
केंद्र सरकार ने अपने करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के इस दौर में बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में महंगाई भत्ता (डीए) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी मिल गई। इससे केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। इस फैसले का सीधा लाभ देशभर के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा, जहां पेंशनर्स के लिए इसे महंगाई राहत (DR) कहा जाता है।
ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के पिछले 12 महीनों के औसत आंकड़ों के आधार पर लिया गया यह निर्णय 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा, जिससे कर्मचारियों की जेब में हर महीने अतिरिक्त पैसे जुड़ेंगे।
घोषणा में देरी के कारण
आमतौर पर सरकार होली के आसपास डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर देती है, लेकिन इस बार घोषणा में देरी ने कर्मचारी संगठनों में खासी बेचैनी पैदा कर दी थी। 2016 में सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद यह पहला मौका है जब इतनी देरी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी दो मुख्य वजहें रहीं। पहली, आठवें वेतन आयोग के गठन की तैयारियां और ट्रांजिशन प्रक्रिया, जो कर्मचारी वर्ग के लिए लंबे समय से मांग में शुमार है।
दूसरी, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्धग्रस्त हालातों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा वित्तीय दबाव, जिसने सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला। फिर भी, कैबिनेट के इस त्वरित फैसले ने सभी आशंकाओं का अंत कर दिया है। अनुमान है कि इससे सरकार पर सालाना करीब 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा, लेकिन महंगाई से जूझते तबके को यह राहत बेहद जरूरी थी।
सैलरी पर सीधा प्रभाव
सैलरी पर इस बढ़ोतरी का असर सीधा और महत्वपूर्ण है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 36,500 रुपये है, तो पहले 58 प्रतिशत डीए के हिसाब से उसे 21,170 रुपये मिलते थे। अब 60 प्रतिशत पर यह राशि 21,900 रुपये हो जाएगी, यानी प्रति माह 730 रुपये की साफ बढ़ोतरी। इसी तरह, अगर बेसिक पेंशन 9,000 रुपये है, तो पूर्व में 5,220 रुपये DR मिलता था, जो अब 5,400 रुपये पहुंचेगा- मासिक 180 रुपये का फायदा।
उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए यह इजाफा और भी ज्यादा होगा। मान लीजिए बेसिक 50,000 रुपये है, तो डीए में 1,000 रुपये मासिक अतिरिक्त जुड़ेंगे। जनवरी 2026 से अब तक का एरियर (बकाया) भुगतान भी अगले वेतन के साथ जुड़ेगा, जिससे कई कर्मचारियों को एकमुश्त हजारों रुपये मिल सकते हैं। निचले स्तर के कर्मचारियों, जैसे चपरासी या क्लर्क, जिनकी बेसिक 20,000-30,000 रुपये है, को 400-600 रुपये मासिक लाभ होगा, जो उनके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
समुद्री क्षेत्र को दोहरी सौगात
कैबिनेट की इस बैठक में केवल डीए ही नहीं, बल्कि समुद्री क्षेत्र को दोहरी सौगात मिली। सरकार ने 13,000 करोड़ रुपये के ‘सॉवरेन मैरिटाइम फंड’ को हरी झंडी दी, जिसका मकसद भारतीय जहाजों को सस्ता और विश्वसनीय इंश्योरेंस कवर मुहैया कराना है। इसके साथ ही ‘भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल’ (BMI Pool) के गठन को मंजूरी मिली, जिसमें 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी होगी। यह पूल जहाजों के ढांचे, माल ढुलाई, P&I क्लब और युद्ध जोखिमों जैसे सभी समुद्री खतरों को कवर करेगा।
कुल अंडरराइटिंग क्षमता 950 करोड़ रुपये रखी गई है। वैश्विक तनाव के दौर में अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां दरें चढ़ा देती हैं या कवर रोक देती हैं, लेकिन यह पूल भारतीय व्यापारियों को किफायती विकल्प देगा, विदेशी निर्भरता घटाएगा और निर्यात-आयात को बूस्ट करेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद इसकी जानकारी साझा की।
ग्रामीण विकास को नई गति
ग्रामीण विकास को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ाया गया। इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित किए गए हैं, जिससे दूरस्थ गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का कार्य तेज होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी, रोजगार बढ़ेगा और किसानों को बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।
संतुलित नीतिगत पैकेज
कुल मिलाकर, ये फैसले सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। महंगाई, वैश्विक संकट और विकास की चुनौतियों के बीच कर्मचारियों को राहत, व्यापार को सुरक्षा और ग्रामीणों को कनेक्टिविटी- यह संतुलित पैकेज है। कर्मचारी यूनियनें इसे स्वागतयोग्य बता रही हैं, लेकिन आठवें वेतन आयोग पर जल्द अपडेट की मांग भी कर रही हैं।









