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हैरान कर देगी वजह! शहर के बीचों-बीच क्यों नहीं होते एयरपोर्ट? 99% लोग नहीं जानते असली कारण

आधुनिक शहरों में एयरपोर्ट शहर से दूर क्यों बनते हैं? जमीन की कमी, तेज शोर प्रदूषण, ऊंची लागत, विस्तार की चुनौती और सुरक्षा जोखिम मुख्य कारण। दिल्ली, मुंबई जैसे उदाहरणों से समझें कि बाहरी लोकेशन कैसे स्मार्ट विकल्प है। मेट्रो-एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी बेहतर!

By Pinki Negi

हैरान कर देगी वजह! शहर के बीचों-बीच क्यों नहीं होते एयरपोर्ट? 99% लोग नहीं जानते असली कारण

मेरठ, 28 मार्च 2026: आधुनिक शहरों की चमक-दमक के बीच एयरपोर्ट यात्रियों के लिए प्रवेश द्वार का प्रतीक होते हैं। विशाल टर्मिनल, लंबे रनवे और हज़ारों यात्रियों की रौनक इन्हें खास बनाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि ये एयरपोर्ट शहर के ठीक बीचों-बीच क्यों नहीं बनाए जाते? अधिकांश हवाई अड्डे शहरों से कई किलोमीटर दूर बसे होते हैं। इसके पीछे सुरक्षा, आर्थिक और पर्यावरणीय कारण छिपे हैं, जो 99% लोग नहीं जानते।

जमीन की कमी: सबसे बड़ी बाधा

एयरपोर्ट निर्माण की पहली और सबसे बड़ी बाधा है जमीन की कमी। एक व्यस्त एयरपोर्ट को कम से कम 2000-5000 एकड़ समतल जमीन चाहिए। इसमें दो-चार किलोमीटर लंबे रनवे, टैक्सीवे, टर्मिनल भवन, कार्गो क्षेत्र, ईंधन डिपो और पार्किंग शामिल होती है। शहर के घनी आबादी वाले केंद्रों में ऐसी विशाल खाली जगह ढूंढना नामुमकिन है। दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शहर से 20 किमी दूर है, क्योंकि केंद्र में जगह ही नहीं। बाहरी इलाकों में अधिग्रहण आसान और सस्ता पड़ता है।

शोर प्रदूषण: रिहायशी इलाकों के लिए सिरदर्द

शोर प्रदूषण दूसरा प्रमुख कारण है। विमान टेकऑफ या लैंडिंग पर 120-140 डेसिबल शोर पैदा करते हैं, जो सामान्य बातचीत से 100 गुना तेज होता है। शहर के बीच ये शोर रिहायशी इलाकों में रहने वालों के लिए सिरदर्द बन जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, लगातार शोर से तनाव, नींद न आना और हृदय रोग हो सकते हैं।

इसलिए FAA और ICAO जैसे संगठन एयरपोर्ट को आबादी से कम से कम 10-15 किमी दूर रखने की सलाह देते हैं। मुंबई का छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट इसका उदाहरण है, जहां शोर से परेशान निवासी लंबे समय से शिकायत करते रहे।

जमीन की ऊंची कीमत: आर्थिक रोड़ा

जमीन की ऊंची कीमत भी बड़ा रोड़ा है। शहर केंद्र में प्रति एकड़ करोड़ों रुपये लगते हैं, जबकि बाहरी क्षेत्रों में ये लागत 10-20% रहती है। उदाहरणस्वरूप, बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट को शहर से बाहर शिफ्ट करने में अरबों की बचत हुई। इससे टैक्सपेयर्स का पैसा बचता है और विकास तेज होता है।

भविष्य विस्तार: लंबी योजना का हिस्सा

भविष्य विस्तार की चुनौती भी कम नहीं। हवाई यात्रा 5-7% सालाना बढ़ रही है। शहर के बीच एयरपोर्ट बढ़ाना नामुमकिन है, क्योंकि आसपास इमारतें खड़ी हो चुकी होती हैं। नोएडा का जेवर एयरपोर्ट इसी सोच से बनाया जा रहा है, जो 2030 तक 4 रनवे वाला मेगा हब बनेगा। बाहरी लोकेशन पर विस्तार आसान रहता है।

सुरक्षा और पर्यावरण: अंतिम कड़ी

सुरक्षा और पर्यावरण अंतिम कड़ी हैं। टेकऑफ के दौरान विमानों को बाधारहित 10 किमी हवाई क्षेत्र चाहिए। शहर की ऊंची इमारतें, बिजली तार या भीड़ हादसे का खतरा बढ़ाती हैं। साथ ही, जेट ईंधन से निकलने वाली गैसें वायु प्रदूषण फैलाती हैं। बाहरी जगहों पर हरित पट्टियां लगाकर ये प्रभाव कम किया जाता है। दुर्लभ अपवादों जैसे सिंगापुर का चांगी या हॉन्गकॉन्ग का एयरपोर्ट भी अंततः विस्तार के कारण बाहर शिफ्ट हो रहे हैं।

निष्कर्षतः, एयरपोर्ट शहर से दूर रखना सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और स्थिरता का स्मार्ट फैसला है। मेट्रो, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल से कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है। अगली बार एयरपोर्ट जाते हुए इन कारणों को याद रखें!

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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