
देशभर के हाईवे पर रोजाना लाखों वाहन चालक टोल प्लाजा पर जाम और भुगतान की परेशानी से जूझते हैं। केंद्र सरकार ने इसी समस्या का समाधान लाने के लिए 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर पूरी तरह कैशलेस सिस्टम लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन अंतिम समय पर इस योजना को एक महीने के लिए स्थगित कर दिया गया। अब नया नियम 1 मई 2026 से प्रभावी होगा। दैनिक हिंदुस्तान की रिपोर्ट और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के बयान के अनुसार, तकनीकी तैयारियों में कमी के कारण यह फैसला लिया गया।
योजना में देरी का ऐलान
यह बदलाव यात्रियों के लिए दोहरी मार लेकर आया। एक तरफ कैश बंद होने से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल पुराने तरीके से भुगतान जारी रहेगा। मंत्रालय के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 1 मई से टोल पर नकद लेनदेन पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। अगर किसी वाहन का FASTag रीड नहीं होता या बैलेंस कम है, तो यात्री UPI, QR कोड या अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान कर सकेंगे। लेकिन इसकी कीमत बेस टोल रेट से 25 प्रतिशत अधिक यानी 1.25 गुना चुकानी पड़ेगी। यह प्रोसेसिंग फीस नगद भुगतान को हतोत्साहित करने का सरकारी तरीका है।
कैशलेस सिस्टम का उद्देश्य
कैशलेस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य टोल संग्रह को तेज, पारदर्शी और जाममुक्त बनाना है। वर्तमान में लगभग 1150 टोल प्लाजा प्रभावित हैं, जहां कैश लेन-देन से लंबी कतारें लगती हैं, खासकर त्योहारों और पीक आवर्स में। NHAI ने पहले ही FASTag को अनिवार्य कर दिया था, लेकिन बिना वैध FASTag के दोगुना टोल वसूलने का नियम लागू है।
नई गाइडलाइन में रीडर खराब होने या FASTag में पर्याप्त बैलेंस होने पर वाहन को जीरो कॉस्ट यानी मुफ्त पारित करने का प्रावधान है। सबसे बड़ी राहत गलत कटौती के रिफंड में मिलेगी। पहले 7-15 दिन लगते थे, अब 48 घंटे के अंदर पैसा खाते में वापस आना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो बैंकों और टोल एजेंसियों पर प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगेगा।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
यात्रियों को अब FASTag बैलेंस अपडेट रखना और UPI ऐप्स तैयार रखना होगा। वार्षिक FASTag फीस भी 3075 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि कुछ प्लाजा पर टोल दरें 5-25 रुपये बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या बाधा बन सकती है।
फिलहाल 1 अप्रैल को कोई बदलाव न होने से चालकों को राहत मिली है, लेकिन मई से पहले तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए। टोल फ्री नंबर 1033 पर शिकायत दर्ज कर रिफंड तुरंत पा सकते हैं। सरकार का यह फैसला हाईवे सफर को सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो।









