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Smart Meter Bill: प्रीपेड मीटर लगने के बाद बढ़ गया है बिजली बिल? कंट्रोल करने के लिए आजमाएं ये 5 जादुई तरीके

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों से बिल दोगुना होने की शिकायतें बढ़ी हैं, लेकिन रीयल-टाइम ट्रैकिंग और ऐप फीचर्स से 20-40% बचत संभव है। UPPCL के 70 लाख प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता जरूरी है।

By Pinki Negi

Smart Meter Bill: प्रीपेड मीटर लगने के बाद बढ़ गया है बिजली बिल? कंट्रोल करने के लिए आजमाएं ये 5 जादुई तरीके

उत्तर प्रदेश सहित देशभर में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों का स्थापन तेजी से हो रहा है। मार्च 2027 तक सभी उपभोक्ताओं को इनसे जोड़ने का लक्ष्य है, लेकिन कई जगहों पर शिकायतें उमड़ पड़ी हैं कि पुराने मीटरों की तुलना में बिल दोगुना हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वास्तविक खपत को सही मापने के कारण होता है, न कि मीटर की गड़बड़ी से। लीकेज, छिपा लोड या ओवरलोडिंग जैसी अनदेखी आदतें अब सामने आ रही हैं। अगर आपका भी बिल बढ़ा है, तो रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और ऐप फीचर्स का सही इस्तेमाल करके इसे काबू में किया जा सकता है।

प्रीपेड मीटर की कार्यप्रणाली

प्रीपेड मीटर मोबाइल रिचार्ज की तरह काम करते हैं- जितना रिचार्ज, उतनी बिजली। बैलेंस 30%, 10% या जीरो होने पर एसएमएस अलर्ट मिलते हैं, जिससे बिल शॉक रुक जाता है। लेकिन समस्या तब आती है जब मीटर इंस्टॉलेशन में फेस-न्यूट्रल तार गलत जुड़ जाएं या पुराना बैलेंस एडजस्ट न हो। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) ने हाल ही में राहत दी है- निगेटिव बैलेंस पर 50% राशि भरने से 3 दिन बिजली बहाल हो जाती है। अब सवाल यह है कि बिल कैसे कंट्रोल करें? यहां 5 जादुई तरीके हैं जो उपभोक्ता जागरूकता से उपजे हैं।

पहला तरीका: रीयल-टाइम ट्रैकिंग

सबसे पहला तरीका है रीयल-टाइम ट्रैकिंग। UPPCL स्मार्ट ऐप डाउनलोड कर पंजीकृत मोबाइल से लॉगिन करें। यह मीटर रीडिंग, बैलेंस और दैनिक खपत दिखाता है। घर में कौन सा उपकरण ज्यादा यूनिट खींच रहा है, यह तुरंत पता चल जाता है। उदाहरणस्वरूप, अगर एसी या फ्रिज पर नजर रखें, तो गैर-जरूरी समय में बंद करके 20-30% तक बचत हो सकती है। रोज चेक करने से पैटर्न समझ आएगा और बेकार खर्च रुकेगा।

दूसरा तरीका: भारी अप्लायंस सही समय पर

दूसरा, भारी अप्लायंस सही समय पर चलाएं। कई डिस्कॉम में ऑफ-पीक ऑवर्स (रात 10 बजे से सुबह 6 बजे) में दरें कम होती हैं। वॉशिंग मशीन, गीजर या पानी का मोटर उसी वक्त यूज करें। इससे न सिर्फ बिल घटेगा, बल्कि ग्रिड पर लोड भी कम होगा। आगरा जैसे शहरों में जहां लोड शेडिंग आम है, यह आदत कारगर साबित हो रही है।

तीसरा तरीका: छिपे लोड को खत्म करें

तीसरा, छिपे लोड को खत्म करें। टीवी, माइक्रोवेव या चार्जर स्टैंडबाय मोड में भी 5-10 यूनिट मासिक खींच लेते हैं। इन्हें यूज न होने पर प्लग निकाल दें। स्मार्ट मीटर यह स्टैंडबाय खपत भी रिकॉर्ड करता है, जो पहले अनदेखी रहती थी। एक सर्वे में पाया गया कि 40% उपभोक्ता इससे अनजान थे।

चौथा तरीका: स्वीकृत लोड का पालन

चौथा, स्वीकृत लोड से ज्यादा न यूज करें। अगर 2 केवी कनेक्शन है तो 3-4 उपकरण एक साथ न चलाएं, वरना पेनल्टी लगेगी और प्रति यूनिट दर बढ़ जाएगी। चेक मीटर लगवाकर वास्तविक लोड वेरिफाई कराएं। ओवरलोडिंग बिल को 50% तक बढ़ा देती है।

पांचवां तरीका: ऐप के स्मार्ट फीचर्स

पांचवां, ऐप के स्मार्ट फीचर्स अपनाएं। डेली बजट सेट करें- जैसे 5 यूनिट प्रतिदिन। लिमिट पार होने पर अलर्ट आएगा। पुराना बैलेंस हेल्पलाइन 1912 पर एडजस्ट करवाएं, जो 7-10 दिन में सुलझ जाता है।

बचत का नया जरिया

इन तरीकों से न सिर्फ बिल 20-40% कम होगा, बल्कि बिजली चोरी जैसी समस्याएं भी रुकेंगी। UPPCL के 78 लाख मीटरों में से 70 लाख प्रीपेड हैं, और उपभोक्ता जागरूकता से लक्ष्य हासिल होगा। बिजली विभाग का कहना है कि मीटर पारदर्शिता लाते हैं, बशर्ते उपभोक्ता स्मार्ट बनें। अगर समस्या बनी रहे, तो जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करें। स्मार्ट मीटर नुकसान नहीं, बल्कि बचत का जरिया है- बस सही इस्तेमाल की जरूरत है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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