
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना’ (नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम – NFBS) ऐसी ही एक वरदान साबित हो रही है, जो बेसहारा परिवारों को उनके कमाऊ सदस्य की अचानक मौत पर ₹30,000 की तत्काल आर्थिक सहायता देती है।
अगर परिवार का इकलौता कमाने वाला चला जाता है, तो यह राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे परिवार की तत्काल जरूरतें पूरी हो सकें। यह योजना खासतौर पर ग्रामीण और शहरी गरीब तबकों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है।
योजना का इतिहास और उद्देश्य
योजना की शुरुआत 2006 में हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे मजबूती से लागू किया गया। पहले ₹20,000 की सहायता थी, जो बाद में बढ़ाकर ₹30,000 कर दी गई। इसका मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जी रहे परिवारों को आर्थिक संकट से उबारना है। अगर परिवार का मुखिया या मुख्य कमाने वाला व्यक्ति 18 से 60 साल की उम्र में किसी भी कारण से – चाहे प्राकृतिक मौत हो, दुर्घटना हो या अन्य – चल बसा, तो उसके परिवार को यह एकमुश्त मदद मिलती है।
उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासियों के लिए यह योजना सीमित है, लेकिन लाखों परिवार इसके पात्र हैं। मेरठ जैसे जिलों में हाल ही में कई लाभार्थियों ने इसकी तारीफ की है, जहां BPL सूचियों में नाम आने पर प्रक्रिया तेज हो गई है।
पात्रता मानदंड: सख्त शर्तें
पात्रता के मानदंड सख्त हैं, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचे। परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों में ₹46,080 से कम और शहरी इलाकों में ₹56,450 से अधिक नहीं होनी चाहिए। मृतक व्यक्ति सरकारी नौकरी या पेंशन पर नहीं होना चाहिए। BPL राशन कार्ड होना अनिवार्य है। अगर ये शर्तें पूरी होती हैं, तो परिवार तुरंत आवेदन कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड जैसी महामारी के बाद इस योजना के आवेदन दोगुने हो गए हैं, क्योंकि कई परिवारों ने अपनों को खोया। उत्तर प्रदेश सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ाई है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश न के बराबर रह गई।
आवेदन प्रक्रिया: सरल और ऑनलाइन
आवेदन प्रक्रिया बेहद सरल है। आधिकारिक वेबसाइट nfbs.upsdc.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होता है। यहां जनपद चुनें, बैंक डिटेल्स, व्यक्तिगत जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। दस्तावेजों में मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र, BPL कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं।
फॉर्म सबमिट करने के बाद स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत या नगर निकाय से सत्यापन होता है। जांच पूरी होने पर 30-60 दिनों में राशि खाते में आ जाती है। ऑफलाइन आवेदन का विकल्प नहीं है, लेकिन हेल्पलाइन नंबरों पर सहायता उपलब्ध है।
लाभार्थियों की कहानी और चुनौतियां
मेरठ के रहने वाले रामेश्वर यादव ने बताया, “पिता की मौत के बाद परिवार टूटने की कगार पर था। NFBS से मिले ₹30,000 ने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाया।” हालांकि, कुछ लाभार्थी सत्यापन में देरी की शिकायत करते हैं। जिला प्रशासन ने अब आधार से लिंकिंग तेज की है। यह योजना न सिर्फ आर्थिक मदद देती है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनने का मौका भी। अगर आपका परिवार पात्र है, तो देर न करें – आज ही आवेदन करें और सरकार की इस नेमत का लाभ उठाएं। अधिक जानकारी के लिए nfbs.upsdc.gov.in या स्थानीय तहसील कार्यालय से संपर्क करें।









