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स्मार्ट मीटर की रीडिंग से हैं परेशान? जानें अपने कानूनी अधिकार और किन विकल्पों से मिल सकती है राहत

यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विवाद और बढ़ती शिकायतों के बाद सरकार ने पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। 75 लाख घरों में लगे प्रीपेड मीटर, अचानक कटौती और ओवर‑बिल ने जन‑आक्रोश और सड़कों पर विरोध खड़े किए। अब उपभोक्ताओं को पोस्टपेड मोड में बदलाव का अधिकार दिया गया है और जीरो बैलेंस पर भी 45 दिन तक बिजली नहीं कटने की राहत दी गई है।

By Pinki Negi

smart meter complaints solutions and consumer rights

उत्तर प्रदेश में बिजली से जुड़ा नया चरण अब सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक भी बन चुका है। करीब 75 लाख घरों में लग चुके स्मार्ट प्रीपेड मीटर और उसके बाद आए विरोध‑प्रदर्शन ने पूरी व्यवस्था को बदलने की मांग जोर‑शोर से उठा दी है। अब जब योगी सरकार ने पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है, तो यह सवाल सबसे ज्यादा ज़रूरी हो गया है कि जिन घरों में मीटर लग चुका है, वे अपनी परेशानी और बढ़े हुए बिलों से कैसे निकल सकते हैं?

यूपी में क्या हुआ, क्यों हो रहा विरोध?

स्मार्प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को मैनुअल मीटर बदलकर ऑटोमेटेड और “ईमानदार” बिजली मापन का उपकरण बताया गया था, लेकिन जैसे‑जैसे इनका डेटा बढ़ा, वैसे‑वैसे उपभोक्ताओं की शिकायतें भी तेज हो गईं। यूपी में लगभग 75 लाख घरों में प्रीपेड मोड के स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं; यह आंकड़ा देश भर में सबसे बड़ा बल्क‑इंस्टॉलेशन है। इनमें से कई मामलों में उपभोक्ता यह शिकायत कर रहे हैं कि रिचार्ज होने के बावजूद भी मीटर हाजिर‑हाजिर “नेगेटिव बैलेंस” दिखाने लगा और बिजली बिना चेतावनी के कट जाती।

इसके अलावा एक बड़ी शिकायत यह है कि स्मार्ट मीटर लगते ही करीब 5 लाख घरों में तुरंत बिजली कटौती हो गई; कई जगह तो उपभोक्ता रिचार्ज करने के बाद भी लगातार दो‑तीन दिन तक बिजली नहीं मिल पा रहे थे। यही बात आग बन गई और प्रदेश के लगभग हर बड़े शहर – कानपुर, लखनऊ, आजमगढ़, महोबा, हमीरपुर, बांदा- में सड़कों पर जमकर प्रदर्शन हुए। लोगों का आरोप था कि बिना लिखित सहमति और बिना जागरूकता के उनके घरों के मैनुअल मीटर उखाड़कर प्रीपेड स्मार्ट मीटर जबरन लगाए जा रहे हैं, जिसका परिणाम ओवर‑बिल और अचानक कटौती है।

राज्य सरकार का रुख: रोक, रिपोर्ट और राहत

इस जन‑आक्रोश के बीच यूपी विद्युत विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया- पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी गई है। यह रोक तब तक रहेगी जब तक सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय तकनीकी समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती। इस समिति को स्मार्ट मीटर की सटीकता, बिलिंग सॉफ्टवेयर, ओवर‑बिलिंग और उपभोक्ता शिकायतों की व्यापक जांच का जिम्मा दिया गया है।

इसके साथ ही ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी साफ कहा कि नए बिजली कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन जिनके घर पहले से मैनुअल या पोस्टपेड मीटर लगे हैं, उनको फोर्स‑बेस्ड बदलाव से बचाया जाएगा। साथ ही मीटर लगाने वाली कंपनियों के भुगतान पर भी रोक लगी है, ताकि जल्दबाजी में गलत तरीके से इंस्टॉलेशन न हो पाए।

उपभोक्ताओं के पास अब क्या विकल्प हैं?

राज्य स्तर पर जब से स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म हुई है, तो उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मोड चुनने का अधिकार कानूनी रूप से मिल चुका है। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 47(5) के तहत यह व्यवस्था पहले से ही थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसे स्पष्ट रूप से यूपी राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में जनहित याचिका के जरिए उठा दिया है, ताकि बिना सहमति के मीटर थोपने जैसी गतिविधियां भविष्य में रुक सकें।

जिन घरों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुका है, उनके लिए अब निम्नलिखित व्यावहारिक रास्ते खुले हैं:

  1. प्रीपेड से पोस्टपेड में बदलाव की मांग
    उपभोक्ता अपने क्षेत्र के एसडीओ या एक्सईएन ऑफिस में लिखित आवेदन दे सकता है कि उसका मीटर प्रीपेड स्मार्ट से पोस्टपेड स्मार्ट में बदला जाए। आवेदन में नाम, कन्ज्यूमर नंबर, पता और विनम्र अनुरोध लिखना जरूरी है, साथ ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 1 अप्रैल 2026 की अधिसूचना का हवाला देना या उसकी फोटोकॉपी संलग्न करना अधिकार को मजबूत करता है। आमतौर पर इस बदलाव के लिए लगभग 2,000 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी पड़ सकती है, जो बाद में बिल सेटलमेंट के बाद वापस मिल सकती है।
  2. आवेदन की रसीद और टाइम‑लाइन
    आवेदन देते समय रसीद जरूर लेना चाहिए, जिसमें दिनांक, आवेदन संख्या और अधिकारी के हस्ताक्षर हों। अगर विभाग 7-10 दिन के भीतर उत्तर नहीं देता या बदलाव नहीं करता, तो शिकायत अगले स्तर पर उठाई जा सकती है।
  3. यूपी विद्युत नियामक आयोग और उपभोक्ता फोरम
    अगर जिला‑स्तरीय शिकायत संतोषजनक नहीं होती, तो उपभोक्ता UPERC या उपभोक्ता फोरम (consumer court) में शिकायत दर्ज कर सकता है। यहां न सिर्फ मीटर बदलाव या बिल एडजस्टमेंट की मांग की जा सकती है, बल्कि अतिरिक्त चार्ज या दंड की वसूली भी रोकी जा सकती है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद भी इन शिकायतों को सिस्टम ‚लेवल पर जोड़कर बड़े फैसले निकालने में मदद कर रही है।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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