
आम आदमी को लगता है कि अगर सालाना कमाई टैक्स छूट सीमा (नई व्यवस्था में 3 लाख, पुरानी में 2.5 लाख रुपये) से कम है, तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की कोई जरूरत नहीं। लेकिन यह धारणा घातक साबित हो सकती है। आयकर विभाग अब सिर्फ कमाई पर नहीं, बल्कि आपके खर्चों, लेन-देन और लाइफस्टाइल पर नजर रखता है। एआईएस (एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट) के जरिए हर उच्च मूल्य लेन-देन ट्रैक होता है।
अगर आपने कुछ खास काम किए हैं, तो टैक्स फ्री इनकम होने पर भी ITR न भरने पर धारा 142(1) या 143 के तहत नोटिस आ सकता है, साथ ही 5,000 रुपये तक पेनाल्टी। विशेषज्ञों के अनुसार, FY 2025-26 के लिए 31 जुलाई 2026 तक ITR फाइल करना जरूरी है।
भारी-भरकम बिजली बिल का खतरा
आइए विस्तार से जानें वे तीन बड़े कारण, जो टैक्स फ्री आय वालों को भी ITR की जाल में फंसा देते हैं। पहला, भारी-भरकम बिजली बिल। आजकल मेट्रो शहरों में एसी, कूलर और लग्जरी लाइफस्टाइल के कारण बिजली बिल आसानी से 1 लाख रुपये पार कर जाता है। आयकर नियमों के तहत, अगर एक वित्त वर्ष में कुल 1 लाख या अधिक का बिजली बिल चुकाया, तो विभाग इसे ‘असंगत खर्च’ मानता है।
मान लीजिए, आपकी आय 2 लाख रुपये है, जो टैक्स फ्री है, लेकिन बिजली बिल 1.2 लाख का आ गया। विभाग सोचेगा कि इतना खर्च कैसे? ITR न भरने पर नोटिस आते ही आपको खर्च के स्रोत (जैसे परिवारिक मदद या पुरानी बचत) साबित करने पड़ेंगे। यह नियम उच्च मध्यम वर्ग को निशाना बनाता है, जहां बिल जमा करने वाली कंपनियां डेटा शेयर करती हैं।
विदेश यात्रा के बड़े खर्च से परेशानी
दूसरा प्रमुख कारण है विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च। अगर आपने खुद या परिवार के किसी सदस्य की विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये या अधिक खर्च किए, तो ITR भरना लाजमी हो जाता है। क्रेडिट कार्ड, फ्लाइट बुकिंग या फॉरेन एक्सचेंज के जरिए यह ट्रैक होता है। उदाहरणस्वरूप, दुबई या थाईलैंड की ट्रिप पर 2.5 लाख खर्च कर आए, लेकिन आय सिर्फ 2.8 लाख है। विभाग पूछेगा- पैसा कहां से? बहुत से युवा बचत या गिफ्ट बताते हैं, लेकिन बिना ITR के साबित करना मुश्किल। RBI और बैंकों से डेटा मिलने पर नोटिस 15-30 दिनों में आ जाता है। पिछले साल हजारों को ऐसे नोटिस मिले, जिनमें वीजा रद्द होने जैसी परेशानियां हुईं।
बैंक खातों में नकद जमा की सजा
तीसरा, बैंक खातों में नकद जमा। अगर करेंट अकाउंट में 1 करोड़ या अधिक नकद जमा किया, या सेविंग्स अकाउंट में 50 लाख से ज्यादा, तो बच नहीं सकते। यह काले धन पर अंकुश लगाने के लिए है। छोटे व्यापारी या फ्रीलांसर अक्सर अनजाने में फंसते हैं। मान लीजिए, व्यापार से नकद आया और जमा कर दिया, लेकिन ITR न भरा। विभाग इसे बेनामी आय मान सकता है। बैंकों को PAN से लिंक रिपोर्टिंग अनिवार्य है।
अन्य स्थितियां और बचाव के उपाय
इनके अलावा TDS 25,000 रुपये (सीनियर के लिए 50,000) से अधिक कटने पर, व्यावसायिक बिक्री 60 लाख या प्रोफेशनल आय 10 लाख से ज्यादा होने पर भी ITR जरूरी। नोटिस से बचने के लिए e-filing पोर्टल पर AIS चेक करें, Nil ITR फाइल करें। फायदे? लोन, वीजा, रिफंड आसान। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- समय पर फाइल करें, वरना कानूनी पचड़ा। FY 2025-26 में डिजिटल सर्विलांस बढ़ा है, सतर्क रहें।









