Tags

Water Crisis in India: 60 करोड़ लोग प्यासे! देश में गहराते जल संकट के बीच अब ‘गंदा पानी’ ही आखिरी उम्मीद? डराने वाली है ये रिपोर्ट

भारत आजादी के 79 साल बाद भी पानी के भयंकर संकट से जूझ रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 60 करोड़ लोग गंभीर जल कमी झेल रहे हैं। ग्रामीण महिलाएं किमी चलकर पानी लाती हैं, शहरों में भूजल 300 मीटर नीचे। जलाशय 44% पर, हर साल 2 लाख मौतें।

By Pinki Negi

india water crisis report recycled water necessity

भारत आजादी के 79 साल बाद भी पानी के भयंकर संकट से जूझ रहा है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 60 करोड़ लोग गंभीर जल कमी का सामना कर रहे हैं, जो कुल आबादी का आधा हिस्सा है। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं रोजाना 5-10 किलोमीटर पैदल चलकर मटके भर पानी लाती हैं, जबकि महानगरों में भूजल स्तर 300 मीटर तक नीचे चला गया है। केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों से साफ है कि 166 प्रमुख जलाशयों में स्टोरेज क्षमता महज 44.71% बची है, जो दो महीने में 22% गिर चुका।

इस संकट ने न सिर्फ जीडीपी को 6% तक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी है, बल्कि हर साल 2 लाख लोगों की मौत भी साफ पानी न मिलने से हो रही है।

संकट की जड़ें और विस्तार

यह संकट अचानक नहीं पैदा हुआ। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूजल निकालने वाला देश है, जो वैश्विक खपत का 25% अकेले इस्तेमाल करता है। उत्तर-पश्चिमी राज्य जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भूजल रिचार्ज से 3 गुना तेजी से खत्म हो रहा है। 2001 में प्रति व्यक्ति 1816 क्यूबिक मीटर उपलब्ध जल 2011 तक घटकर 1545 पर आ गया और 2031 तक महज 1367 रह जाएगा। 2030 तक मांग आपूर्ति से दोगुनी हो जाएगी, क्योंकि बढ़ती आबादी, नगरीकरण, कृषि में 80% पानी की बर्बादी और जलवायु परिवर्तन बाढ़-सूखे की चरम घटनाओं को बढ़ा रहे हैं।

बेंगलुरु रोज 20 करोड़ लीटर पानी की कमी झेल रहा है, मुंबई-चेन्नई टैंकरों पर निर्भर हैं, जबकि गंगा-यमुना जैसी नदियां अनुपचारित सीवेज से काली पड़ गई हैं। 28 राज्यों में से सिर्फ 10 में गंदे पानी के रीयूज की नीति है, बाकी नदियों को जहर बना रहे हैं।

3R नीति: एकमात्र रास्ता

सरकार ने जवाब में ‘3R’ नीति (Reduce, Recycle, Reuse) को अपनाया है। वेस्ट वाटर रीयूज यानी गंदे पानी को शोधित कर दोबारा इस्तेमाल ही एकमात्र रास्ता है। वर्तमान में कुल वेस्ट वाटर का सिर्फ 28-30% ही ट्रीट होता है। ग्रे वाटर (नहाने, कपड़े-बर्तन धोने से) आसानी से साफ हो जाता है, जबकि ब्लैक वाटर (टॉयलेट फ्लश) के लिए एडवांस एसटीपी लगते हैं। जयपुर का पहला वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पौधों की सिंचाई कर रहा है, बेंगलुरु-चेन्नई खेतों में इस्तेमाल कर रहे।

उत्तर प्रदेश ने 2026 में ‘शोधित जल पुन: उपयोग नीति’ पास की, जो घरेलू-उद्योगी सीवेज को तीन चरणों में शुद्ध कर फैक्ट्रियों में कूलिंग, पार्क सिंचाई, गाड़ी धुलाई, खेतों में खाद-खिंचाई के लिए मुहैया कराएगी। AMRUT मिशन के तहत 34,467 करोड़ से 889 सीवरेज प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो करोड़ों लीटर पानी बचाएंगे। जल जीवन मिशन ने 82% ग्रामीण घरों में नल पहुंचाए, सुजलाम भारत डिजिटल मैपिंग स्रोत से नल तक जोड़ रहा।

चुनौतियां और भविष्य की राह

फिर भी चुनौतियां बरकरार हैं। नमामि गंगे जैसे कार्यक्रमों से गंगा के किनारे 100 शहरों का सीवेज रोका जा रहा, लेकिन जैव-अपशिष्ट और इंडस्ट्री वेस्ट बाधा हैं। ग्रामीण भारत शहरों का शोधित पानी पिएगा? हिमाचल में इंडस्ट्री केमिकल वाटर रीयूज हो रहा, लेकिन जागरूकता की कमी है। विशेषज्ञ कहते हैं, सामुदायिक जल समितियां, जलग्रहण संरक्षण और मृदा बचाव जरूरी। 2040 तक अगर प्रबंधन न सुधरा, तो संकट ‘डेजर्टिफिकेशन’ में बदल सकता है।

समय तेजी से निकल रहा है। 60 करोड़ प्यासे भारतीयों को बचाने के लिए वेस्ट वाटर को खजाना बनाना होगा। सरकार, उद्योग और नागरिक मिलकर 3R अपनाएं, वरना गंदा पानी ही आखिरी उम्मीद बचेगा। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें