की सबसे ठंडी आबाद जगहें रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित ओयम्याकॉन (Oymyakon) और याकुत्स्क (Yakutsk) हैं, जहां अक्सर तापमान -50°C से नीचे चला जाता है। ओयम्याकॉन को पृथ्वी की सबसे ठंडी स्थायी रूप से आबाद जगह माना जाता है, जबकि याकुत्स्क दुनिया का सबसे ठंडा बड़ा शहर है, जहां लाखों लोगों का वास है। जनवरी‑फरवरी के महीनों में यहां का तापमान आमतौर पर -42°C से -50°C के बीच रहता है, और इतिहास में ओयम्याकॉन में -71.2°C तापमान तक रिकॉर्ड किया जा चुका है, जो इंसानी बस्ती वाली दुनिया का सबसे निचला तापमान माना जाता है।
ओयम्याकॉन: जहाँ सांस भी जम जाती है
ओयम्याकॉन रूस के सखा गणराज्य (याकुतिया) में बसा एक छोटा‑सा गाँव है, जहां लगभग 500–800 लोग इस भीषण ठंड के बीच भी सामान्य जीवन जीते हैं। यहाँ की जमीन पूरा साल जमी रहती है, क्योंकि जमनीय परत (पर्माफ्रॉस्ट) गहरी तक फैली होती है। गर्मी के मौसम में भी तापमान आमतौर पर -10°C के आसपास रहता है, जो अन्य जगहों के लिए ठंडी गर्मी जैसा लगता है। यहाँ लोगों को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि उनके घरों का हीटिंग सिस्टम लगातार चालू रहे, क्योंकि एक बार ठंड भीतर घुस जाए तो पूरी इमारत बर्फ की तरह जम सकती है।
जीवन की अजीब आदतें
ओयम्याकॉन जैसी जगहों पर जीवन आम नहीं, बल्कि बरकरार रखने के लिए खुद को बार‑बार ढालना पड़ता है। यहाँ बाहर निकलते ही सांस की भाप तुरंत बर्फ में बदल जाती है, और थूकने पर वह हवा में ही जम कर गिर सकता है। पानी को उबालकर पीना भी आसान नहीं, क्योंकि उसे घर से बाहर ले जाते ही वह कुछ ही सेकंड में ठोस बर्फ बन जाता है। इसलिए घरों के बाहर नल या टॉयलेट जैसी व्यवस्थाएं अक्सर आउटहाउस या दूरी पर रखी जाती हैं, ताकि पाइप लगातार जमने से बचें।
ट्रांसपोर्ट और खान‑पान
यहाँ गाड़ियाँ आमतौर पर पूरी रात चालू रखी जाती हैं या फिर खास तरह के हीट‑टेप और इंजन ब्लॉक हीटर के साथ रखी जाती हैं, क्योंकि बंद करने पर इंजन और तेल जमकर खराब हो सकते हैं। बिजली और फ्यूल‑आधारित हीटर पर निर्भरता इतनी ज़्यादा है कि किसी भी ब्रेक‑डाउन से घर की गर्मी कुछ ही मिनटों में जम सकती है। खेती लगभग नामुमकिन होने के कारण यहाँ का खान‑पान ज़्यादातर मांस‑आधारित होता है – रीनडियर, मछली, घोड़ा और अन्य जानवरों का मांस यहाँ की डाइट का अहम हिस्सा है, जिससे शरीर में गर्मी बनाए रखने में मदद मिलती है।
भारत की सबसे ठंडी आबाद जगह
भारत में भी ऐसी जगहें आबाद हैं, जहां सर्दियों में तापमान -45°C से -60°C तक जा सकता है। यह द्रास (Dras) है, जो लद्दाख में स्थित है और इसे ‘भारत का शीत मरुस्थल’ और ‘लद्दाख का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। द्रास दुनिया की दूसरी सबसे ठंडी आबाद जगह मानी जाती है, जहां स्थानीय लोग भारी ऊनी पोशाक, भट्ठियाँ और पारंपरिक घरों की बनावट के ज़रिए इस भीषण ठंड से जूझते हैं।
दुनिया की दूर–दुर्लभ जिंदगी
ओयम्याकॉन, याकुत्स्क और द्रास जैसी जगहों पर जीवन आसान नहीं है, लेकिन यहाँ के लोगों ने बर्फ और जमीन के साथ एक अजीब‑सा तालमेल बिठा लिया है। यहाँ हर रोज़ छोटी‑सी गलती या तैयारी में कमी जानलेवा हो सकती है, इसलिए वे जीवन भर उसी ठंड के नियमों के साथ चलते हैं – जैसे आग, घर और सामूहिक सहयोग जैसी चीज़ें उनके लिए जीवन‑रक्षक बन जाती हैं। यह साफ कर देता है कि इंसान न सिर्फ बर्फ बरदास्त कर सकता है, बल्कि उसी बर्फ के बीच एक अलग तरह की ज़िंदगी भी बसा सकता है।









