Tags

सावधान! कार में फुल टंकी तेल भरवाना पड़ सकता है भारी, मैकेनिक ने बताई ये बड़ी वजह

पेट्रोल पंप पर "टैंक फुल" की मांग आम है, लेकिन ओवरफिलिंग इंजन को नुकसान पहुंचाती है और आग का जोखिम बढ़ाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्यूल टैंक में एयर स्पेस फैलाव और वाष्प के लिए जरूरी होता है। गर्मी में दबाव से लीकेज होता है, प्रदूषण बढ़ता है। नोजल रुकते ही भराई बंद करें, 10% जगह छोड़ें। सुरक्षित ड्राइविंग प्राथमिकता हो!

By Pinki Negi

why you should not fill oil in a car beyond full capacity what are its disadvantages

पेट्रोल पंप पर हर बार सुनने को मिलता है- “भाई साहब, टैंक फुल कर दो!” लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आम आदत आपकी कार या मोटरसाइकिल को नुकसान पहुंचा सकती है और कभी-कभी जानलेवा साबित हो सकती है? विशेषज्ञों और मैकेनिक्स के अनुसार, फ्यूल टैंक को तय क्षमता से ज्यादा भरवाना (ओवरफिलिंग) इंजन पर दबाव बढ़ाता है, लीकेज का खतरा पैदा करता है और आग लगने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। गर्मियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब तापमान 40 डिग्री पार कर जाता है।

फ्यूल टैंक डिजाइन का रहस्य

ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्यूल टैंक की क्षमता जानबूझकर थोड़ी कम बताती हैं। उदाहरण के लिए, अगर बाइक की टैंक 10 लीटर की है, तो इसमें 1-2 लीटर एयर स्पेस होता है। यह स्पेस फ्यूल के थर्मल एक्सपैंशन (फैलाव) और वाष्प (वाष्पीकरण) के लिए जरूरी है। पेट्रोल पंप के ठंडे अंडरग्राउंड टैंक से निकला ईंधन बाहर आने पर गर्म होकर फैलता है। अगर टैंक पहले से ठसाठस भरा है, तो दबाव बढ़ने से लीकेज शुरू हो जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे फ्यूल वेंट पाइप ब्लॉक हो जाता है, जो इंजन सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।

गंभीर जोखिम और नुकसान

ओवरफिलिंग के कई खतरनाक परिणाम सामने आते हैं। सबसे बड़ा खतरा आग लगना है। बाइक को साइड स्टैंड पर खड़ा करने पर अतिरिक्त फ्यूल बाहर बह सकता है। पेट्रोल की ज्वलनशील प्रकृति के कारण हल्की चिंगारी (जैसे सिगरेट या इंजन स्पार्क) बड़ा हादसा कर सकती है। गर्मी में सूरज की किरणों से फ्यूल भाप बनाता है, जो फुल टैंक में जगह न मिलने पर लीक होता है। इसके अलावा, प्रदूषण बढ़ता है क्योंकि EVAP सिस्टम (वाष्प नियंत्रण) फेल हो जाता है। माइलेज 10-15% तक कम हो सकती है और इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है।

सरकारी चेतावनी और मामले

सरकार ने भी कई बार चेतावनी जारी की है। नरेंद्र मोदी सरकार के एक सर्कुलर में सलाह दी गई कि टैंक को लिड तक फुल न करें, खासकर ढलान वाली पार्किंग में। अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसी रिपोर्ट्स में दर्ज है कि फुल टैंक से फ्यूल पंप खराब होता है और प्लास्टिक पार्ट्स पेंट को नुकसान पहुंचता है। हाल के मामलों में, 30 लीटर टैंक में 35 लीटर भरने की शिकायतें बढ़ी हैं, जो पंपों की गड़बड़ी भी दर्शाती हैं।

विशेषज्ञ सलाह: सुरक्षित रहें

मैकेनिक्स की सलाह सरल है- नोजल के ऑटो-कट होने पर रुकें। टैंक का 90% ही भरें, यानी 10% एयर स्पेस छोड़ें। लंबी यात्रा से पहले चेक करें कि कोई लीक तो नहीं। गर्मियों में आधा टैंक रखना सबसे सुरक्षित। नियमित सर्विसिंग से फ्यूल सिस्टम हेल्दी रहेगा। याद रखें, सस्ता ईंधन बचाने की होड़ में गाड़ी और जान जोखिम में न डालें। सुरक्षित ड्राइविंग ही असली माइलेज है!

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें