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H-1B Visa Update: अमेरिका में वीजा नियमों को बदलने की तैयारी! क्या वाकई H-1B पर लगेगा 3 साल का ब्रेक? भारतीयों की बढ़ी टेंशन

H-1B वीजा पर संकट: अमेरिकी कांग्रेस में 'End H-1B Visa Abuse Act 2026' बिल पेश, नए वीजा पर 3 साल की रोक का प्रस्ताव। रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन की अगुवाई में सख्त नियम: कोटा घटाकर 25,000, न्यूनतम $200,000 वेतन। लाखों भारतीय आईटी पेशेवर चिंतित।

By Pinki Negi

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अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसदों के एक धुर दक्षिणपंथी गुट ने H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह पटरी से उतारने की ठोस कोशिश शुरू कर दी है। 22 अप्रैल 2026 को पेश किए गए ‘End H-1B Visa Abuse Act of 2026‘ नामक विधेयक के तहत नए H-1B वीजा जारी करने पर पूरे तीन साल के लिए रोक लगाने का प्रस्ताव है।

सांसद एली क्रेन द्वारा प्रस्तुत यह बिल न केवल वीजा सिस्टम को नए सिरे से ढालने की मांग करता है, बल्कि मौजूदा नियमों में कड़े प्रतिबंध थोपने का इरादा रखता है। ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत यह कदम भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है, क्योंकि भारत 72-75 प्रतिशत H-1B वीजा का हिस्सा रखता है।

सांसद क्रेन का सख्त रुख

क्रेन ने बिल पेश करते हुए साफ कहा कि केंद्र सरकार का काम मेहनती अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना है, न कि बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे को बढ़ावा देना। “हमारी जिम्मेदारी है कि इस खराब H-1B सिस्टम को रोका जाए, जो योग्य अमेरिकियों को उनकी नौकरियों से वंचित कर रहा है।” उनके अनुसार, यह प्रोग्राम अमेरिकी श्रमिकों के लिए ‘आर्थिक जहर’ साबित हुआ है, जहां विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर रखकर कंपनियां अरबों डॉलर कमा रही हैं। बिल को ब्रैंडन गिल, पॉल गोसर और एंडी ओगल्स जैसे प्रमुख रिपब्लिकन सांसदों का खुला समर्थन मिला है, जो इसे राष्ट्रवादी एजेंडे का अहम हिस्सा मानते हैं।

बिल के कठोर प्रावधान

बिल के मुख्य प्रावधान बेहद सख्त हैं। वर्तमान में सालाना 85,000 H-1B वीजा (65,000 रेगुलर + 20,000 मास्टर्स डिग्री वाले के लिए) जारी होते हैं, लेकिन प्रस्तावित बदलाव इसे घटाकर महज 25,000 कर देंगे और सभी छूटें समाप्त हो जाएंगी। रैंडम लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन-आधारित चयन प्रक्रिया लागू होगी, जिसमें न्यूनतम सालाना वेतन 200,000 डॉलर तय किया गया है।

नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्हें कोई योग्य अमेरिकी उम्मीदवार नहीं मिला और उन्होंने हाल ही में छंटनी नहीं की। थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसियां, जो भारतीय आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के लिए कर्मचारियों को सप्लाई करती हैं, पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएंगी। H-1B वीजा धारक एक से अधिक नौकरियां नहीं कर सकेंगे।

अतिरिक्त प्रतिबंधों की चोट

इसके अलावा, आश्रितों (H-4 वीजा) को साथ लाने पर रोक, ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) प्रोग्राम का खात्मा और वीजा धारकों को ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) के लिए आवेदन करने से रोक जैसे प्रावधान हैं। सांसद गिल ने कहा, “मैं क्रेन के इस प्रयास का सह-प्रायोजक बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं। यह सुनिश्चित करेगा कि हमारा इमिग्रेशन सिस्टम विदेशियों से पहले अमेरिकी कामगारों की रक्षा करे।” गोसर ने इसे और साफ शब्दों में रखा: “H-1B का गलत इस्तेमाल हो रहा है। सस्ते विदेशी कर्मचारियों से अमेरिकियों की जगह ली जा रही है। यह बिल उसी व्यवस्था को तोड़ देगा।”

भारतीय समुदाय में हड़बड़ी

भारतीय समुदाय में यह खबर तूफान की तरह फैली है। अमेरिका में करीब 5 लाख भारतीय H-1B पर निर्भर हैं, ज्यादातर आईटी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग सेक्टर में। अगर बिल पास होता है, तो नई भर्तियां रुकेंगी, जिससे कंपनियों को अमेरिकी बाजार में संकट झेलना पड़ेगा। मौजूदा वीजा धारकों पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन एक्सटेंशन और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।

फरवरी 2025 से ही USCIS ने लॉटरी खत्म कर स्किल और हाई-पे वाले को प्राथमिकता दी थी, दिसंबर 2025 से सोशल मीडिया जांच सख्त हुई और मार्च 2026 में न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव आया। अब यह बिल पूरे सिस्टम को उखाड़ फेंकने की कोशिश है।

भविष्य की राहत या संकट?

विश्लेषकों का मानना है कि बिल पास होने की संभावना 40-50 प्रतिशत है, क्योंकि रिपब्लिकन बहुमत के बावजूद बिग टेक लॉबी (गूगल, एमेजॉन) विरोध कर रही है। भारतीय पेशेवरों को L-1, O-1 वीजा या कनाडा जैसे विकल्प तलाशने की सलाह दी जा रही है। USCIS.gov और कांग्रेस वोटिंग पर नजर रखें। स्थिति तेजी से बदल रही है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की नीतियां भारतीय डायस्पोरा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही हैं

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।