
मेरठ के किसान भाइयों, आज खेती सिर्फ अनाज उगाना नहीं, बल्कि मुनाफे का धंधा बन चुका है। काजू की खेती इसका जीता-जागता सबूत है। कम पानी, पथरीली मिट्टी में भी यह फसल सीना तानकर खड़ी हो जाती है। धान-मक्के की जर्जर फसलियों से तंग किसानों के लिए काजू वरदान है, क्योंकि इसकी बाजार में साल भर डिमांड बनी रहती है। नए वैज्ञानिक तरीकों से लागत घटाकर लाखों-करोड़ों की कमाई हो रही है।
काजू की खेती क्यों चुनें?
उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में भी काजू की खेती संभव है, जहां उष्णकटिबंधीय जलवायु और रेतीली दोमट मिट्टी उपलब्ध है। 20-30 डिग्री तापमान और 500-2500 मिमी वर्षा इसकी पसंद है। शुरुआती निवेश मात्र 50,000-1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर, जिसमें 500 कलमबद्ध पौधे लगते हैं। 8×8 मीटर दूरी पर जून-जुलाई में रोपण करें। गड्ढों में देसी गोबर खाद और नीम की खली मिलाएं, ताकि दीमक-जड़ रोग न सताएं। उन्नत किस्में जैसे हायलाइफ, उल्लिवारा-1, धारा चुनें, जो तीसरे साल से 8-10 किलो प्रति पेड़ देंगी।
रोपण और शुरुआती देखभाल
पेड़ों की देखभाल आसान है। पहली दो साल हल्की सिंचाई दें, फिर प्राकृतिक वर्षा पर्याप्त। ड्रिप इरिगेशन से पानी बचेगा और फलन बढ़ेगा। सालाना छंटाई से सूरज की किरणें अंदर तक पहुंचेंगी, फलों की गुणवत्ता चमकेगी। जैविक तरीके अपनाएं- नीम तेल से टीकाकरण, वर्मीकम्पोस्ट से पोषण। कम रखरखाव में यह फसल ‘सेट एंड फॉरगेट’ टाइप है। छत्तीसगढ़ के बस्तर किसान इसका उदाहरण हैं, जहां ग्रुप बनाकर छोटी प्रोसेसिंग यूनिटें चला रहे हैं।
पेड़ों की मजबूत सेहत के राज
कटाई मार्च-अप्रैल में होती है। एक हेक्टेयर से 10 टन कच्चा काजू, बाजार भाव 1000-1200 रुपये/किलो। सीधे बेचने पर अच्छा लाभ, लेकिन प्रोसेसिंग से कमाई दोगुनी। कच्चे काजू को सुखाकर ग्रेडिंग करें, छिलका-फल से बायोफ्यूल या जूस बनाएं। पैकेजिंग और ब्रांडिंग से बड़े शहरों-निर्यात बाजार तक पहुंचें। सरकारी सब्सिडी लें- NHM योजना से 50% तक सहायता। उच्च घनत्व रोपण (5×5 मीटर) से उत्पादन दोगुना।
कटाई से कमाई तक का सफर
काजू खेती लंबे समय का सोना है। चौथे साल से स्थिर आय, 1 करोड़ तक वार्षिक लाभ संभव। जो किसान कम मेहनत में स्थायी मुनाफा चाहते हैं, वे आज ही शुरू करें। वैज्ञानिक सलाह लें, मिट्टी परीक्षण कराएं। यही समय है पुरानी खेती छोड़कर नोटों की बारिश बुलाने का!









