
नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश करने वाले लाखों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने 2026 में एग्जिट और विड्रॉल नियमों में क्रांतिकारी बदलाव कर दिए हैं, जिससे पैसा निकालना पहले से कहीं ज्यादा लचीला और आसान हो गया है। अब रिटायरमेंट का लंबा इंतजार किए बिना पार्शियल एग्जिट के जरिए जरूरत के समय कोष से राशि निकाली जा सकती है।
ये बदलाव सरकारी, कॉरपोरेट और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों दोनों के लिए लागू हैं, जिससे मध्यवर्गीय परिवारों को शिक्षा, विवाह, मेडिकल इमरजेंसी या घर खरीदने जैसे खर्चों के लिए वित्तीय सुरक्षा मिली है।
पीएफआरडीए के नए नियमों का प्रभाव
पीएफआरडीए के इन नए नियमों ने एनपीएस को और आकर्षक बना दिया है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो लंबे लॉक-इन पीरियड से परेशान थे। पहले एनपीएस में 5 साल का सख्त लॉक-इन था, लेकिन अब इसे घटाकर महज 3 साल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि खाता खोलने के 3 साल बाद ही सब्सक्राइबर अपने कुल योगदान का 25 प्रतिशत तक पार्शियल विड्रॉल कर सकते हैं। ये सुविधा कुल 3 बार इस्तेमाल की जा सकती है, जिसमें प्रत्येक निकासी के बीच कम से कम 5 साल का गैप रखना जरूरी है।
योग्य कारणों में बच्चों की उच्च शिक्षा, विवाह, आवासीय संपत्ति खरीदना, मेडिकल ट्रीटमेंट या नौकरी खोने जैसी आपात स्थिति शामिल हैं। प्रक्रिया भी सरल है-पॉइंट ऑफ प्रेजेंस-सर्विस प्रोवाइडर (पीओपी-एसपी) या ई-एनपीएस पोर्टल पर फॉर्म जमा करने के 7 से 15 दिनों में राशि खाते में आ जाती है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष लाभ
सरकारी कर्मचारियों को विशेष लाभ मिला है। नए नियमों के तहत उनकी निवेश की अधिकतम उम्र सीमा 75 से बढ़ाकर 85 वर्ष कर दी गई है, हालांकि वे इच्छानुसार पहले भी एग्जिट कर सकते हैं। रिटायरमेंट (60 वर्ष) पर वे अपने कुल कॉर्पस का 60 प्रतिशत कैश के रूप में निकाल सकते हैं, जबकि शेष 40 प्रतिशत से ऐन्युटी खरीदनी होगी, जो नियमित मासिक पेंशन सुनिश्चित करेगी।
प्रीमेच्योर एग्जिट (60 वर्ष से पहले बाहर निकलने) की स्थिति में 80 प्रतिशत राशि ऐन्युटी के लिए बाध्यकारी है, लेकिन अगर कॉर्पस 5 लाख रुपये तक है, तो पूरा पैसा एकमुश्त निकाला जा सकता है। ये बदलाव सरकारी योजनाओं के तहत एनपीएस में योगदान देने वालों को लंबी अवधि की वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।
कॉरपोरेट कर्मचारियों को दोहरी राहत
कॉरपोरेट और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को तो जैसे दोहरी राहत मिली है। उनके लिए वेस्टिंग पीरियड को 15 वर्ष या 60 वर्ष तक बढ़ा दिया गया है, जबकि 5 साल का लॉक-इन पूरी तरह हटा लिया गया। रिटायरमेंट पर वे अब 80 प्रतिशत तक राशि लंपसम के रूप में निकाल सकते हैं और केवल 20 प्रतिशत से ऐन्युटी लेनी होगी- पहले ये अनुपात 60:40 था। कॉर्पस के आकार के आधार पर विकल्प और स्पष्ट हैं।
अगर कुल राशि 8 लाख रुपये से कम है, तो 100 प्रतिशत एकमुश्त निकासी संभव है। 8 से 12 लाख के बीच होने पर 6 लाख तक लंपसम लिया जा सकता है, बाकी सिस्टमेटिक यूनिट रिडेम्पशन (एसयूआर) या ऐन्युटी में निवेश किया जा सकता है। 12 लाख से अधिक कॉर्पस पर 80:20 का नियम लागू होता है। प्रीमेच्योर एग्जिट में कॉरपोरेट सब्सक्राइबर्स को केवल 20 प्रतिशत कैश मिलेगा, लेकिन 5 लाख तक के छोटे कोष पर पूर्ण निकासी की छूट है।
टैक्सेशन और विशेषज्ञ सलाह
टैक्सेशन के मोर्चे पर भी सुधार हुए हैं। लंपसम निकासी (60 वर्ष के बाद) टैक्स-फ्री बनी हुई है, लेकिन ऐन्युटी आय पर सामान्य आयकर लागू होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निकासी से पहले सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (सीआरए) से परामर्श लें, क्योंकि टियर-1 और टियर-2 खातों के नियम अलग हैं। पार्शियल विड्रॉल पर कोई टैक्स नहीं लगता, जो इसे और आकर्षक बनाता है।









