
अगर आप जमीन या मकान खरीदने-बेचने की सोच रहे हैं, तो जेब तैयार रखिए। 1 अप्रैल 2026 से लागू हुए इनकम टैक्स रूल्स 2026 और बजट 2026 के प्रावधानों ने प्रॉपर्टी डीलिंग के गणित को पूरी तरह बदल दिया है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने, PAN की सख्ती, SFT रिपोर्टिंग और राज्यवार सर्किल रेट बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त 7-10 फीसदी का बोझ पड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव पारदर्शिता लाने के नाम पर रियल एस्टेट बाजार को ठंडा करने का काम कर रहे हैं, जिससे मध्यम वर्ग के सपनों पर असर पड़ रहा है।
नए LTCG नियमों का झटका
नए LTCG नियम सबसे बड़ा झटका साबित हो रहे हैं। 23 जुलाई 2024 के बाद खरीदी गई किसी भी प्रॉपर्टी पर बेचते समय सीधे 12.5 फीसदी फ्लैट टैक्स लगेगा, बिना महंगाई के इंडेक्सेशन लाभ के। इसका मतलब, अगर आपने 2025 में 50 लाख में फ्लैट लिया और 2026 में 80 लाख में बेचा, तो 30 लाख के गेन पर करीब 3.75 लाख टैक्स कटेगा। पुरानी प्रॉपर्टी (2024 से पहले खरीदी) के मालिकों को थोड़ी राहत है- वह 12.5 फीसदी बिना इंडेक्सेशन या 20 फीसदी इंडेक्सेशन के साथ जो भी कम हो, चुन सकते हैं।
उदाहरणस्वरूप, 2010 में 20 लाख की जमीन 2026 में 1.5 करोड़ पर बिकी तो इंडेक्सेशन से एडजस्टेड कॉस्ट 60 लाख हो सकती है, जिससे टैक्स 20 फीसदी पर कम आएगा। लेकिन नए डीलर्स के लिए ये विकल्प नहीं- सीधा नुकसान। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ड्राफ्ट नियमों से साफ है कि ये बदलाव काले धन पर अंकुश लगाने के लिए हैं।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में जटिलता
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया भी अब और जटिल हो गई। PAN अब 20 लाख से अधिक के हर सौदे- चाहे खरीद, बिक्री या गिफ्ट- में अनिवार्य है, पहले ये सीमा 10 लाख थी। 45 लाख से ऊपर के ट्रांजेक्शन की डिटेल रजिस्ट्रार सीधे इनकम टैक्स को SFT के जरिए भेजेगा, जिससे नोटिस का खतरा बढ़ गया। 50 लाख से ज्यादा की खरीद पर खरीदार को 1 फीसदी TDS काटना पड़ता है, जो वेबसाइट पर जमा करना जरूरी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ये नियम सख्ती से लागू हो रहे हैं, जहां मेरठ-गाजियाबाद बेल्ट में डीलिंग पहले से ही महंगी है।
सर्किल रेट और अन्य खर्चों में वृद्धि
सर्किल रेट में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी ने स्टांप ड्यूटी को औसत 6-8 फीसदी तक पहुंचा दिया। उत्तर प्रदेश में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सर्किल रेट 15 फीसदी चढ़ा, दिल्ली में 12 फीसदी और मुंबई महानगर में 20 फीसदी तक। जीएसटी भी कमर तोड़ रहा- अफोर्डेबल हाउसिंग (45 लाख तक) पर 1 फीसदी, बाकी पर 5 फीसदी बिना इनपुट क्रेडिट। कुल मिलाकर, 1 करोड़ की प्रॉपर्टी पर रजिस्ट्री के नामे सिर्फ 8-10 लाख अतिरिक्त खर्च। विशेषज्ञ कहते हैं, ये बढ़ोतरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और शहरीकरण से प्रेरित है, लेकिन टैक्सपेयर पर असर भारी।
टैक्स बचाने के सीमित तरीके
टैक्स बचाने के तरीके सीमित हैं। सेक्शन 54 के तहत प्रॉपर्टी बेचने के गेन को नई रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश कर छूट लें। 80C के तहत PPF, ELSS या होम लोन प्रिंसिपल पर लाभ। लेकिन नए नियमों में सख्ती से फर्जी क्लेम मुश्किल। अगर यूपी में हैं तो लोकल सब-रजिस्ट्रार से सर्किल रेट चेक करें, मुंबई में BMC पोर्टल। सलाहकारों का कहना है, 2026 में खरीदari से पहले 10 फीसदी एक्स्ट्रा बजट रखें और टैक्स कैलकुलेटर यूज करें। सरकार का दावा है कि ये नियम सिस्टम को आसान बनाएंगे, लेकिन बाजार में सौदे 20 फीसदी कम हो चुके हैं। क्या ये पारदर्शिता है या बोझ? समय बताएगा।









