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Middle East Crisis: क्या मिडिल ईस्ट के तनाव से बिगड़ गया आपका हॉलिडे प्लान? फ्लाइट और होटल का पैसा डूबने से ऐसे बचाएं

मिडिल ईस्ट के तनाव ने गर्मी की छुट्टियों पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है: मिडिल ईस्ट और यूरोप जाने वाली 40–50% ट्रिप रद्द हो चुकी हैं, हज़ारों फ्लाइट कैंसल हैं, जिससे लाखों रुपये फ्लाइट और होटल बुकिंग में फंस रहे हैं। यात्री रिफंड और री‑बुकिंग के लिए एयरलाइन और DGCA के नए नियमों, ट्रैवल इंश्योरेंस और फ्लेक्सिबल बुकिंग की तरफ दौड़ रहे हैं।

By Pinki Negi

Middle East Crisis: क्या मिडिल ईस्ट के तनाव से बिगड़ गया आपका हॉलिडे प्लान? फ्लाइट और होटल का पैसा डूबने से ऐसे बचाएं

अगर आपने भी इस गर्मी में विदेश घूमने का सपना बुना था, तो मिडिल ईस्ट में जारी तनाव आपकी छुट्टियों का भविष्य तो बदल ही रहा है, साथ‑साथ लाखों रुपये भी आपके बुकिंग्स में फंसा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के बाद मिडिल ईस्ट और यूरोप जाने वाली 40 से 50 फीसदी वेकेशन‑पैकेज रद्द हो चुके हैं, हजारों फ्लाइट दर्जनों देशों के एयरपोर्ट यात्रियों को दो‑चार घंटे से लेकर दिनभर तक टर्र करा रही हैं।

अर्थशास्त्री और ट्रैवल इंडस्ट्री के डेटा के मुताबिक, पश्चिम एशिया के तनाव ने भारतीय यात्रियों के लिए न सिर्फ डेस्टिनेशन की लिस्ट बदल दी है, बल्कि कई परिवारों की मेहनत की कमाई को डूबने से बचाने के लिए फिर तर्क–नियम–इंश्योरेंस की दौड़ शुरू कर दी है।

वास्तविक नुकसान: लाखों रुपये बुकिंग्स में फंसे

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन ग्रां प्री देखने के लिए पंचकूला की रूपाली बराड़ और उनके बेटे ने एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे, लेकिन ट्रिप रद्द होने से उन्हें 75,000 रुपये का सीधा घाटा झेलना पड़ा। इसी तरह, मुंबई की कुमकुम शर्मा को ओमान ट्रिप कैंसल होने से 41,600 रुपये का नुकसान हुआ, जबकि उनकी होटल बुकिंग भी ऐसी थी जिस पर रिफंड का फार्मूला साफ नहीं था। ऐसे हज़ारों केस उजागर हो रहे हैं, जहां यात्रा सिर्फ “सुरक्षा चिंता” के कारण नहीं टूटती, बल्कि एयरलाइन्स की अटकी हुई रिफंड और नीचली–परत की ट्रैवल एजेंसियां भी उनका रास्ता रोक रही हैं।

फ्लाइट–किराये पर दोगुना दबाव

मुसीबत सिर्फ रद्द उड़ानों तक नहीं रुकती। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 23 मार्च से घरेलू टिकटों पर लगी 18,000 रुपये की किराया कैप हटा दी है, जिससे एयर इंडिया, इंडिगो और अकासा जैसी एयरलाइन्स ने फ्यूल सरचार्ज और बेस फेयर घटाने की बजाय बढ़ा दिए हैं। अंतर्राष्ट्रीय रूटों पर खास तौर पर यूरोप और अमेरिका जाने वाली फ्लाइट्स का किराया मिडिल ईस्ट के रूट बंद होने के बाद दो से तीन गुना छलांग लगा चुका है। इसी वजह से भारतीय पर्यटक अब वियतनाम, फिलीपींस, बाली और श्रीलंका जैसे दक्षिण‑पूर्व एशियाई देशों की ओर मुड़ रहे हैं, जहां उड़ानें शॉर्ट, सस्ती और अभी तक रूट‑अस्थिरता से कम जुड़ी हुई हैं।

