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Home Loan Alert: होम लोन चुकाने में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी चूक? एक छोटी सी गलती और हो जाएगा लाखों का नुकसान

50 लाख के 20 साल के लोन पर 7.5% फ्लोटिंग रेट से EMI 40,300 रुपये, कुल ब्याज 46.7 लाख। 10% फिक्स्ड पर EMI 48,200, ब्याज 65 लाख। सिर्फ 2.5% अंतर से लाखों का फासला! फ्लोटिंग सस्ता लेकिन जोखिम भरा, फिक्स्ड स्थिर लेकिन महंगा पड़ सकता है। गलत चुनाव से बचें, अभी चेक करें अपना लोन।

By Pinki Negi

Home Loan Alert: होम लोन चुकाने में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये बड़ी चूक? एक छोटी सी गलती और हो जाएगा लाखों का नुकसान

होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग EMI कितनी बनेगी, बैंक कितना लोन दे रहा है और कागजी शर्तें क्या हैं, इन्हीं पर फोकस करते हैं। लेकिन असली खेल अक्सर वहीं से शुरू होता है, जहां लोग कम ध्यान देते हैं – आपने फिक्स्ड रेट चुना या फ्लोटिंग रेट। यही एक फैसला तय कर देता है कि अगले 20 साल में आप बैंक को लाखों रुपये ज्यादा देंगे या लाखों बचा लेंगे। भारत में फिलहाल फ्लोटिंग होम लोन की दरें करीब 7.1% से 8.5% के बीच चल रही हैं, जबकि फिक्स्ड रेट 9.5% से 11% तक पहुंच चुके हैं, और यही फासला पूरी लोन कॉस्ट का चेहरा बदल देता है।

ब्याज दर का छोटा फर्क, लंबे समय में भारी नुकसान

इसे समझने के लिए 50 लाख रुपये के एक औसत होम लोन का उदाहरण काफी है। मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 7.5% फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया। ऐसे में EMI लगभग 40,300 रुपये के आसपास बैठेगी और पूरे 20 साल में आपका कुल पेमेंट करीब 96.7 लाख रुपये तक पहुंचेगा। यानी मूलधन 50 लाख के ऊपर लगभग 46.7 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में निकल जाएंगे। अब यही लोन यदि 10% फिक्स्ड रेट पर लिया जाए, तो EMI करीब 48,200 रुपये के स्तर पर पहुंच जाती है।

20 साल में इस लोन पर कुल भुगतान लगभग 1.15 करोड़ रुपये के आस-पास हो सकता है, जिसमें करीब 65 लाख रुपये ब्याज के रूप में चुकाने पड़ते हैं। यानी सिर्फ ब्याज की नजर से देखें तो दोनों विकल्पों के बीच 18-19 लाख रुपये तक का फासला बन जाता है, और यह सब सिर्फ 2.5 प्रतिशत अंक के आसपास की ब्याज दर के अंतर की वजह से।

फ्लोटिंग रेट: सस्ता लेकिन जोखिम भरा

यही वजह है कि ब्याज दर में छोटा सा फर्क भी लंबे टेन्योर वाले होम लोन को “सस्ता EMI वाला ऑफर” से “महंगा सौदा” बना सकता है। अभी कई बैंक फ्लोटिंग रेट पर ग्राहकों को आकर्षक ऑफर दे रहे हैं, जहां शुरुआत में EMI तुलनात्मक रूप से कम दिखती है और टोटल इंट्रेस्ट भी फिक्स्ड के मुकाबले काफी कम बैठता है। लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू जोखिम है। फ्लोटिंग रेट सीधे तौर पर RBI की पॉलिसी रेट और बाजार की स्थितियों से जुड़ा होता है, यानी दरें ऊपर भी जा सकती हैं और नीचे भी। ब्याज दर चक्र अगर ऊपर की ओर मुड़ जाए, तो या तो आपकी EMI बढ़ेगी या फिर बैंक टेन्योर बढ़ाकर कुल ब्याज वसूली बढ़ा देगा।

