
देश में करोड़ों लोग बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन न्यूनतम बैलेंस (मिनिमम बैलेंस) के नियमों से अनजान रहने के कारण कईयों की जेब पर छोटे-छोटे चार्ज मिलकर भारी बोझ बन जाते हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 2026 में मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों को और सख्त किया है, जिसमें पेनल्टी की सीमाएं तय की गई हैं। इससे बैंकों की मनमानी पर लगाम लगेगी, लेकिन ग्राहकों को भी सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जीरो बैलेंस अकाउंट्स चुनकर या अलर्ट सिस्टम अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।
न्यूनतम बैलेंस क्या है?
RBI के अनुसार, नियमित सेविंग्स अकाउंट्स में न्यूनतम बैलेंस अनिवार्य नहीं है, लेकिन बैंक अपनी पॉलिसी के तहत औसत मासिक बैलेंस (AMB) तय कर सकते हैं। मेट्रो शहरों में यह ₹5,000, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ₹3,000 और ग्रामीण इलाकों में ₹1,000 तक हो सकता है। अगर बैलेंस इससे नीचे गिरता है, तो पेनल्टी ₹50 से ₹600 तक लग सकती है, जिसमें GST भी जुड़ जाता है।
उदाहरणस्वरूप, SBI और PNB जैसे पब्लिक सेक्टर बैंकों ने पेनल्टी माफ कर दी है, जबकि HDFC और ICICI जैसे प्राइवेट बैंकों में यह अभी लागू है। बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट्स पर 1 अप्रैल 2026 से कोई पेनल्टी नहीं लगेगी- ये जीरो बैलेंस वाले खाते हैं।
प्रमुख बैंकों के नियम
| बैंक | न्यूनतम बैलेंस (मेट्रो/ग्रामीण) | अधिकतम मासिक पेनल्टी |
|---|---|---|
| SBI | निल / निल | माफ (2020 से) |
| PNB | निल / निल | माफ |
| HDFC | ₹10,000 / ₹5,000 | ₹600 तक |
| ICICI | ₹5,000-₹10,000 / कम | ₹500 तक |
बार-बार उल्लंघन पर चार्ज लगातार कट सकते हैं, लेकिन RBI ने साफ कहा है कि पेनल्टी से खाता नेगेटिव नहीं हो सकता। पेनल्टी लगाने से पहले SMS/ईमेल अलर्ट अनिवार्य है। जन धन योजना जैसे विशेष खाते इससे मुक्त हैं।
बचाव के उपाय
- हमेशा AMB बनाए रखें या ऑटो-स्वीप सुविधा चालू करें।
- BSBD या सैलरी अकाउंट चुनें, जहां जीरो बैलेंस की सुविधा मिले।
- मोबाइल ऐप से नियमित बैलेंस चेक करें और अपडेट लें।
- शिकायत हो तो RBI के बैंकिंग लोकपाल पोर्टल पर दर्ज करें।
इन नियमों से वित्तीय समावेशन बढ़ेगा, लेकिन ग्राहकों को जागरूक रहना जरूरी है। छोटे चार्ज बचाकर सालाना हजारों रुपये की बचत संभव है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अकाउंट खोलते समय शर्तें पढ़ें और जरूरत पड़ने पर बैंक स्विच करें। RBI की ये पहल ग्राहक हितों की रक्षा करती है, लेकिन सतर्कता ही असली कुंजी है।









