
पेट्रोल पंप पर हर बार सुनने को मिलता है- “भाई साहब, टैंक फुल कर दो!” लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आम आदत आपकी कार या मोटरसाइकिल को नुकसान पहुंचा सकती है और कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है? विशेषज्ञों और मैकेनिक्स के अनुसार, फ्यूल टैंक को तय क्षमता से ज्यादा भरवाना (ओवरफिलिंग) इंजन पर दबाव बढ़ाता है, लीकेज का खतरा पैदा करता है और आग लगने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। गर्मियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब तापमान 40 डिग्री पार कर जाता है।
फ्यूल टैंक डिजाइन का रहस्य
ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्यूल टैंक की क्षमता जानबूझकर थोड़ी कम बताती हैं। उदाहरण के लिए, अगर बाइक की टैंक 10 लीटर की है, तो इसमें 1-2 लीटर एयर स्पेस होता है। यह स्पेस फ्यूल के थर्मल एक्सपैंशन (फैलाव) और वाष्प (वाष्पीकरण) के लिए जरूरी है। पेट्रोल पंप के ठंडे अंडरग्राउंड टैंक से निकला ईंधन बाहर आने पर गर्म होकर फैलता है। अगर टैंक पहले से ठसाठस भरा है, तो दबाव बढ़ने से लीकेज शुरू हो जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे फ्यूल वेंट पाइप ब्लॉक हो जाता है, जो इंजन सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।
गंभीर जोखिम और नुकसान
ओवरफिलिंग के कई खतरनाक परिणाम सामने आते हैं। सबसे बड़ा खतरा आग लगना है। बाइक को साइड स्टैंड पर खड़ा करने पर अतिरिक्त फ्यूल बाहर बह सकता है। पेट्रोल की ज्वलनशील प्रकृति के कारण हल्की चिंगारी (जैसे सिगरेट या इंजन स्पार्क) बड़ा हादसा कर सकती है। गर्मी में सूरज की किरणों से फ्यूल भाप बनाता है, जो फुल टैंक में जगह न मिलने पर लीक होता है। इसके अलावा, प्रदूषण बढ़ता है क्योंकि EVAP सिस्टम (वाष्प नियंत्रण) फेल हो जाता है। माइलेज 10-15% तक कम हो सकती है और इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है।
सरकारी चेतावनी और मामले
सरकार ने भी कई बार चेतावनी जारी की है। नरेंद्र मोदी सरकार के एक सर्कुलर में सलाह दी गई कि टैंक को लिड तक फुल न करें, खासकर ढलान वाली पार्किंग में। अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसी रिपोर्ट्स में दर्ज है कि फुल टैंक से फ्यूल पंप खराब होता है और प्लास्टिक पार्ट्स पेंट को नुकसान पहुंचता है। हाल के मामलों में, 30 लीटर टैंक में 35 लीटर भरने की शिकायतें बढ़ी हैं, जो पंपों की गड़बड़ी भी दर्शाती हैं।
विशेषज्ञ सलाह: सुरक्षित रहें
मैकेनिक्स की सलाह सरल है- नोजल के ऑटो-कट होने पर रुकें। टैंक का 90% ही भरें, यानी 10% एयर स्पेस छोड़ें। लंबी यात्रा से पहले चेक करें कि कोई लीक तो नहीं। गर्मियों में आधा टैंक रखना सबसे सुरक्षित। नियमित सर्विसिंग से फ्यूल सिस्टम हेल्दी रहेगा। याद रखें, सस्ता ईंधन बचाने की होड़ में गाड़ी और जान जोखिम में न डालें। सुरक्षित ड्राइविंग ही असली माइलेज है!









