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किराए पर रहने वालों की चांदी! हर महीने बैंक खाते में आएंगे पैसे; जानें सरकार की इस नई ‘रेंटल सब्सिडी’ स्कीम का सच

अंबेडकर DBT वाउचर योजना के तहत जिला मुख्यालय पर किराए के मकान में रहकर पढ़ाई करने वाले गरीब छात्रों को हर महीने 2,000 रुपए की सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। यह राशि 10 महीने तक चलती है और आवास, भोजन, बिजली व पानी बिल जैसे खर्चों में मदद करती है।

By Pinki Negi

किराए पर रहने वालों की चांदी! हर महीने बैंक खाते में आएंगे पैसे; जानें सरकार की इस नई 'रेंटल सब्सिडी' स्कीम का सच

अगर आप या आपके परिवार के किसी सदस्य की बात करें, जो अपने घर से दूर जिला मुख्यालय पर किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो सरकार की अंबेडकर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) वाउचर‑स्टाइल योजना आपके लिए राहत‑भरा फॉर्मेट बन सकती है। शैक्षणिक सत्र 2024–25 के लिए इस योजना के ऑनलाइन आवेदन शुरू हो चुके हैं, और जिन छात्रों की पात्रता पूरी होती है, उन्हें हर महीने 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है।

यह योजना मुख्य रूप से उन विद्यार्थियों को टारगेट करती है, जो अपने घर से दूर जिला मुख्यालय पर स्थित सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई कर रहे हैं और किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य

अंबेडकर DBT वाउचर योजना का बुनियादी उद्देश्य यह है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र अपने घर से दूर जिला मुख्यालय पर रहकर पढ़ाई न करें, तो उनकी आवास, भोजन, बिजली और पानी के बिल जैसे खर्चों का बोझ थोड़ा कम किया जा सके। इस योजना के तहत छात्रों को न केवल किराए की सहायता मिलती है, बल्कि उनके दैनिक खर्च को मैनेज करने में भी मदद मिलती है। विशेष रूप से वह स्टूडेंट्स, जो कला, विज्ञान या वाणिज्य वर्ग में अध्ययनरत हैं और अपने जिला मुख्यालय पर स्थित सरकारी स्कूलों में दाखिला लेकर पढ़ाई कर रहे हैं, वे इस योजना के लिए पात्र माने जाते हैं।

हर महीने 2,000 रुपए, 10 महीने तक

योजना के तहत प्रत्येक पात्र छात्र को प्रति माह 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि स्कूल में प्रवेश लेने के बाद से लेकर मार्च महीने तक, यानी लगभग 10 महीने की अवधि के दौरान दी जाती है। इस तरह प्रत्येक वर्ष अधिकतम 20,000 रुपए तक की सहायता एक छात्र को मिल सकती है। यह राशि छात्र के आधार‑लिंक्ड बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के रूप में भेजी जाती है, जिससे किराए के भुगतान, बिजली‑पानी बिल और दैनिक खर्च आसानी से मैनेज करने में मदद मिलती है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया कैसे है?

अंबेडकर DBT वाउचर योजना के लिए अब आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में हो रहा है। छात्र को सबसे पहले अपने जिले के शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या राज्य सरकार की ग्रामीण/शहरी फैसिलिटी पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होता है। इसके बाद उन्हें अपने जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, आय‑प्रमाण पत्र, स्कूल में दाखिले का प्रमाण, बैंक खाता विवरण और किराए के मकान का रेंट‑अग्रीमेंट आदि डॉक्यूमेंट्स ऑनलाइन अपलोड करने होते हैं।

फॉर्म सबमिट करने के बाद संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी या नियुक्त कमेटी द्वारा आवेदन की जांच की जाती है। एक बार आवेदन मंजूर होने के बाद छात्र को लाभार्थी के रूप में चिह्नित किया जाता है और उसके बाद निर्धारित शेड्यूल के अनुसार हर महीने 2,000 रुपए सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं।

किन छात्रों को मिलता है लाभ?

यह योजना विशेष रूप से उन छात्रों के लिए है, जो अपने मूल गांव या शहर से दूर जिला मुख्यालय पर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं और उन्हें शहर में किराए के मकान में रहना पड़ता है। इसमें उन विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके परिवार की वार्षिक आय सरकार द्वारा तय की गई सीमा से कम होती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले छात्र, जिन्हें आर्थिक रूप से कमजोर या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति श्रेणी में रखा गया है, उन्हें भी इस योजना की प्राथमिकता में रखा जाता है।

लाभार्थी बनने के लिए क्या‑क्या जरूरी है?

अंबेडकर DBT वाउचर योजना के लाभार्थी बनने के लिए छात्रों पर कुछ शर्तें लागू होती हैं। सबसे पहले उनका दाखिला किसी सरकारी स्कूल में कक्षा 9 से 12 के बीच होना जरूरी है। दूसरा, उन्हें घर से दूर जिला मुख्यालय पर किराए के मकान में रहना होगा और रेंट‑अग्रीमेंट या लैंडलॉर्ड का घोषणा‑पत्र जमा कराना होगा। तीसरा, उनके परिवार की आर्थिक स्थिति श्रेणी‑विशेष के अंदर आनी चाहिए, जो आमतौर पर वार्षिक आय सीमा, जाति‑प्रमाण पत्र और आय‑प्रमाण पत्र से साबित किया जाता है। चौथा, उनका आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक होना अनिवार्य है, ताकि राशि सुचारू रूप से ट्रांसफर हो सके।

स्क्रीनशॉट, फेक खबरों और ओवर‑हाइप से बचने की सलाह

अभी इस योजना के नाम पर कुछ वीडियो और वेब आर्टिकल भी चल रहे हैं, जो “राष्ट्रीय किराया सहायता योजना” या “हर महीने 3,500 रुपए” जैसे दावे करते हैं। इनमें ज्यादातर जानकारी अंबेडकर DBT वाउचर योजना को मिक्स करके दिखाई जा रही है। इसलिए छात्रों और उनके अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ऑफिस या राज्य शिक्षा विभाग की वेबसाइट से ही जानकारी लें।

ऑनलाइन आवेदन करते समय किसी भी तीसरे पक्ष व्यक्ति या ब्रोकर के जरिए फीस न दें और सभी डॉक्यूमेंट्स अपने हाथों से ही अपलोड करें। इस तरह अंबेडकर DBT वाउचर योजना सच में उन किरायेदार छात्रों के लिए वह “हर महीने बैंक खाते में पैसे” वाली राहत बन सकती है, जो घर से दूर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करने की कोशिश में हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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