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Income Tax New Rules: आज 1 अप्रैल से बदल गया आपकी ‘इन-हैंड सैलरी’ का गणित! टैक्स से जुड़े ये 7 बड़े बदलाव फौरन जान लें

1 अप्रैल 2026 से नया Income Tax Act 2025 लागू हो गया है, जिससे सैलरीड क्लास की इन‑हैंड सैलरी और टैक्स‑बचत दोनों पर असर पड़ रहा है। ओल्ड टैक्स रिजीम में बच्चों की पढ़ाई, HRA, मील कार्ड और गिफ्ट‑कार्ड जैसे बड़े फायदे जोड़े गए हैं, जबकि कंपनी की लोन और कार सुविधाओं पर टैक्स बढ़ाया गया है।

By Pinki Negi

Income Tax New Rules: आज 1 अप्रैल से बदल गया आपकी 'इन-हैंड सैलरी' का गणित! टैक्स से जुड़े ये 7 बड़े बदलाव फौरन जान लें

नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही इनकम टैक्स के नए नियमों ने सैलरीड क्लास की जेब और टैक्स‑गणित दोनों पर तेज़ असर डालना शुरू कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से Income Tax Act 2025 लागू हो गया है, जो पुराने 1961 के एक्ट की जगह ले रहा है, लेकिन सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब यह है कि आपकी दरें वही रहेंगी, लेकिन बेनिफिट्स, छूट और कंपनीअलाउंस पर रूल्स इतने बदल गए हैं कि आपकी इन‑हैंड सैलरी भी गिर सकती है और टैक्स बचत भी नए फॉर्मूले पर निर्भर करेगी।

बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल पर भारी छूट

नए नियमों में सबसे बड़ी राहत परिवारवालों को मिल रही है। अब बच्चों के एजुकेशन अलाउंस की छूट 100 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे से बढ़कर 3,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे हो गई है। इसी तरह हॉस्टल अलाउंस भी 300 से 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। इन छूटों से सीधा फायदा वहां मिलेगा जहां आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं, क्योंकि नए रिजीम में ये अलाउंस फुल‑टैक्सेबल माने जाएंगे।

अगर आपके दो बच्चे हैं और आप ओल्ड रिजीम में हैं तो सालाना 72,000 रुपये तक टैक्स‑फ्री एजुकेशन अलाउंस घटता है, जिससे आपकी टैक्सेबल इनकम कम होगी और हाई ब्रैकेट वाले लोगों को लाखों में टैक्स बचत भी हो सकती है।

बड़े शहरों में HRA अब ज्यादा सस्ता

HRA के नियमों में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत तक HRA छूट मिलती थी, लेकिन अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को भी उसी 50 प्रतिशत कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि इन आठ शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब भी बेसिक का 50% तक HRA छूट दावा कर पाएंगे, जबकि बाकी शहरों में 40% ही रहेगा। यह फायदा भी ओल्ड टैक्स रिजीम वालों के लिए ज़्यादा काम आएगा, क्योंकि नए रिजीम में HRA की यह बड़ी खिड़की नहीं रहेगी।

मील कार्ड, खाना‑पीना और गिफ्ट कार्ड पर नई टैक्स‑छूट

कई “छोटी‑मोटी” छूटों को भी नए नियमों में बढ़ाया गया है। कंपनी की तरफ से दिया जाने वाला फ्री खाना या नॉन‑अल्कोहॉलिक ड्रिंक अब प्रति मील 50 रुपये से बढ़कर 200 रुपये तक टैक्स‑फ्री माना जाएगा, जो ओल्ड रिजीम के तहत दर्ज है। अगर आप महीने में 22 कार्यदिवस काम करते हैं तो ऐसे में सालभर में इस छूट से करीब एक लाख रुपये तक की टैक्स‑बचत संभव है।

इसी तरह कंपनी की तरफ से दिए जाने वाले गिफ्ट कार्ड, गिफ्ट सर्टिफिकेट या कूपन पर भी नया नियम बना है। ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत 15,000 रुपये तक की राशि अब टैक्स फ्री मानी जाएगी, जबकि पहले यह लिमिट काफी कम थी। इससे त्योहारों या परफॉर्मेंस बोनस के रूप में दिए जाने वाले गिफ्ट‑पैकेज अब टैक्स‑फ्रेंडली बन रहे हैं, लेकिन यह लाभ भी ओल्ड रिजीम वालों के लिए ज़्यादा उपयोगी है।

कंपनी की तरफ से लोन और कार

कुछ जगहों पर नए नियम लोगों को और ज़्यादा टैक्स भरने पर मजबूर कर रहे हैं। अब यदि कंपनी आपको बिना ब्याज या मार्केट रेट से कम ब्याज पर लोन देती है तो उस पर टैक्स लगेगा। इसकी कैलकुलेशन SBI की लेंडिंग रेट और आपके असल लोन रेट के अंतर पर की जाएगी, जिसे “परक इनकम” माना जाएगा। हालांकि यहां भी छूट है: 2 लाख रुपये तक का छोटा लोन और मेडिकल इमरजेंसी के लिए लिया गया लोन टैक्स फ्री रहेगा, जबकि पहले छोटे लोन की लिमिट सिर्फ 20 हजार रुपये थी।

इसी तरह कंपनी की कार भी नए नियमों के तहत महंगी हो गई है। अगर आपकी कंपनी आपको ऑफिस और पर्सनल यूज दोनों के लिए कार देती है, तो अब इस पर टैक्स बढ़ गया है। 1.6 लीटर इंजन तक की कार पर टैक्सेबल वैल्यू 8,000 रुपये प्रति माह और इससे बड़ी कार पर 10,000 रुपये प्रति माह तय की गई है, जो दोनों ही ओल्ड और न्यू रिजीम पर लागू होगी। इससे कई बड़े बैंक और MNC‑कर्मचारियों की इन‑हैंड सैलरी और भी घट सकती है।

लेबर कोड और ट्रेडिंग‑टैक्स भी बदले

टैक्स नियमों के साथ‑साथ नए लेबर कोड्स भी सैलरी स्ट्रक्चर को बदल रहे हैं। कंपनियों को अब सैलरी का कम‑से‑कम 50 प्रतिशत हिस्सा बेसिक वेज के रूप में देना ज़रूरी है, जिससे PF और ग्रेच्युटी कटौती बढ़ेगी और लंबी अवधि में रिटायरमेंट‑सेविंग तो मजबूत होगी, लेकिन महीने के अंत में घर आने वाली इन‑हैंड सैलरी घट सकती है।

इसी के साथ शेयर ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट से जुड़े नियम भी बदले हैं। इक्विटी डेरिवेटिव्स (F&O) पर लगने वाला Security Transaction Tax (STT) भी बढ़ा दिया गया है, जिससे डे‑ट्रेडरों और शॉर्ट‑टर्म इन्वेस्टरों की ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी। साथ ही अब शेयर बायबैक से मिली राशि को कैपिटल गेन टैक्स के तहत जोड़ा जाएगा, जिससे कॉरपोरेट इन्वेस्टर और हाई‑नेट‑वर्थ इन्वेस्टरों पर टैक्स बोझ बढ़ेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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