
ट्रैफिक जाम या हाईवे पर अचानक कार बंद पड़ जाए तो परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए ड्राइवरों को सतर्क रहना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, कार के स्टार्ट न होने या बीच रास्ते में रुक जाने की एक प्रमुख वजह बैटरी का कमजोर होना है। सामान्यतः कार की बैटरी 3 से 5 साल तक अच्छा प्रदर्शन करती है, लेकिन उमस भरे मौसम, अनियमित ड्राइविंग या रखरखाव की कमी से इसकी आयु घट सकती है। समय रहते इन संकेतों पर ध्यान देकर न सिर्फ दुर्घटना टाली जा सकती है, बल्कि महंगे रिपेयर से भी बचा जा सकता है।
बैटरी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करें
कार की बैटरी धीरे-धीरे कमजोर होती है और खत्म होने से पहले कई चेतावनी संकेत देती है, जिन्हें ज्यादातर लोग अनदेखा कर देते हैं। सबसे पहला संकेत है इंजन स्टार्ट होने में देरी। अगर पहले जहां चाबी घुमाते ही गाड़ी तुरंत चालू हो जाती थी, वहीं अब क्रैंकिंग में देर लग रही है या बटन दबाने पर इंजन बार-बार कोशिश करता है, तो बैटरी की पावर घट चुकी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बार-बार जंप स्टार्ट की जरूरत पड़ना भी इसी समस्या की ओर इशारा करता है। व्यस्त सड़कों पर ऐसा होने से न सिर्फ समय बर्बाद होता है, बल्कि अन्य वाहनों के लिए खतरा भी पैदा हो जाता है।
डैशबोर्ड वॉर्निंग लाइट का महत्व
दूसरा बड़ा संकेत है डैशबोर्ड पर बैटरी वॉर्निंग लाइट का जलना। ड्राइविंग के दौरान अगर इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में लाल बैटरी आइकन चमकने लगे, तो यह चार्जिंग सिस्टम या बैटरी में खराबी की सूचना देता है। इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे अल्टरनेटर या वायरिंग पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। तीसरा लक्षण इलेक्ट्रिकल फीचर्स में खराबी है।
हेडलाइट्स का फीका पड़ना, इंडिकेटर का टिमटिमाना, पावर विंडो का धीमे चलना या इंफोटेनमेंट स्क्रीन का बार-बार बंद होना- ये सभी कमजोर बैटरी के प्रभाव हैं। इंजन बंद होने पर ये लक्षण और स्पष्ट हो जाते हैं, जो रात के सफर में दुर्घटना को न्योता दे सकते हैं।
बैटरी के भौतिक बदलावों पर नजर
चौथा संकेत बैटरी के भौतिक बदलाव से जुड़ा है। अगर बैटरी का केस फूल गया हो या उससे तेज गंध आ रही हो, तो ओवरहीटिंग या एसिड लीकेज का खतरा है। ऐसी स्थिति में बैटरी को तुरंत बदलना जरूरी है, वरना विस्फोट का जोखिम भी रहता है। पांचवां लक्षण टर्मिनल पर जंग या सफेद-नीले पदार्थ का जमाव है। ये करप्शन करंट प्रवाह बाधित करता है, जिससे स्टार्टिंग प्रभावित होती है। गर्मी और नमी वाले इलाकों जैसे उत्तर प्रदेश में यह समस्या आम है।
रखरखाव से बचाव संभव
वाहन विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित जांच से इन मुश्किलों से बचा जा सकता है। हर 6 महीने में वोल्टेज चेक करवाएं और साफ-सुथरे कनेक्शन रखें। अगर बैटरी पुरानी हो, तो मौसम बदलने से पहले ही नई लगवा लें। जागरूक ड्राइवर ही सुरक्षित सफर करते हैं।