फिक्स्ड रेट: स्थिरता की गारंटी लेकिन अवसर की हानि

फिक्स्ड रेट की कहानी उलटी है। यहां EMI और ब्याज दर शुरू में ही तय हो जाती है, इसलिए अनिश्चितता कम होती है और बजट प्लानिंग आसान हो जाती है। जिन लोगों की इनकम बहुत स्थिर है, या जिन्हें लगता है कि आगे चलकर ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, उनके लिए फिक्स्ड रेट मन की शांति देता है। लेकिन अगर बाजार में दरें नीचे आने लगें, तो फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों की EMI धीरे‑धीरे कम होने लगती है, जबकि फिक्स्ड रेट वाले वही ऊंची दर चुकाते रहते हैं।

हाल के समय में रेपो रेट में कई चरणों की कटौती के बाद कई फ्लोटिंग लोन पर ब्याज भार कम हुआ, पर फिक्स्ड रेट पर अटके हुए कर्जदार इस राहत का पूरा फायदा नहीं उठा पाए और सालों में लाखों रुपये अतिरिक्त दे बैठे।

लोन लेने के बाद भी न सो जाएं कर्जदार

असली गलती यहीं होती है – लोग ब्याज दर का चुनाव “आज” की EMI देखकर करते हैं, “कुल” लागत और “भविष्य” के ब्याज चक्र को नजरअंदाज कर देते हैं। एक और चूक यह है कि लोन लेने के बाद भी लोग सो जाते हैं। कई कर्जदार पुराने MCLR या बेस रेट वाले सिस्टम में फंसे हैं, जहां रेट कटौती का फायदा देर से या अधूरा मिलता है। दूसरी तरफ रेपो रेट से लिंक्ड नए होम लोन में ब्याज में बदलाव तेजी से पास‑थ्रू होता है। जो लोग समय पर पुराने सिस्टम से नए लिंक्ड रेट में शिफ्ट नहीं होते, वे सालों तक अधिक ब्याज भरते रहते हैं, जबकि थोड़े से प्रोसेसिंग चार्ज देकर वे अपने कुल ब्याज बोझ को लाखों तक घटा सकते थे।

फ्लोटिंग रेट वालों के लिए बचाव के उपाय

फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों के लिए भी “सस्ता लोन” लेकर निश्चिंत बैठ जाना सुरक्षित नहीं है। अगर आपका बजट टाइट है, तो जैसे ही आपको लगे कि दरें ऊपर की दिशा में जा सकती हैं, दो काम तुरंत करने चाहिए – पहला, एक मजबूत इमरजेंसी फंड बनाना, ताकि यदि भविष्य में EMI बढ़ भी जाए तो घर का बजट न बिगड़े; दूसरा, थोड़ा‑थोड़ा प्री‑पेमेंट शुरू करना, जिससे लोन के टेन्योर और कुल ब्याज दोनों पर नियंत्रण बनाया जा सके। भारत में फ्लोटिंग होम लोन पर आम तौर पर प्री‑पेमेंट पेनल्टी नहीं लगती, इसलिए एक्स्ट्रा पेमेंट करके सीधे टेन्योर घटवाना अधिकांश मामलों में लंबी अवधि का अच्छा सौदा साबित होता है।

फिक्स्ड vs फ्लोटिंग: आपके लिए कौन सही?

सवाल यह भी है कि फिक्स्ड और फ्लोटिंग में “बेहतर” कौन है? इसका सरल जवाब नहीं है, क्योंकि यह आपके रिस्क लेने की क्षमता, आय की स्थिरता और फाइनेंशियल बफर पर निर्भर करता है। अगर आप EMI में उतार‑चढ़ाव बर्दाश्त नहीं कर सकते, आपकी इनकम लिमिटेड है या आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो फिक्स्ड रेट की स्थिरता आपके लिए ज्यादा मायने रखती है। वहीं, युवा कमाई करने वाले, जिनकी आय समय के साथ बढ़ने की संभावना है और जिनके पास इमरजेंसी फंड व इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा जाल मौजूद है, वे फ्लोटिंग रेट के उतार‑चढ़ाव को झेलकर भी लंबे समय में कम ब्याज का फायदा उठाने की पोजीशन में होते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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