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Indian Railways: सावधान! रात के समय ट्रेन में क्यों बंद कर दिए जाते हैं चार्जिंग पॉइंट? वजह जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

भारतीय रेलवे में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट बंद रहते हैं। कारण: रात में सोते समय डिवाइस ओवरहीटिंग से आग लगने का खतरा। 2021 देहरादून शताब्दी हादसे के बाद सख्त नियम। सुरक्षा पहले- रात पहले चार्ज पूरा करें। यह लाखों यात्रियों की जान बचाने वाला कदम है।

By Pinki Negi

why train charging points switched off at night rules

भारतीय रेलवे, जो देश की जीवनरेखा के रूप में जाना जाता है, ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। ट्रेनों में स्वच्छ वॉशरूम, मिनी फ्रीज, बायो-टॉयलेट और हर सीट पर मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाएं आम हो चुकी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये चार्जिंग पॉइंट रात के समय अचानक बंद हो जाते हैं? रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ये सुविधा पूरी तरह बंद रहती है। इस नियम के पीछे छिपा कारण इतना गंभीर है कि जानकर हर यात्री हैरान रह जाता है। आइए, इस मुद्दे पर गहन शोध के आधार पर पूरी जानकारी समझते हैं।

रेलवे के चार्जिंग पॉइंट: सुविधा या खतरा?

भारतीय रेलवे की ट्रेनों में हर कोच- चाहे एसी हो, स्लीपर हो या जनरल- में चार्जिंग सॉकेट हर बर्थ या सीट के पास उपलब्ध हैं। ये 5 एम्पियर के सिंगल पिन सॉकेट हैं, जो मोबाइल, पावर बैंक, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स को सपोर्ट करते हैं। 2010 के दशक से ये सुविधा तेजी से बढ़ी है, खासकर कोविड के बाद जब डिजिटल यात्रा बढ़ गई। लेकिन ये 24×7 उपलब्ध नहीं हैं।

रात 11:00 बजे बजे ट्रेन के गार्ड या कोच अटेंडेंट मेन स्विच ऑफ कर देते हैं, जो सुबह 5:00 बजे चालू होता है। यह नियम सभी जोनों- उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम- में एकसमान लागू है। कुछ पुरानी ट्रेनों में समय में मामूली बदलाव हो सकता है, जैसे 10:30 से 5:30, लेकिन सामान्यत: 11 से 5 बजे का फिक्स्ड है।

इस नियम का जन्म: दिल्ली-देहरादून शताब्दी कांड

यह नियम बिजली बचत या मेंटेनेंस के लिए नहीं है, बल्कि यात्रियों की जान बचाने के लिए है। 13 मार्च 2021 को दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस के एसी कोच में चार्जिंग पॉइंट से शॉर्ट सर्किट हुई आग लगी, जिसमें दो यात्री झुलस गए। जांच में पाया गया कि रात में सोते समय यात्री फोन को चार्ज पर लगाकर छोड़ देते थे। डिवाइस ओवरहीट हो गया, इंसुलेशन पिघल गया और आग फैल गई।

इसी घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने सर्कुलर जारी कर सख्ती बरतने के निर्देश दिए। इससे पहले 2014 में रेलवे की सेफ्टी कमिटी ने सिफारिश की थी, लेकिन 2021 का कांड निर्णायक साबित हुआ। तब से यह अनिवार्य हो गया। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021-25 के बीच चार्जिंग से जुड़ी 15 से ज्यादा आग की घटनाएं रुक गईं।

ओवरहीटिंग का वैज्ञानिक खतरा

स्मार्टफोन और लैपटॉप की लिथियम-आयन बैटरी रातभर चार्ज होने पर 40-50 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाती है। ट्रेन की गति से कंपन, धूल-मिट्टी और खराब वायरिंग इसे और खतरनाक बनाती है। अगर यात्री सो रहा हो, तो आग लगने पर धुआं फैलता है, जो अन्य यात्रियों के लिए घातक साबित होता है। रेलवे के सीनियर इंजीनियरों का कहना है कि रात में जागरूकता कम होती है- कोई नोटिस नहीं कर पाता। दिन में यात्री सतर्क रहते हैं, इसलिए कोई पाबंदी नहीं। इसके अलावा, ट्रेनों में 230 वोल्ट की हाई वोल्टेज लाइन चलती है, जो सिंगल ग्राउंडिंग पर निर्भर है। शॉर्ट सर्किट से पूरा कोच प्रभावित हो सकता है।

यात्रियों की शिकायतें और रेलवे का जवाब

रेडिट, फेसबुक और ट्विटर पर यात्री अक्सर शिकायत करते हैं कि रात में चार्जिंग बंद होने से असुविधा होती है। लेकिन रेलवे स्पष्ट करता है- सुरक्षा पहले। आईआरसीटीसी ऐप पर भी अलर्ट भेजा जाता है। कुछ ट्रेनों में इंडिकेशन लाइट लगी हैं, जो बंद होने पर रेड हो जाती हैं। भविष्य में वायरलेस चार्जिंग या स्मार्ट सेंसर आने की योजना है, जो ऑटोमैटिक बंद हो जाएंगे। फिलहाल, यात्री पावर बैंक का इस्तेमाल करें या रात 11 बजे पहले चार्ज पूरा कर लें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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