
पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से क्रूड ऑयल और LPG की सप्लाई चेन चरमरा गई, जिसके चलते देशभर में गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगीं। सरकार ने LPG डिलीवरी और कीमतों में इजाफा कर संकट थामा, तो पेट्रोल कंपनियों को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाई। अब इस संकट की चपेट में सीमेंट इंडस्ट्री आ गई है। अप्रैल 2026 से कंपनियां बैग प्रति 20-60 रुपये तक महंगाई लाने की तैयारी में हैं।
युद्ध का सीधा असर उत्पादन लागत पर
ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदी से कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। सीमेंट भट्टियों में इस्तेमाल होने वाले पेटकोक और कोयले की कीमतें 150-200 रुपये प्रति टन चढ़ चुकी हैं। सबसे बड़ी समस्या पैकिंग मटेरियल की है। पॉलीप्रोपाइलीन बैग्स के लिए प्लास्टिक की भारी कमी हो गई, क्योंकि रिफाइनरियां क्रूड से LPG प्राथमिकता दे रही हैं। इसके चलते बोरियों के दामों में उछाल आया है। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट भी फ्रेट महंगाई से बढ़ गई। जानकारों के मुताबिक, इन लागतों को कवर करने के लिए कंपनियों को बैग पर 20-30 रुपये का इजाफा करना पड़ेगा, जो पिछले सालों के 7-8 रुपये के औसत से कहीं ज्यादा है।
देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी UltraTech सबसे पहले दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इंडस्ट्री सूत्र बताते हैं कि मार्च में कोई कंपनी इजाफा नहीं करेगी, क्योंकि साल के अंत में सेल्स टारगेट पूरा करने का दबाव रहता है। UltraTech के पीछे Ambuja, Shree Cement और Dalmia जैसी कंपनियां कदम मिलाएंगी। वेस्ट एशिया संकट से पहले ही ओवरकैपेसिटी की समस्या झेल रही इंडस्ट्री अब दोहरी मार ले रही है।
स्टील महंगा, निर्माण कॉस्ट में 5-7% उछाल
सीमेंट के साथ स्टील कंपनियां भी लागत बढ़ाने का हवाला देकर दाम चढ़ाएंगी। एक औसत घर निर्माण में सीमेंट कुल लागत का 5% होता है, लेकिन स्टील के साथ मिलकर यह 10-15% तक बोझ बढ़ा सकता है। उत्तर भारत में, खासकर मेरठ जैसे क्षेत्रों में रेत-बजरी, सरिया और टाइल्स के दाम पहले ही 20% चढ़ चुके हैं। सड़क, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स महंगे होंगे। बिल्डर फ्लैट रेट बढ़ा सकते हैं, जिससे आम आदमी पर महंगाई का दबाव पड़ेगा।
मांग मजबूत, लेकिन मार्जिन पर दबाव
जानकारों का कहना है कि इंफ्रा प्रोजेक्ट्स और रियल एस्टेट की मजबूत डिमांड खपत को सहारा देगी। कंपनियां पूरी लागत एक झटके में नहीं डालेंगी, बल्कि मार्जिन धीरे-धीरे सुधारेंगी। HSBC और Elara Securities जैसी रिपोर्ट्स में 4-5% कीमत वृद्धि और प्रति टन 150-200 रुपये EBITDA प्रभाव का अनुमान है। फिलहाल मार्च 2026 में औसत बैग रेट 343 रुपये है, जो अप्रैल से 353-400 तक पहुंच सकता है।
घर बनाने की योजना वाले उपभोक्ताओं को सलाह है कि मार्च में स्टॉक खरीद लें या डिस्काउंट तलाशें। वैश्विक संकट से भारत का 74 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित हो रहा है। अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो महंगाई की लहर और तेज होगी।









