
2026 में कई निजी कंपनियों ने नई लीव साइकिल शुरू कर दी है। लंबे वीकेंड्स बढ़ गए हैं, जिससे कर्मचारी छुट्टियों की प्लानिंग में जुटे हैं। लेकिन सवाल उठ रहा है- अगर मेडिकल लीव या प्रिविलेज लीव खत्म हो जाए, तो क्या नौकरी पर संकट मंडरा सकता है? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ तय छुट्टियों से ज्यादा अवकाश लेने मात्र से नौकरी नहीं जाती। हालांकि, अगर कर्मचारी की जवाबदेही घटी हो, सही जानकारी न दी हो या प्रदर्शन खराब हो, तो ज्यादा छुट्टियां टर्मिनेशन का आधार बन सकती हैं।
लीव पॉलिसी में बदलाव
इस साल कई फर्म्स ने लीव स्ट्रक्चर सरल बनाया है। एक कंपनी ने कैजुअल और सिक लीव बंद कर केवल 12 सालाना छुट्टियां दी हैं। मेडिकल लीव अब सिर्फ अस्पताल एडमिशन पर ही मिलेगी, वो भी साल में 6 दिन (3 जनवरी में, 3 जुलाई में)। डॉक्यूमेंट्स अनिवार्य हैं। मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 1 जनवरी से लागू हो चुके, जहां चिकित्सा प्रमाण-पत्र जरूरी है। निजी सेक्टर में कंपनी पॉलिसी हावी है, लेकिन श्रम कानून सुरक्षा देते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट की वकील ग्राहिता अग्रवाल बताती हैं, “बीमारी या बार-बार छुट्टी अपने आप में मिसकंडक्ट नहीं। नौकरी तभी खत्म हो सकती है जब अवकाश लंबा हो, काम प्रभावित हो, नोटिस दिया गया हो, सुनवाई का मौका मिला हो और मेडिकल जांच हुई हो। नोटिस पीरियड या पेमेंट के बिना यह गैरकानूनी है।” इस्तीफे के नोटिस पीरियड में सामान्य छुट्टी से टर्मिनेशन नहीं होता, जब तक गंभीर उल्लंघन न हो।
लंबी बीमारी पर कानूनी ढाल
इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट 1947 के तहत लंबी बीमारी से टर्मिनेशन रिट्रेंचमेंट नहीं माना जाता। मतलब, 15 दिन प्रति वर्ष सेवा का मुआवजा जरूरी नहीं। लेकिन बीमारी वास्तविक हो, मेडिकल दस्तावेज हों, 30 दिन नोटिस या पेमेंट हो और सुनवाई हो। फैक्ट्रीज एक्ट 1948, पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 और स्टैंडिंग ऑर्डर्स प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं। बिना प्रक्रिया के बर्खास्तगी को लेबर कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
मेडिकल लीव खत्म होने पर लीव विदाउट पे (LWP) का कोई फिक्स्ड लिमिट नहीं। कंपनी नीति पर निर्भर। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- लिखित अनुमति लें, वापसी डेट तय करें, HR को अपडेट रखें। बिना सूचना लंबी अनुपस्थिति को इस्तीफा माना जा सकता है। 2026 के नए नियमों में मेडिकल सर्टिफिकेट गारंटी नहीं देता; स्वीकृति अधिकारी का विवेक महत्वपूर्ण है।
नौकरी बचाने के उपाय
कर्मचारियों को सलाह: सभी लीव एप्लीकेशन, डॉक्टर सर्टिफिकेट, ईमेल संभालकर रखें। LWP लेते समय स्पष्ट करें कि बिना वेतन है। प्रदर्शन बनाए रखें। अगर टर्मिनेशन हो, 90 दिनों में राज्य लेबर कमिश्नर से शिकायत करें। कोर्ट में नौकरी बहाली, बैक वेज या लंपसम मुआवजा मिल सकता है। निजी कंपनियों में बढ़ते केस दिखाते हैं कि जागरूकता जरूरी है। साफ कम्युनिकेशन और दस्तावेजीकरण से नौकरी सुरक्षित रहती है। 2026 की नई लीव साइकिल अवसर तो लाई, लेकिन सतर्कता बरतनी होगी।









