
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर एक नया ट्विस्ट सामने आया है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के नए नियमों की तर्ज पर अब वेतन आयोग की सुझाव जमा करने की डेडलाइन 30 अप्रैल से आगे बढ़ने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रीय परिषद (कर्मचारी पक्ष), संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) ने आयोग को पत्र लिखकर तकनीकी खराबियों का हवाला देते हुए 31 मई तक समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजरें अब आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
वेबसाइट लॉन्च और पोर्टल पर गड़बड़ियां
फरवरी 2026 में लॉन्च हुई आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सुझाव मंगवाने का काम जोर-शोर से चल रहा था। पहले 16 मार्च, फिर 31 मार्च और अब 30 अप्रैल तक की डेडलाइन पर लाखों हितधारक ज्ञापन जमा कर चुके हैं। लेकिन पोर्टल पर लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं- फाइल अपलोड न होना, 10,000 कैरेक्टर लिमिट के बावजूद रिजेक्ट होना जैसी समस्याएं।
NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 20 अप्रैल को सदस्य सचिव पंकज जैन को पत्र लिखा कि पिछले नौ दिनों से स्टाफ साइड का 9-सूत्रीय ज्ञापन अपलोड नहीं हो पा रहा। उन्होंने पोर्टल को यूजर-फ्रेंडली बनाने, SOP जारी करने और डेडलाइन 31 मई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। पेंशनर्स संगठनों ने भी शिकायत की कि बुजुर्ग सदस्यों को ऑनलाइन प्रक्रिया में दिक्कत हो रही है।
देहरादून बैठक: अगला बड़ा कदम
आयोग ने अभी 30 अप्रैल की डेडलाइन पर अडिग रहने का संकेत दिया है, लेकिन देहरादून में कल 24 अप्रैल को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। 3 नवंबर 2025 को गठित जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग की ये 6 महीने बाद पहली बड़ी बैठक होगी। यहां कर्मचारी यूनियनें, पेंशनर्स और संगठन वेतन, भत्ते, पेंशन रिविजन, फिटमेंट फैक्टर पर सुझाव देंगे। सातवें आयोग की तर्ज पर उत्तराखंड से राज्य दौरे शुरू होंगे। 10 अप्रैल तक ईमेल से मीटिंग रिक्वेस्ट मंगाई गई हैं।
NC-JCM की 49वीं बैठक और अन्य अपडेट
NC-JCM की 49वीं बैठक 11 मई 2026 को दोपहर 3 बजे होगी, जहां DA मर्जर, न्यूनतम वेतन, HRA जैसे मुद्दे उठेंगे। कर्मचारी संगठन 12 फरवरी को अंतरिम राहत की मांग कर चुके हैं। वित्त मंत्रालय राज्यसभा में अपडेट दे चुका कि रिपोर्ट 2027 तक आएगी, लेकिन 1 जनवरी 2026 से लागू होने की अटकलें हैं। फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि डेडलाइन बढ़ना आयोग को व्यापक सुझाव मिलने में मदद करेगा।
कर्मचारियों के लिए क्या मतलब?
मेरठ-दिल्ली जैसे उत्तर भारत के कर्मचारी, जो डिजिटल साक्षरता में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेताते हैं कि तकनीकी सुधार जरूरी है वरना हड़ताल की धमकी बढ़ सकती है। आयोग चेयरमैन ने कहा, “सभी हितधारकों के सुझाव हमारी प्राथमिकता हैं।” कुल मिलाकर, ये नया मोड़ केंद्रीय कर्मचारियों को सशक्त बनाएगा, जिससे वेतन संरचना में ऐतिहासिक बदलाव संभव होंगे।









