
गोरखपुर का गोलघर इलाका, जो शहर का व्यस्त व्यापारिक केंद्र है, अब साइबर अपराधियों के लिए ‘हॉटस्पॉट’ बन चुका है। साइबर थाना पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पार्क रोड पर स्थित मात्र चार एटीएम से ठगी की रकम 336 बार निकाली गई। यह संगठित गिरोह का सुनियोजित अपराध है, जहां देशभर से लूटी गई रकम म्यूल खातों के जरिए यहां कैश में बदली जा रही थी। पुलिस ने बैंकों को नोटिस जारी कर फुटेज मांगे हैं, जिससे अधिकारियों की परेशानियां बढ़ गईं।
साइबर ठगी की चेन उजागर
साइबर अपराधी सबसे पहले देश के विभिन्न शहरों में लोगों को फोन, व्हाट्सएप या ऐप्स के जरिए ठगते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे जाल बुनकर करोड़ों रुपये ऐंठ लेते हैं, फिर इन्हें म्यूल खातों (बलि के बकरे खाते) में ट्रांसफर कर देते हैं। गोलघर के इन चार एटीएम पर एटीएम कार्ड स्वैपिंग या सीधे निकासी कर ठग नकद लेकर फरार हो जाते हैं। एक एटीएम से 130 बार, दूसरे से 100, तीसरे से 56 और चौथे से 50 बार ऐसी ट्रांजेक्शन हुए। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि यह रकम ऑनलाइन फ्रॉड से आई थी, और अब फुटेज से संदिग्धों की तलाश तेज है।
पुलिस की सख्ती और बैंक पर दबाव
शुक्रवार को साइबर थाना पुलिस ने संबंधित बैंकों के मैनेजरों को नोटिस भेजे। सीसीटीवी फुटेज, खाताधारकों का विवरण और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री मांगी गई है। जांच का मकसद अलग-अलग समय पर आने वाले लोगों की पहचान करना है, ताकि गिरोह के स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। इन एटीएम को अब विशेष निगरानी सूची में डाल दिया गया है। बैंक अधिकारियों की मुश्किलें तब बढ़ीं जब पता चला कि पिछले एक साल में गोरखपुर के एटीएम और खातों से कुल 10 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई। जल्द ही अधिकारियों के साथ बैठक कर सिक्योरिटी मजबूत करने की योजना है।
शहर में साइबर क्राइम का बढ़ता ग्राफ
गोरखपुर साइबर ठगी का केंद्र बन रहा है। हाल ही में कैंट में मछली व्यापारी ने 1.58 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी की, जिसका एक आरोपी पकड़ा गया। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ, जो अमेरिका को निशाना बनाता था। मोबाइल गुम होने पर 4.17 लाख उड़ाने जैसे छोटे-बड़े केस रोज आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूल खाते चलाने वाले स्थानीय युवा गिरोह से जुड़े हैं, जो एटीएम पर बार-बार आते हैं। पुलिस अब हॉटस्पॉट मैपिंग कर रही है।
ठगी रोकने के उपाय और सावधानियां
पुलिस ने एटीएम पर सीसीटीवी अपग्रेड, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम लगाने की सिफारिश की है। जनता से अपील है कि संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। दो-स्तरीय पासवर्ड, OTP चेक और अनजान कॉल्स न उठाना जरूरी है। गोरखपुर जैसे शहरों में साइबर सेल को मजबूत करने की मांग बढ़ रही है। यह मामला पूरे उत्तर प्रदेश के लिए चेतावनी है कि डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर सिक्योरिटी कितनी महत्वपूर्ण है।









