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उत्तराखंड स्कूल बस-वैन का नया रेट जारी: अब दूरी के हिसाब से लगेगा किराया, जानें आपके बच्चे की बस का कितना बढ़ा या घटा दाम?

उत्तराखंड में पहली बार स्कूल बस-वैन किराया दूरी के आधार पर फिक्स किया गया है। राज्य परिवहन प्राधिकरण ने नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देश पर 4 स्लैबों में किराया तय किया: 10 किमी तक ₹2,200 से लेकर 30 किमी+ पर ₹3,700 तक। छुट्टियों में किराया नहीं, मनमानी पर रोक और उल्लंघन पर परमिट निरस्त की सख्त कार्रवाई होगी, जिससे अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।

By Pinki Negi

उत्तराखंड स्कूल बस-वैन का नया रेट जारी: अब दूरी के हिसाब से लगेगा किराया, जानें आपके बच्चे की बस का कितना बढ़ा या घटा दाम?

उत्तराखंड में स्कूली बच्चों के परिवहन शुल्क को लेकर अब कोई मनमानी नहीं हो सकेगी। राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) की मंगलवार को हुई ऐतिहासिक बैठक में पहली बार स्कूल बस और स्कूल वैन के किराए को दूरी के आधार पर स्पष्ट रूप से फिक्स कर दिया गया है। नैनीताल हाईकोर्ट के जनहित याचिका (PIL) के निर्देशों के बाद लिए गए इस फैसले से हजारों अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

कोर्ट के निर्देश पर गठी समिति ने किए गणित

इस अहम निर्णय से पहले राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी, जिसने छह माह तक विस्तृत अध्ययन किया। समिति ने वाहन की खरीद कीमत, EMI, ड्राइवर और कंडक्टर का वेतन, ईंधन की उछाल, बीमा प्रीमियम, नियमित मेंटेनेंस, परमिट और फिटनेस शुल्क सहित सभी का गहराई से विश्लेषण किया। इन सभी कारकों को संतुलित करते हुए ही ‘रेट लिस्ट’ तैयार की गई, ताकि न तो स्कूल को नुकसान हो और न ही अभिभावकों पर अत्यधिक बोझ आए।

स्कूल बस का नया रेट फॉर्मूला

नई नीति के तहत स्कूल बस का मासिक किराया अब सफर की दूरी के चार स्तरों में बंटा है:

  • 1 से 10 किमी दूरी के लिए: ₹2,200 प्रति छात्र/माह
  • 10 से 20 किमी दूरी के लिए: ₹2,700 प्रति छात्र/माह
  • 20 से 30 किमी दूरी के लिए: ₹3,200 प्रति छात्र/माह
  • 30 किमी से अधिक दूरी के लिए: ₹3,700 प्रति छात्र/माह

पहले कई स्कूल 10 किमी के दायरे में भी 2500-3000 रुपये तक वसूल करते थे, जबकि अब 10 किमी तक का अधिकतम चार्ज 2200 रुपये ही रहेगा, जो कि एक बड़ी राहत है।

स्कूल वैन/मैक्सी-कैब के लिए अलग स्लैब

छोटी दूरी के लिए स्कूल वैन और मैक्सी-कैबों के लिए किराया थोड़ाभिन्न रखਿਆ गया है, क्योंकि इनकी क्षमता कम होती है:

  • 1 से 5 किमी: ₹2,100
  • 5 से 10 किमी: ₹2,500
  • 10 से 20 किमी: ₹3,000
  • 20 किमी से अधिक: ₹3,500

अभिभावकों को क्या राहत मिलेगी?

सबसे बड़ी राहत यह है कि अब स्कूल छुट्टियों, शनिवार-रविवार या स्कूल बंद होने के दिनों में भी किराया वसूल नहीं पाएंगे। पहले स्कूल पूरे महीने का किराया लूटते थे, चाहे बच्चे 20 दिन स्कूल जाएं या 5 दिन। नई नीति में ‘वैध सफर’ के सिद्धांत लागू करने पर जोर दिया गया है, जिससे मासिक बिल में 15-20% की कमी आ सकती है।

स्कूलों के लिए सख्त चेतावनी

राज्य परिवहन प्राधिकरण ने सभी निजी और सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे तय रेट से अधिक शुल्क नहीं वसूल सकते। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खती उनके परिवहन परमिट निरस्त किए जा सकते हैं और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। प्रदेश के 12,000 से अधिक स्कूल वाहनों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिनसे 40,000 से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं।

शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों की आर्थिक तकलीफों को दूर करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार का यह कदम एक मॉडल बनेगा। अब से हर स्कूल को अपने वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर यह रेट लिस्ट सार्वजनिक रूप से दिखानी कम्पलसरी होगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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