
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज होता तनाव वैश्विक तेल बाजार को हिला रहा है। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल ने आम आदमी को ईंधन संकट की चिंता में डाल दिया है। इसी बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में जबरदस्त तेजी आ गई है। खासकर दोपहिया सेगमेंट में यह बदलाव साफ दिख रहा है, जहां मार्च 2026 में बिकने वाले हर 10 वाहनों में से करीब एक इलेक्ट्रिक रहा।
वाहन डेटा के मुताबिक, इस महीने 1.7 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक चुके हैं, जो पिछले साल के 1.27 लाख से 36 फीसदी ज्यादा है। वित्त वर्ष की शुरुआत में 6 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया मार्च तक 9 फीसदी से ऊपर पहुंच गए।
युद्ध का सीधा असर सड़कों पर
यह ट्रेंड सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं। सड़कों पर इलेक्ट्रिक स्कूटरों की संख्या बढ़ रही है, क्योंकि लोग अब महंगे ईंधन से तौबा कर रहे हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष ने मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई बाधित कर दी, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगीं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध जैसा ही असर है, जब यूरोप में EV बिक्री में 12 फीसदी की उछाल आया था। भारत में भी यही हो रहा है।
चंदौली जैसे छोटे शहरों में डीलर बता रहे हैं कि अप्रैल से इलेक्ट्रिक स्कूटी के दाम 10 फीसदी बढ़ सकते हैं, लेकिन फिलहाल मांग कम नहीं हुई। लोग तेल संकट से बचने को इलेक्ट्रिक की ओर लपक रहे हैं।
बाजार में बड़ा उलटफेर
कंपनियों के बाजार में भी बड़ा उलटफेर हुआ है। कभी लीडर ओला इलेक्ट्रिक अब चौथे नंबर पर खिसक गई। टीवीएस ने पहला स्थान हासिल कर लिया, जबकि बजाज दूसरे पायदान पर मजबूती से खड़ा है। दोनों मिलकर आधा बाजार कंट्रोल कर रहे हैं। एथर एनर्जी ने तीसरा स्थान पकड़ते हुए 81 फीसदी की बिक्री वृद्धि दर्ज की। ओला को झटका इसलिए लगा, क्योंकि प्रतिस्पर्धा बढ़ी और बड़े खिलाड़ी जैसे टीवीएस-बजाज ने आक्रामक कीमतें उतारीं। ओला का दावा है कि तेल संकट ने भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की याद दिला दी, लेकिन बाजार ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।
सरकारी सहारा और चुनौतियां
सरकार भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रही है। जुलाई 2026 से घटने वाली सब्सिडी को देखते हुए 5,000 रुपये की खरीद सहायता को 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। फंड बाकी होने से यह फैसला लिया गया, हालांकि तीन-पहिया पर कोई राहत नहीं। PLI स्कीम में टाटा-महिंद्रा जैसी पुरानी कंपनियां फायदा उठा रही हैं, लेकिन स्टार्टअप्स जैसे एथर-ओला बाहर हैं। ये कंपनियां बराबरी की मांग कर रही हैं, मगर सरकार चुप। विशेषज्ञ मानते हैं कि युद्ध लंबा चला तो यह मांग और तेज होगी। डिस्काउंट और नई बैटरी टेक से कंपनियां ग्राहकों को लुभा रही हैं।
भविष्य का संकेत
कुल मिलाकर, ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत के दोपहिया बाजार को नया रंग दे दिया। पू# ईरान-इजरायल युद्ध: भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में उछाल, नया ट्रेंड सेट करने को तैयार









