
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 ग्रामीण परिवहन क्रांति ला रही है। जिन गांवों तक बसें या अन्य साधन नहीं पहुंचे, उन्हें जोड़ने के लिए परिवहन विभाग ने निजी संचालकों से आवेदन मांगे हैं। 15-28 सीट वाली डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मिनी बसें गांव-गांव दौड़ेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को कम निवेश में रोजगार और यात्रियों को सस्ती सुविधा मिलेगी। योजना से प्रदेश की 59,163 ग्राम पंचायतों में से बाकी 12,200 गांव जुड़ेंगे।
योजना का विमोचन
परिवहन विभाग के अनुसार, बसें सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होंगी। मासिक खर्च महज 1500 रुपये बताया गया है, जिसमें परमिट और टैक्स छूट शामिल है। संचालक स्थानीय ड्राइवर-कंडक्टर रख सकेंगे, जिससे रुकने-ठहरने में आसानी होगी। आरटीओ अनीता सिंह ने स्पष्ट किया कि बसें 8 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। मेरठ एनसीआर जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण नियमों के तहत केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक बसें ही चल सकेंगी। आवेदन शुल्क 2000 रुपये है, और स्वीकृति के 15 दिनों में बस सड़क पर उतर जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया सरल, अंतिम तारीख नजदीक
आवेदन sewayojan.up.nic.in या परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन जमा करें। अंतिम तिथि 28 मार्च 2026 है, लेकिन जल्द आवेदन करें क्योंकि चयन अप्रैल में पूरा होगा और मई से संचालन शुरू। किराया उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन प्राधिकरण के नियमों से बंधा रहेगा, जो यात्रियों के लिए किफायती होगा। विभाग ने 6500 ड्राइवर-कंडक्टर पदों पर भी भर्ती की घोषणा की है, जो योजना को गति देगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
यह योजना ग्रामीणों के लिए ‘तोहफा’ है, जैसा परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा। कम खर्च पर अच्छी कमाई संभव है, क्योंकि ग्रामीण रूट्स पर मांग हमेशा रहती है। उदाहरणस्वरूप, एक 20-सीट वाली मिनी बस प्रतिदिन 200-300 किमी चले तो मासिक आय 50,000 रुपये से ऊपर हो सकती है। इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता से सब्सिडी का लाभ भी मिलेगा। चंदौली, मेरठ जैसे जिलों में पायलट प्रोजेक्ट सफल रहे हैं।
योजना से न केवल कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उद्यमिता को पंख लगेंगे। हालांकि, संचालकों को रखरखाव और ड्राइवर ट्रेनिंग पर ध्यान देना होगा। सरकार का लक्ष्य: हर गांव बस-से जुड़ा प्रदेश। इच्छुक संचालक आज ही आवेदन करें, मौका हाथ से न निकले। (









