
भारत में ऑनलाइन शॉपिंग की धमाल जितनी बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से साइबर ठग भी नए‑नए तरीके अपना रहे हैं। विशेष रूप से फर्जी वेबसाइट, नकली ऑफर और मोबाइल/ई‑मेल लिंक के जरिए लाखों लोग फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो इन इमरजेंसी‑स्टाइल डिस्काउंट, “बेहद सस्ते मोबाइल” और “विशेष ब्रांडेड ऑफर” वाली वेबसाइटों से बचने के लिए आम उपभोक्ता को जागरूक और सचेत रहना जरूरी है।
फर्जी साइट्स का सबसे बड़ा हथियार
ऐसी फर्जी साइट्स का सबसे बड़ा हथियार होता है – बहुत सस्ता ऑफर। यहां महंगे मोबाइल, ब्रांडेड कपड़े, जूते या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बेहद कम कीमत पर दिखाए जाते हैं, ताकि उपभोक्ता तुरंत खरीदने का फैसला कर लें। यह डिस्काउंट इतना असंभव लगता है कि असली कंपनियां आमतौर पर ऐसे ऑफर देने से भी बचती हैं, लेकिन लालच में लोग इस तर्क को आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे बड़ी खतरनाक आदत यह है कि लोग भावनात्मक रूप से “सस्तापन” पर रिएक्ट करते हैं, जांच‑पड़ताल लगभग छोड़ देते हैं।
फर्जी वेबसाइट कैसे काम करती है?
फर्जी वेबसाइट आमतौर पर असली ई‑कॉमर्स साइट जैसी दिखाई देती हैं- लेकिन उनका डोमेन गलत स्पेलिंग वाला होता है, जैसे flipkart-offer.com या amaz0n-store.shop जैसे लिंक। यहां प्रोडक्ट की तस्वीरें असली ब्रांड जैसी लगती हैं, कीमत भारी कम दिखाई देती है और पेमेंट गेटवे पर आते ही लोग अपना UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग डिटेल भर देते हैं। बाद में या तो सामान नहीं मिलता, या साइट बंद हो जाती है, और ठग लोगों के पैसे लेकर गायब हो जाते हैं।
लालच क्यों खतरनाक बन जाता है?
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि फर्जी साइट्स की पूरी स्ट्रैटेजी दिमाग के एमोशनल पार्ट पर टारगेट करने पर आधारित है। “आज ही खत्म हो रहा ऑफर”, “लिमिटेड स्टॉक”, “अंतिम 3 इकाइयां” जैसे मैसेज उपभोक्ता को जल्दी‑जल्दी फैसला लेने पर मजबूर कर देते हैं। इस दौरान लोग न तो डोमेन चेक करते हैं, न HTTPS या लॉक आइकन देखते हैं, और न ही कंपनी के “About Us” या कॉन्टैक्ट सेक्शन पर नजर डालते हैं। इसी भावुक पल में वे अपना पैसा और कभी‑कभी कार्ड डिटेल भी गंवा बैठते हैं।
फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?
अगर किसी ने फर्जी वेबसाइट या मोबाइल लिंक पर क्लिक करके पैसा ट्रांसफर कर दिया है या कार्ड डिटेल दे दी है, तो तुरंत बैंक या UPI ऐप की कस्टमर केयर पर कॉल करके कार्ड ब्लॉक करवाना जरूरी है। इसके अलावा भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज की जा सकती है, जहां ट्रांजैक्शन डिटेल, स्क्रीनशॉट और लिंक अपलोड करके पुलिस साइबर सेल तक मामला पहुंचाया जा सकता है। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी तुरंत संपर्क किया जा सकता है।
आम उपभोक्ता क्या कर सकता है?
एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि नए या अज्ञात वेबसाइट पर भारी डिस्काउंट देखकर भी ठहरकर सोचें। केवल बड़ी और भरोसेमंद वेबसाइटों या उनके ऑफिशियल ऐप पर ही महंगे उत्पाद खरीदें। गूगल पर साइट या कंपनी का नाम सर्च करके रिव्यूज़, ग्रिवेंस और फेक‑वेबसाइट की रिपोर्ट देखें। कभी भी फोन पर OTP, कार्ड की CVV या UPI पिन शेयर न करें, क्योंकि कोई भी लीगिट कंपनी इन बातों को आपसे नहीं पूछती। ऑनलाइन शॉपिंग को आसान और आरामदायक रखना जरूरी है, लेकिन इस आसानी को बेहोश लालच में बदलने से बचना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।









