
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के संभावित टॉपर्स की वेरीफिकेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 12वीं की परीक्षा 2 से 13 फरवरी और 10वीं की 17 से 25 फरवरी तक आयोजित हुई थी। हर साल की तरह इस बार भी पटना स्थित बोर्ड कार्यालय में टॉपर्स को बुलाकर उनकी असलियत परखी जा रही है, ताकि रिजल्ट घोषणा से पहले किसी घपले की गुंजाइश न रहे।
वेरीफिकेशन प्रक्रिया
बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, संभावित टॉपर्स को सबसे पहले उनकी आईडी, एडमिट कार्ड और मूल उत्तर पुस्तिकाएं चेक की जाती हैं। विशेषज्ञों की 10-15 सदस्यीय टीम हर विषय से 30-40 सवाल पूछती है- बेसिक से लेकर कॉन्सेप्चुअल तक। छात्रों से मौके पर लिखित टेस्ट भी दिलवाया जाता है, जिसकी हैंडराइटिंग मुख्य परीक्षा की कॉपी से मिलाई जाती है। अगर स्टाइल, लहजा या जवाबों में फर्क दिखा, तो मार्किंग रिव्यू हो जाती है। यह प्रक्रिया इसलिए सख्त है क्योंकि 2016 के ‘टॉपर स्कैम’ ने बोर्ड की साख पर बट्टा लगाया था।
प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कैमरे और रिकॉर्डिंग चलती रहती है। छात्रों से उनका परिचय, करियर प्लान और कभी-कभी अंग्रेजी में सेल्फ-इंट्रोडक्शन भी मांगा जाता है। बोर्ड अध्यक्ष आनंद देव बताते हैं कि यह सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं, बल्कि मेरिट की आखिरी कसौटी है। वेरीफिकेशन क्लियर होने पर ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में टॉपर्स लिस्ट और रिजल्ट जारी होता है। इस साल पटना, मुजफ्फरपुर, नालंदा जैसे जिलों से संभावित नाम उभर रहे हैं।
2016 का काला अध्याय
टॉपर्स वेरीफिकेशन की जड़ें 2016 के उस वायरल वीडियो में हैं, जब 12वीं आर्ट्स टॉपर रूबी राय से ‘पॉलिटिकल साइंस क्या है?’ पूछा गया। छात्रा का जवाब था – “पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाना, फल-सब्जी आदि सिखाया जाता है।” यह क्लिप सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। जांच में पता चला कि रूबी की कॉपी में गड़बड़ी हुई थी- गलत उत्तरों को सही ठहराने वाले निशान लगे थे। उसका रिजल्ट रद्द हो गया, कई अधिकारी निलंबित हुए और बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे।
इस घोटाले के बाद BSEB ने सबक लिया। अब रिजल्ट से 10-15 दिन पहले संभावित टॉपर्स (टॉप-10 या हाई परसेंटाइल वाले) को बुलाया जाता है। पहले सिर्फ इंटर का था, अब मैट्रिक में भी अनिवार्य। इससे न सिर्फ फ्रॉड रुका, बल्कि बोर्ड की विश्वसनीयता बढ़ी। पिछले साल 2025 में भी इसी प्रक्रिया से दो संभावित टॉपर्स की रैंकिंग बदली गई थी।
टॉपर्स के लिए ‘प्रेशर कूकर’
छात्रों को यह इंटरव्यू ‘पसीना छुड़ाने वाला’ लगता है। घंटों सवालों की बौछार, मीडिया की मौजूदगी और भविष्य दांव पर – कॉन्फिडेंस टेस्ट हो जाता है। लेकिन फायदा दोहरा: असली मेहनतकशों को सम्मान मिलता है और नकली टॉपर्स का पर्दाफाश होता है। बोर्ड सूत्रों के अनुसार, 90% मामलों में वेरीफिकेशन स्मूथ होता है, लेकिन शेष 10% में गड़बड़ी पकड़ी जाती है।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर सिंह कहते हैं, “यह सिस्टम बिहार जैसे बड़े बोर्ड के लिए जरूरी है, जहां कॉपीिंग का इतिहास रहा। अन्य राज्य बोर्ड्स को भी अपनाना चाहिए।” हालांकि, कुछ अभिभावक शिकायत करते हैं कि प्रेशर से बच्चे घबरा जाते हैं।
कब आएगा रिजल्ट?
वेरीफिकेशन अप्रैल के पहले हफ्ते तक चलेगा। रिजल्ट biharboardonline.bihar.gov.in पर उपलब्ध होगा। छात्र रोल नंबर से चेक कर सकेंगे। पिछले ट्रेंड से 12वीं का रिजल्ट पहले, फिर 10वीं का। इस बार पास प्रतिशत 85% से ऊपर रहने की उम्मीद। बिहार बोर्ड का यह कदम न सिर्फ पारदर्शिता का प्रतीक है, बल्कि मेरिट को सलाम करने का भी। टॉपर्स के लिए तनाव भले हो, लेकिन यह उनकी मेहनत की असली पहचान है।









