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UP Tourism: पहाड़ों वाली फीलिंग देगा यूपी का ये शहर! घूमने के लिए हैं बेहद खूबसूरत जगहें, आज ही बनाएं प्लान

मैदानी यूपी में पहाड़ों जैसा सुकून चाहिए? चित्रकूट आइए! विंध्य पर्वत से घिरा यह जिला रामायण का पवित्र स्थल है। मंदाकिनी नदी, हनुमान धारा, कामदगिरि और स्फटिक शिला की प्राकृतिक छटा मंत्रमुग्ध कर देती है। प्रयागराज से 130 किमी दूर, प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम। गर्मी में ठंडक पाने प्लान बनाएं!

By Pinki Negi

UP Tourism: पहाड़ों वाली फीलिंग देगा यूपी का ये शहर! घूमने के लिए हैं बेहद खूबसूरत जगहें, आज ही बनाएं प्लान

आगरा की ताजमहल नगरी से लेकर अयोध्या के राम मंदिर तक, उत्तर प्रदेश पर्यटन का खजाना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मैदानी राज्य में एक ऐसा जिला है, जो पहाड़ों वाली फीलिंग देता है? जी हां, चित्रकूट को ‘पहाड़ियों का शहर’ कहा जाता है। विंध्य पर्वतमाला की निचली श्रृंखलाओं से घिरा यह क्षेत्र रामायण काल का पवित्र स्थल है, जहां भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने 11 वर्ष वनवास बिताया। यहां की हरियाली, झरने और गुफाएं पर्यटकों को हिल स्टेशन जैसा सुकून देती हैं। गर्मियों की तपिश से बचने वालों के लिए चित्रकूट स्वर्ग समान है।

चित्रकूट की प्राकृतिक सुंदरता

चित्रकूट की प्राकृतिक सुंदरता किसी चमत्कार से कम नहीं। मंदाकिनी नदी के किनारे बसी पहाड़ियां, घने जंगल और कल-कल बहते झरने इस जगह को मोहक बनाते हैं। मानसून में जब पहाड़ियां हरे कालीन से ढक जाती हैं, तो नजारा देखने लायक होता है। प्रमुख आकर्षणों में राम घाट पर शाम की आरती, सीता घाट की शांति, हनुमान धारा का झरना और कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा शामिल हैं।

स्फटिक शिला पर राम-सीता के विश्राम की कथाएं जीवंत हो उठती हैं, जबकि गुप्त गोदावरी की गुफाएं रहस्यमयी आकर्षण पैदा करती हैं। भरत कुंड पर स्नान करने वाले श्रद्धालु भरत के चरण-पादुकाओं की याद ताजा करते हैं। ये जगहें न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि ट्रेकिंग और इको-टूरिज्म के शौकीनों को भी लुभाती हैं।

चित्रकूट का धार्मिक महत्व

चित्रकूट धार्मिक पर्यटन का केंद्र है। रामायण की कई घटनाएं यहां से जुड़ी हैं- जैसे भरत का राजगद्दी पर पादुका स्थापित करना। हनुमान धारा तक 365 सीढ़ियां चढ़ना भक्तों के लिए तपस्या सरीखा अनुभव है। यह क्षेत्र आस्था और प्रकृति का दुर्लभ मेल है, जहां स्वच्छ हवा और शांति मन को शुद्ध कर देती है। पर्यटक यहां ध्यान, योग और नेचर वॉक का आनंद लेते हैं।

चित्रकूट कैसे पहुँचें

पहुंचना भी आसान है। चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन लखनऊ (220 किमी), प्रयागराज (130 किमी), सतना या खजुराहो से जुड़ा है। सड़क मार्ग से बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज है। स्थानीय ऑटो-रिक्शा से घूमना सुविधाजनक है। ठहरने के लिए बजट होटल, धर्मशालाएं और रिसॉर्ट्स हैं- दैनिक खर्च 1000-2000 रुपये प्रति व्यक्ति। आदर्श समय अक्टूबर-मार्च है; रामनवमी या दीपोत्सव पर मेले लगते हैं।

पर्यटन विकास के प्रयास

उत्तर प्रदेश सरकार चित्रकूट को पर्यटन हब बनाने पर जोर दे रही है। सड़कें, होटल और सुविधाएं बेहतर हो रही हैं, फिर भी इसकी प्राकृतिक शुद्धता बरकरार है। लाखों पर्यटक यहां आते हैं। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं या आस्था में रुचि रखते हैं, तो चित्रकूट अविस्मरणीय बनेगा। आज ही प्लान बनाएं- यहां पहाड़ों का जादू आपको बुला रहा है!

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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