
भारत के श्रम क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन की लहर तेज हो गई है। 21 नवंबर 2025 को लागू हुए चार नए लेबर कोड्स- वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता- अब कंपनियों के पेरोल सिस्टम को पूरी तरह बदल चुके हैं।
दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट नियमों के बाद 1 अप्रैल 2026 से ये पूर्ण रूप से प्रभावी हो गए, जिसका असर 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों की जेब पर साफ दिख रहा है। कंपनियां सैलरी स्ट्रक्चर को रिवैंप कर रही हैं, जहां टेक-होम सैलरी घटने की आशंका है, लेकिन रिटायरमेंट बेनिफिट्स मजबूत हो रहे हैं।
नई वेतन परिभाषा का प्रभाव
नई वेतन परिभाषा ने पुराने 29 कानूनों को नेस्तनाबूद कर एकसमान ढांचा तैयार किया है। इसमें बेसिक पे, डियरनेस अलाउंस (DA) और रिटेनिंग अलाउंस जैसे कंपोनेंट्स को ‘वेज’ में शामिल किया गया, जबकि HRA, मेडिकल और ट्रैवल भत्तों को सीमित छूट मिली। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर विजय भरेच के मुताबिक, यह बदलाव 21 नवंबर 2025 के बाद नौकरी छोड़ने वाले हर कर्मचारी पर लागू होगा।
फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयी को भी अब सिर्फ एक साल की सर्विस पर ग्रेच्युटी मिलेगी, पहले यह पांच साल थी। ग्रेच्युटी की गणना अब बड़े बेसिक पर होगी, जिससे भुगतान राशि 30-50% तक बढ़ सकती है।
50% वेज रूल का धमाका
सबसे बड़ा धमाका ‘50% वेज रूल’ का है। कुल CTC का कम से कम आधा हिस्सा बेसिक पे + DA के रूप में होना अनिवार्य है। पहले कंपनियां बेसिक को 20-30% रखकर भत्तों को फुला देती थीं, जिससे PF कटौती कम रहती। अब उदाहरण लीजिए- 50 हजार CTC पर पुराना बेसिक 15 हजार था, PF कटौती करीब 1800 रुपये। नया बेसिक 25 हजार हो जाएगा, PF 3000 रुपये तक पहुंचेगा। नतीजा? मंथली इन-हैंड 2-3 हजार कम, क्योंकि PF, ESI जैसी कटौतियां बढ़ेंगी। लेकिन लंबे समय में PF कॉर्पस दोगुना और 35 साल की सर्विस पर 1-2 करोड़ अतिरिक्त फायदा।
कंपनियों की नई चुनौतियां
कंपनियों के लिए चुनौती कम नहीं। HR सॉफ्टवेयर अपग्रेड, पेरोल रीकैलकुलेशन और अनुपालन पर करोड़ों खर्च। बड़े कॉरपोरेट्स जैसे IT फर्म्स ने काम शुरू कर दिया, लेकिन SMEs अभी जूझ रही हैं। श्रम मंत्रालय स्पष्ट कर चुका कि PF 15,000 रुपये की सीलिंग पर ही रहेगा तो टेक-होम पर असर नगण्य, लेकिन 50% नियम से टैक्सेबल इनकम बढ़ेगी। गिग वर्कर्स और फ्रीलांसर्स को पहली बार सोशल सिक्योरिटी मिलेगी, महिलाओं को नाइट शिफ्ट की छूट।
लंबे समय की पारदर्शिता
शुरुआत में कर्मचारी नाराजगी जता रहे हैं- मंथली खर्च पर दबाव। लेकिन एक्सपर्ट्स इसे पारदर्शी सुधार बता रहे। ओवरटाइम पर सहमति जरूरी, वीकली 48 घंटे कैप, 4-डे वर्कवीक का विकल्प। PM मोदी ने इसे ‘आजादी के बाद का सबसे बड़ा श्रम सुधार’ कहा। लंबे समय में सैलरी स्लिप साफ, रिटायरमेंट सिक्योर- कर्मचारी हो या नियोक्ता, सबको नया गणित सीखना पड़ेगा।









