
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अचानक बढ़ी गर्मी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने बड़ा कदम उठाया है। कक्षा 1 से 8 तक के सभी स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है। अब ये स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही चलेंगे। यह व्यवस्था आज, 20 अप्रैल से ही लागू हो गई है। छोटे बच्चों पर दोपहर की तपिश का असर ज्यादा पड़ता है, इसलिए यह फैसला बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए लिया गया।
पुरानी टाइमिंग से खतरे, अब सुबह की शिफ्ट
इससे पहले स्कूल सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित हो रहे थे। दोपहर के समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता था, जिससे बच्चे बेहोशी, डिहाइड्रेशन और लू के शिकार हो रहे थे। जिले के कई स्कूलों से अभिभावकों और शिक्षकों की शिकायतें आ रही थीं कि दोपहर की छुट्टी के बाद बच्चे पैदल या बस से घर लौटते समय गर्मी की चपेट में आ जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों को ज्यादा पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन लंबे स्कूल समय के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसी खतरे को भांपते हुए DM ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी किया।
BSA के सख्त निर्देश, मिड-डे मील भी एडजस्ट
नई टाइमिंग का पालन सुनिश्चित करने के लिए BSA अनिल कुमार ने सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) और स्कूल प्रिंसिपलों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी स्कूल इस आदेश का उल्लंघन नहीं करेगा। इसके अलावा, मिड-डे मील को भी सुबह के समय ही वितरित करने के निर्देश हैं, ताकि दोपहर की गर्मी से पहले बच्चे भोजन कर सकें। अभिभावकों को सूचित करने के लिए अखबारों, व्हाट्सएप ग्रुप्स, स्कूल नोटिस बोर्ड और स्थानीय घोषणाओं का सहारा लिया जा रहा है। BSA ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव अस्थायी है और मौसम की स्थिति सुधरने पर सामान्य समय-सारिणी बहाल कर दी जाएगी।
सभी बोर्डों के स्कूल शामिल, उच्च कक्षाओं पर नजर
यह आदेश जिले के सभी प्रकार के स्कूलों पर लागू होगा। इसमें उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय स्कूल, सहायता प्राप्त संस्थाएं, मान्यता प्राप्त निजी स्कूल, CBSE, ICSE और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूल शामिल हैं। नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के नन्हे-मुन्नों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है, क्योंकि इनकी उम्र कम होने से गर्मी सहन करने की क्षमता सीमित होती है।
उच्च कक्षाओं (9 से 12) के स्कूल अभी सामान्य समय पर ही चल रहे हैं, लेकिन अगर गर्मी और बढ़ी तो उनके लिए भी विचार किया जा सकता है। जिला प्रशासन ने स्कूलों में पानी, छाया, पंखे और प्राथमिक चिकित्सा किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा है।
तापमान 42 डिग्री के पार, ऑरेंज अलर्ट जारी
प्रयागराज में पिछले एक सप्ताह से तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है। कल रविवार को अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम 28 डिग्री रहा। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। शहर के संगम नगरी इलाके, झूसी, नैनी और फाफामऊ जैसे क्षेत्रों में गर्म हवाएं चल रही हैं, जो ग्रामीण इलाकों तक फैल गई हैं।
ग्रामीण स्कूलों में भी यही समस्या है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव में दोपहर का समय बच्चों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा था। अभिभावक संगठनों ने इसका स्वागत किया है। एक अभिभावक रमा Devi ने कहा, “अब बच्चे दोपहर की धूप में नहीं जलेंगे। सुबह घर लौट आएंगे, इससे हमारी चिंता कम होगी।”
अन्य जिलों के लिए मिसाल, ग्रीष्मावकाश की संभावना
यह फैसला उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल है। लखनऊ, चंदौली, प्रतापगढ़, जौनपुर और संतकबीरनगर जैसे जिलों में भी शिक्षक संगठनों ने इसी तरह की मांग उठाई है। राज्य सरकार पहले ही निर्देश दे चुकी है कि गर्मी बढ़ने पर स्थानीय प्रशासन हालात के अनुरूप कदम उठाए। पिछले साल 2025 में हीटवेव के कारण कई जिलों में स्कूल जून तक बंद रहे थे। इस बार भी अगर तापमान 45 डिग्री को पार कर गया, तो ग्रीष्मकालीन अवकाश जल्दी घोषित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रैल में ही हीटवेव का दौर सामान्य हो गया है।
चुनौतियां बाकी, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि
प्रशासन की यह सक्रियता सराहनीय है, लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। सुबह के समय ट्रैफिक बढ़ सकता है, शिक्षकों को जल्दी उठना पड़ेगा और अभिभावकों को काम के समय के साथ तालमेल बिठाना होगा। फिर भी, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। जिला प्रशासन अब हर स्कूल से दैनिक रिपोर्ट मांग रहा है ताकि कोई समस्या न हो। प्रयागराज के इस कदम से न केवल स्थानीय स्तर पर राहत मिलेगी, बल्कि पूरे यूपी में गर्मी प्रबंधन की नई रणनीति का सूत्रपात हो सकता है।