रिफंड फंसने की दो बड़ी गलतियां

घबराहट में यात्री अक्सर दो गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे उनका रिफंड लुप्त हो जाता है। पहली गलती: वे खुद ही अपनी टिकट या होटल रूम बुकिंग रद्द कर देते हैं, जबकि एयरलाइन या होटल खुद उड़ान/सर्विस रद्द नहीं करता। इस स्थिति में कंपनी रिफंड देने के लिए बाध्य नहीं रहती, बस अपनी छूट के हिसाब से कुछ ट्रैवल क्रेडिट या पार्टियल रिफंड देती है। दूसरी बात: युद्ध या सैन्य संघर्ष जैसी घटनाएं अक्सर सामान्य ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर नहीं होतीं, जिससे यात्री बीमा पर भरोसा कर बैठते हैं और बाद में “रिस्क एक्सक्लूडेड” की लाइन पढ़कर चौंक जाते हैं।

होटल-फ्लाइट पैसा बचाने की स्मार्ट ट्रिक्स

रिफंड बचाने के लिए यात्रियों को अब दोनों ही स्तर पर स्‍ट्रेटजी बनानी होगी। सबसे पहले फ्लाइट चुनते समय “फ्लेक्स फेयर” वाले टिकट को प्राथमिकता देना चाहिए, जिनमें नाममात्र शुल्क पर तारीख बदलने या टिकट रद्द करने की छूट रहती है, भले ही ये टिकट सामान्य से थोड़े महंगे हों। दूसरा नियम: ट्रैवल एग्रीगेटर (OTA) की जगह सीधे एयरलाइन या होटल की वेबसाइट से बुकिंग करना, ताकि रिफंड नियमों में थर्ड‑पार्टी की शर्तें आड़े न आएं। कुमकुम शर्मा को उनकी फ्लेक्सिबल होटल बुकिंग की वजह से मस्कट से 60,000 रुपये का पूर्ण रिफंड आसानी से मिल पाया, जबकि बिना ऐसी पॉलिसी वालों को अक्सर 70–100% तक का नुकसान स्वीकारना पड़ रहा है।

क्रेडिट कार्ड वाली बुकिंग भी अब एक रणनीतिक चुनाव बनती जा रही है। IDFC फर्स्ट बैंक जैसी कुछ प्रीमियम कार्ड्स “कैंसल फॉर एनी रीजन” कवर देती हैं, जिसमें फ्लाइट या होटल कैंसिल होने पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का रिफंड बेसिक ढाल की तरह काम करता है। यह ऐसे समय में भी काम आता है जब एयरलाइन या होटल ऑफिशियली कोई एक्सेप्शन नहीं देता, लेकिन यात्री युद्ध या तनाव को वैध जोखिम के रूप में दिखाता है।

DGCA के नए नियम: रिफंड बना फास्ट ट्रैक

यात्रियों को राहत देने के लिए डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 26 मार्च से रिफंड और कैंसिलेशन के नए नियम लागू कर दिए हैं। अब अगर यात्री ने क्रेडिट कार्ड से टिकट बुक किया है, तो एयरलाइन को रिफंड 7 दिनों के भीतर वापस करना होगा; एजेंट या OTA के जरिए बुकिंग होने पर यह अवधि 14 कार्य दिवसों तक है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अगर यात्री ने एयरलाइन वेबसाइट से टिकट लिया है और उसकी घरेलू यात्रा में 7 दिन या इंटरनेशनल यात्रा में 15 दिन से ज्यादा का गैप है, तो वह बुकिंग के 48 घंटों के भीतर बिना किसी कैंसलेशन चार्ज के टिकट रद्द या तारीख बदल सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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