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BRICS Pay: डॉलर का दबदबा खत्म! अब बिना $ के होगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, भारत, चीन और रूस के इस प्लान से दुनिया हैरान

क्या डॉलर की बादशाहत खत्म होने वाली है? भारत, चीन और रूस ने मिलकर 'BRICS Pay' का वह गुप्त हथियार तैयार कर लिया है जिससे ग्लोबल ट्रेड का चेहरा बदल जाएगा। जानें इस डिजिटल पेमेंट सिस्टम का पूरा सच और अमेरिका की बढ़ती टेंशन की असली वजह।

By Pinki Negi

BRICS Pay: डॉलर का दबदबा खत्म! अब बिना $ के होगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, भारत, चीन और रूस के इस प्लान से दुनिया हैरान।
BRICS Pay

अमेरिकी डॉलर के दबदबे को खत्म करने के लिए ब्रिक्स देशों (BRICS) ने एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। भारत, चीन और रूस मिलकर एक ऐसा साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बना रहे हैं, जिससे व्यापार करने के लिए अब डॉलर की जरूरत नहीं होगी।

दरअसल, रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों और उसे ग्लोबल स्विफ्ट (SWIFT) सिस्टम से बाहर किए जाने के बाद इन देशों ने अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए यह रास्ता चुना है। इस नए सिस्टम के आने से सदस्य देश अपनी स्थानीय डिजिटल करेंसी के जरिए सीधे लेन-देन कर सकेंगे, जिससे न केवल व्यापार आसान होगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अमेरिका का दबाव भी काफी कम हो जाएगा।

ई-रुपया और डिजिटल युआन का नया संगम

इस नए पेमेंट सिस्टम की खासियत यह है कि इसके लिए किसी नई करेंसी को बनाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि भारत का ई-रुपया (e-Rupee), चीन का डिजिटल युआन और रूस का डिजिटल रूबल एक ही प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़ जाएंगे।

इस तकनीक से हर देश का अपनी मुद्रा पर पूरा नियंत्रण रहेगा और विदेशों में लेन-देन बिना किसी डॉलर आधारित ‘स्विफ्ट’ नेटवर्क के पल भर में हो जाएगा। भारत इस पूरे प्रोजेक्ट में लीडर बनकर उभर रहा है, क्योंकि हमारे पास UPI जैसा दुनिया का सबसे सफल डिजिटल अनुभव है। यह सिस्टम देशों को विदेशी दबाव से मुक्त कर अपनी शर्तों पर व्यापार करने की पूरी आजादी देगा।

बार-बार भुगतान का झंझट खत्म, ऐसे बचेगा विदेशी मुद्रा भंडार

ब्रिक्स का यह नया सिस्टम व्यापार करने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। इसमें हर छोटे सौदे का भुगतान तुरंत करने के बजाय, एक ‘सेटलमेंट साइकिल’ का पालन किया जाएगा। इसका मतलब है कि महीने भर के व्यापार का हिसाब अंत में किया जाएगा और केवल बची हुई (बकाया) रकम का ही लेन-देन होगा।

इससे बार-बार होने वाले ट्रांजेक्शन का खर्च बचेगा और देशों को अपने पास बहुत ज्यादा विदेशी मुद्रा (डॉलर) रखने की जरूरत भी कम होगी। इसके अलावा, ‘फॉरेक्स स्वैप’ सुविधा के जरिए सदस्य देशों के सेंट्रल बैंक जरूरत पड़ने पर आपस में अपनी करेंसी बदल सकेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली नकदी की समस्या आसानी से सुलझ जाएगी।

डॉलर की ‘हथियार’ वाली नीति से तंग आए देश

अमेरिका द्वारा रूस के 300 अरब डॉलर फ्रीज किए जाने के बाद दुनिया भर में यह डर फैल गया है कि डॉलर का इस्तेमाल कभी भी राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा सकता है। रूस, ईरान और उत्तर कोरिया पर लगे कड़े प्रतिबंधों को देखते हुए अब ब्रिक्स (BRICS) देश अपना एक सुरक्षित ‘बैकअप’ तैयार कर रहे हैं।

यह नया डिजिटल सिस्टम न केवल व्यापार को आसान बनाएगा, बल्कि किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट या प्रतिबंध की स्थिति में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। डोनाल्ड ट्रंप की संभावित वापसी और उनकी सख्त आर्थिक नीतियों के बीच, ब्रिक्स का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन (Power Balance) को अमेरिका से हटाकर सदस्य देशों की ओर मोड़ने की ताकत रखता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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