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Cement Price Hike: घर बनाना हुआ और भी महंगा! सीमेंट के दामों में अचानक आई भारी तेजी, जानें आज आपके शहर में क्या है प्रति बैग रेट

ईरान युद्ध के कारण सीमेंट की कीमतें प्रति 50 किलो बैग 15-20 रुपये बढ़ीं, अप्रैल 2026 में 5% उछाल के साथ एक साल के उच्चतम स्तर पर। पेटकोक-कोयला महंगे होने से उत्पादन लागत चढ़ी, दक्षिण-पूर्व में 6-7% ज्यादा वृद्धि। मेरठ जैसे शहरों में ब्रांडेड बैग 380-450 रुपये, 1000 sq ft घर पर 4500-8000 रुपये अतिरिक्त बोझ। राहत दूर, सरकार हस्तक्षेप की मांग।

By Pinki Negi

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घर का निर्माण कराने या करवाने की सोच रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण सीमेंट की कीमतों में प्रति 50 किलोग्राम बैग पर 15-20 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी हो गई है। मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अखिल भारतीय औसत कीमतें मार्च की तुलना में करीब 5 प्रतिशत ऊपर पहुंच गई हैं, जो एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। ईंधन, पैकेजिंग बैग और अन्य इनपुट कॉस्ट में उछाल के चलते निर्माता कंपनियां बार-बार दाम बढ़ाने को मजबूर हैं, और शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह सिलसिला अभी थमने वाला नहीं।

ईरान युद्ध: कीमतों पर वैश्विक दबाव की जड़

इस बढ़ोतरी की जड़ पश्चिम एशिया का उग्र संघर्ष है, जहां ईरान और उसके विरोधियों के बीच तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से पेटकोक (पेट्रोलियम कोक) और कोयले जैसे ईंधन महंगे हो गए, जो सीमेंट उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत खर्च बनाते हैं। ईरान युद्ध ने समुद्री व्यापार मार्ग बाधित कर दिए, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में माल ढुलाई लागत आसमान छूने लगी।

विश्लेषकों का कहना है कि बड़े उत्पादक अपनी जरूरत का 50-60 प्रतिशत पेटकोक आयात करते हैं, और प्रति टन ईबीटीडा पर 150-200 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। नतीजतन, कंपनियों को मार्जिन बचाने के लिए 4-5 प्रतिशत कीमत वृद्धि करनी पड़ रही है, जो चार साल के उच्चतम स्तर की ओर इशारा कर रही है।

क्षेत्रवार मांग में उतार-चढ़ाव

मांग के रुझान भी एकसमान नहीं हैं, जो स्थिति को और जटिल बनाते हैं। मोतीलाल ओसवाल रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी और पूर्वी बाजारों में 6-7 प्रतिशत की ज्यादा बढ़ोतरी हुई, जबकि पश्चिमी, उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में यह 4 प्रतिशत तक सीमित रही। मुंबई-पुणे जैसे महानगरों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से मांग तेज रही, लेकिन गुजरात, दक्षिणी राज्यों और ग्रामीण इलाकों में चुनावी सरगर्मी या कम कामकाज से धीमापन आया।

उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी मिश्रित संकेत हैं- शहरीकरण बढ़ने से मांग बनी हुई है, मगर ग्रामीण मेरठ-मुजफ्फरनगर बेल्ट में किसानों की आय प्रभावित होने से निर्माण रुका हुआ है। डीलरों को भरोसा है कि लगातार लागत दबाव और सप्लाई अनुशासन से कीमतें और चढ़ेंगी।

ईंधन लागत का सीधा असर और लोकल रेट्स

ईंधन लागत पर गौर करें तो पेटकोक में भारी तेजी आई, जबकि कोयले में हल्की गिरावट दर्ज हुई। ब्रोकरेज रिपोर्ट अनुमान लगाती है कि अखिल भारतीय औसत सीमेंट स्प्रेड (जीएसटी और वेरिएबल कॉस्ट घटाकर) 272 रुपये प्रति टन रह सकता है, जो मार्जिन में कमी दर्शाता है। मेरठ जैसे शहरों में लोकल डीलर बताते हैं कि अल्ट्राटेक, एसीसी या अंबुजा जैसे ब्रांडेड बैग अब 380-450 रुपये तक पहुंच गए हैं, जबकि नॉर्मल वैरायटी 350-420 रुपये पर बिक रही है।

इससे 1000 वर्गफुट के सामान्य घर पर 300-400 बैग लगने पर 4500-8000 रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहा है, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ा झटका है।

आगे की राहत कब? विशेषज्ञों की चेतावनी

सरकार ने जीएसटी में पहले राहत दी थी, मगर अब इनपुट कॉस्ट बढ़ोतरी उसे चुनौती दे रही है। ईरान संकट ने न सिर्फ सीमेंट, बल्कि सरिया, पेंट और पाइप जैसे अन्य निर्माण सामग्री को भी महंगा कर दिया। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निर्माण की योजना बनाने वाले अभी थोड़ा इंतजार करें या थोक खरीद पर जोर दें। मगर पीक कंस्ट्रक्शन सीजन में मांग बढ़ने से राहत की उम्मीद कम है। कुल मिलाकर, यह महंगाई की आग घर बनाम सपनों को भस्म कर रही है- क्या सरकार अब हस्तक्षेप करेगी?

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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