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लाइट गई तो पैसे मिलेंगे! स्मार्ट मीटर रिचार्ज के बाद भी 2 घंटे बिजली गुल रही तो विभाग भरेगा हर्जाना; नया नियम देखें

UP में स्मार्ट प्रीपेड मीटर वालों के लिए बड़ी राहत है। अब निगेटिव बैलेंस से कटी बिजली रिचार्ज के दो घंटे के भीतर नहीं आती, तो UPPCL उपभोक्ता को 50 रुपये प्रतिदिन मुआवजा देगा। यह प्रावधान 13 मार्च से लागू हो रहा है और यूपीERC के स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस नियमों के तहत 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं पर लागू होगा।

By Pinki Negi

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स्मार्ट मीटर रिचार्ज के बाद भी अगर दो घंटे तक लाइट नहीं आती है, तो अब यूपी के स्मार्ट उपभोक्ताओं को जेब से नहीं, बल्कि बिजली विभाग की जेब से पैसा निकलेगा। यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए नया मुआवजा नियम लागू करने का फैसला किया है, जो सीधे तौर पर 70 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड कंज्यूमर को राहत देगा।

2 घंटे में लाइट नहीं तो 50 रुपये मुआवजा

नए नियम के मुताबिक, अगर किसी उपभोक्ता का स्मार्ट प्रीपेड मीटर निगेटिव बैलेंस में चला जाता है और बिजली सप्लाई कट जाती है, तो जैसे ही उपभोक्ता अपना मीटर रिचार्ज करता है, डिस्कॉम पर जिम्मेदारी आ जाती है कि वह अधिकतम दो घंटे के भीतर सप्लाई बहाल करे। अगर रिचार्ज के दो घंटे बाद भी घर में रोशनी नहीं लौटती, तो UPPCL को उपभोक्ता को 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा, जब तक कनेक्शन फिर से जुड़ न जाए। यह प्रावधान यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 के तहत रखा गया है, जिसे अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में सख्ती से लागू किया जा रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, यह मुआवजा सीधे उपभोक्ता के खाते/प्रीपेड वॉलेट में क्रेडिट या अगली बिलिंग में समायोजित किया जाएगा, ताकि लोगों को अलग से कागजी कार्रवाई में न उलझना पड़े। हालांकि यह लाभ केवल उन मामलों में मिलेगा, जहां बिजली कटने का कारण सिर्फ निगेटिव बैलेंस हो; लाइन फॉल्ट, ट्रांसफॉर्मर खराब या तूफान आदि के कारण हुई कटौती इस दायरे से बाहर रहेगी।

13 मार्च से और सख्त होगी स्मार्ट प्रीपेड व्यवस्था

UPPCL ने 13 मार्च से पूरे प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम को और सख्ती से लागू करने की तैयारी कर ली है। नियम के अनुसार, जैसे ही स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बैलेंस खत्म होगा, सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से बिजली सप्लाई काट देगा और इसके लिए न तो लाइनमैन को मौके पर जाना होगा, न ही अलग से कोई नोटिस जारी होगा। पावर कॉरपोरेशन का दावा है कि इससे गलत बिल, औसत बिलिंग, बकाया पेमेंट और मीटर रीडिंग से जुड़ी कई पुरानी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और उपभोक्ता अपनी खपत और पेमेंट पर खुद कंट्रोल रख पाएंगे।

फिलहाल स्थिति यह है कि प्रदेश में लगभग 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं के खातों में मिलाकर करीब 1400 करोड़ रुपये का निगेटिव बैलेंस दर्ज है, यानी बड़े पैमाने पर लोग रिचार्ज नहीं कर पा रहे या देर से कर रहे हैं। ऐसे में सरकार और UPPCL दोनों चाहते हैं कि उपभोक्ता समय पर रिचार्ज करें और सिस्टम पूरी तरह प्रीपेड मोड में शिफ्ट हो सके।

स्मार्ट मीटर पर वसूले गए अतिरिक्त पैसे लौटेंगे

स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी यह पहली राहत नहीं है। हाल ही में यूपी विद्युत नियामक आयोग ने UPPCL और डिस्कॉम्स को कड़ा निर्देश दिया है कि स्मार्ट मीटर के नाम पर उपभोक्ताओं से वसूले गए अतिरिक्त शुल्क वापस किए जाएं। आयोग ने पाया कि नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए कॉर्पोरेशन ने पुराने कॉस्ट डेटा बुक 2019 के आधार पर 6016 रुपये (सिंगल फेज) और 11341 रुपये (थ्री फेज) की वसूली की, जबकि इन नई AMI-समर्थ स्मार्ट मीटरों की स्वीकृत दर उस समय तय ही नहीं थी।

UPERC के आदेश के अनुसार, इन अतिरिक्त वसूली का अनुमानित बोझ लगभग 127 करोड़ रुपये है, जिसे अब बिलों में समायोजित करके या प्रीपेड उपभोक्ताओं के खाते में क्रेडिट के रूप में लौटाया जाएगा। जहां-जहां किस्तों में मीटर का पैसा वसूला जा रहा था, वहां अनुमेय रकम पूरी होते ही किस्तें रोकने और जितना अतिरिक्त लिया जा चुका है, उसे वापस क्रेडिट करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपभोक्ता क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता को अब दो चीजें हमेशा ध्यान में रखनी होंगी- पहला, रिचार्ज का समय और उसका प्रूफ; दूसरा, शिकायत का रिकॉर्ड। जैसे ही बैलेंस खत्म होने से बिजली कटे और आप रिचार्ज करें, उसी समय का स्क्रीनशॉट, SMS या ट्रांजैक्शन आईडी सुरक्षित रखना जरूरी होगा, क्योंकि मुआवजे की गणना इसी समय से शुरू होगी। अगर दो घंटे के भीतर सप्लाई नहीं आती, तो हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कर शिकायत नंबर लेना उपभोक्ता के हित में रहेगा, ताकि बाद में मुआवजे के दावे में कोई तकनीकी बाधा न आए।

कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर लंबे समय से उठ रही शिकायतों, ओवरचार्जिंग और निगेटिव बैलेंस के दबाव के बीच यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जमीन पर डिस्कॉम इस 2 घंटे-50 रुपये मुआवजा फॉर्मूले को कितनी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू करते हैं।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।