
ओडिशा सरकार ने भीषण गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। राज्य में गर्मी‑छुट्टियाँ तय समय से पहले शुरू करते हुए 27 अप्रैल 2026 से राज्य भर के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मंजूरी के बाद लिया गया यह निर्णय बच्चों और शिक्षकों को भीषण तापमान और हीट‑स्ट्रोक के जोखिम से बचाने का साफ संकेत माना जा रहा है।
ओडिशा: 27 अप्रैल से स्कूलों पर “ताला”
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अनुसार गर्मियों की छुट्टियाँ अब 27 अप्रैल 2026 से शुरू होंगी, जबकि पहले यह अवधि जून के पहले हफ्ते से शुरू होनी थी। इस आदेश के तहत पूरे राज्य के सभी प्रकार के स्कूल 27 अप्रैल से बंद रहेंगे, यानी बच्चों को दोपहर की तेज धूप और लू के चपेट में घर‑स्कूल की लंबी यात्रा से राहत मिलेगी।
सरकार ने साफ‑साफ कहा है कि यह बंदी “अध्ययन‑गतिविधियों पर प्रतिबंध” नहीं, बल्कि “सुरक्षा उपाय” है। जहाँ सामान्य कक्षाएँ रोक दी गई हैं, वहीं उच्च माध्यमिक और अन्य आगे की कक्षाओं की परीक्षाएँ, जनगणना कार्य और अन्य आधिकारिक गतिविधियाँ अपने‑अपने तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी।
हीटवेव का अलर्ट और तापमान का मानचित्र
राज्य के मौसम विभाग और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार ओडिशा के कई इलाकों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, जबकि कुछ जिलों में पारा 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है। खुर्दा, क्योंझर, अंगुल, संबलपुर, झारसुगुड़ा और बोलांगीर जैसे जिलों में विशेष “हीटवेव” वार्निंग जारी की गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में येलो वार्निंग लागू है।
इस लहर के साथ ही हीटआरोस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बच्चों में चक्कर, उल्टी जैसे मामले बढ़ने की चिंता भी बढ़ गई थी, जिसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल व जन शिक्षा विभाग की सिफारिश पर समय से पहले छुट्टियाँ शुरू करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिसे तुरंत मंजूरी दे दी गई।
ओडिशा में पहले से बदला गया स्कूल‑समय
सरकार ने गर्मी के खतरे को देखते हुए पहले ही कई जोखिम‑नियंत्रण कदम उठाए थे। मार्च 2026 में राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि गर्मियों के दौरान कक्षाएँ मॉर्निंग शिफ्ट में चलाई जाएँगी, ताकि बच्चे तपती दोपहर की धूप में कम देर बाहर रहें। इस निर्णय के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों का समय भी घटाकर सुबह 7 बजे से 9 बजे तक ही रख दिया गया था, जिससे छोटे बच्चों पर लू का असर कम रहे।
इन उपायों के बावजूद तापमान में लगातार उछाल और IMD की चेतावनी के बाद सरकार ने यह तय किया कि तब तक जब तक हालात बेहतर न हों, बच्चों को स्कूल जाने की जरूरत नहीं है, इसलिए छुट्टियाँ पहले ही शुरू कर दी गईं।
देश‑भर में गर्मी का असर
ओडिशा के आदेश के बीच देश के अन्य हिस्सों में भी गर्मी का असर स्कूली गतिविधियों पर साफ नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा है, जिसे देखते हुए स्कूलों का समय बदल दिया गया है। लखनऊ में छोटी कक्षाओं के लिए सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक की शिफ्ट लागू की गई है, ताकि बच्चे दोपहर की तेज धूप में घर न जाएँ।
इसी तरह बिहार के पटना, बक्सर, आरा, शेखपुरा और बेगूसराय जैसे जिलों में स्कूल दोपहर 11:30 या 12 बजे तक ही चलेंगे, उसके बाद बच्चों को घर भेज दिया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि बच्चों की सेहत सबसे जरूरी है, इसलिए गर्मी के इस दौर में एहतियात बरतना न केवल जरूरी, बल्कि अनिवार्य भी है।
गर्मी और शिक्षा का संतुलन
स्कूल बंद करना या उनका समय बदलना केवल एक “अस्थायी उपाय” नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के खिलाफ राज्य सरकारों की तैयारी का हिस्सा है। ओडिशा की तरह अन्य राज्यों के शिक्षा विभाग भी अब गर्मी‑मौसम के लिए अलग कैलेंडर और गाइड‑लाइन तैयार कर रहे हैं, जिसमें टाइमिंग बदलना, आउटडोर एक्टिविटीज पर रोक और छात्रों को पानी‑छाया की व्यवस्था जैसे निर्देश शामिल हैं।
इस बीच ओडिशा में 27 अप्रैल से शुरू होने वाली गर्मी‑छुट्टियाँ सिर्फ राहत का निशान नहीं, बल्कि यह भी बयान करती हैं कि अब मौसम की गर्मी सीधे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य की टाइमिंग पर ही निर्णय लेने लगी है।





