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Jio, Airtel और Vi की मनमानी पर संसद में हंगामा! ‘इनकमिंग कॉल फ्री क्यों नहीं?’ मुद्दे पर हुई जोरदार बहस; क्या बदलेंगे नियम?

संसद में Jio, Airtel, Vi की नीतियों पर हंगामा। रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल बंद करने पर सांसद भड़के। विपक्ष ने फ्री कॉल्स की मांग की, सरकार ने TRAI समीक्षा का वादा किया। उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद।

By Manju Negi

लोकसभा और राज्यसभा में आज बड़ा हंगामा देखने को मिला। प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों Jio, Airtel और Vodafone Idea की रिचार्ज संबंधी नीतियों को लेकर सांसदों ने कड़ा रुख अपनाया। विपक्ष ने जोरदार तरीके से उठाया कि रिचार्ज समाप्त होने पर इनकमिंग कॉल्स को तुरंत बंद क्यों किया जाता है। उन्होंने इसे आम उपभोक्ताओं पर बोझ बताया और फ्री इनकमिंग कॉल्स को बुनियादी हक मानने की मांग की। सदन में नारेबाजी के बीच स्पीकर को कई बार व्यवस्था बनानी पड़ी।

Jio, Airtel और Vi की मनमानी पर संसद में हंगामा! 'इनकमिंग कॉल फ्री क्यों नहीं?' मुद्दे पर हुई जोरदार बहस; क्या बदलेंगे नियम?

विपक्ष का आक्रोश और सत्ताधारी का जवाब

कांग्रेस के एक सांसद ने शुरुआत की। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग मोबाइल पर निर्भर हैं, खासकर गांवों में जहां यह आपात सेवाओं का जरिया है। रिचार्ज न कर पाने पर एक-दो दिनों में ही कॉल्स बंद हो जाना गरीबों के साथ अन्याय है। दूसरे दल के सदस्यों ने समर्थन दिया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। सत्ताधारी पक्ष ने सफाई दी कि नियामक संस्था पहले से वैलिडिटी बढ़ाने के कदम उठा चुकी है। संसदीय मामलों के मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस पर विस्तृत समीक्षा होगी। विपक्ष फिर भी संतुष्ट न दिखा और सदन से हटने की चेतावनी दी।

कंपनियों की मौजूदा प्रक्रिया

रिचार्ज खत्म होने पर Airtel एक दिन तक इनकमिंग देता है, उसके बाद सेवा रोक दी जाती है। Jio भी इसी तरह एक से दो दिनों की मोहलत देता है। Vi न्यूनतम पैक से इसे चालू रखने की सलाह देता है। नियामक ने पिछले साल वैलिडिटी को एक साल तक बढ़ाने की छूट दी और छोटे टॉप-अप विकल्प जोड़े। अनलिमिटेड कॉल पैक भी उपलब्ध हैं, लेकिन बिना रिचार्ज के लंबे समय तक सेवा नहीं चलती। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सबसे ज्यादा परेशानी पैदा कर रही है, जहां लोग डेटा के बजाय सिर्फ वॉयस इस्तेमाल करते हैं।

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पुरानी समस्या, नया दबाव

यह विवाद नया नहीं कुछ सालों से ऐप-आधारित कॉलिंग को लेकर बहस चल रही है, जो मुफ्त है। टेलीकॉम कंपनियां कर्ज के जाल में फंसी हैं, इसलिए राजस्व बचाने को मजबूर। संसद का यह दबाव नियामक को फ्री इनकमिंग को एक महीने तक अनिवार्य करने या न्यूनतम रिचार्ज घटाने पर विचार करने को बाध्य कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कंपनियों की कमाई प्रभावित होगी, लेकिन ग्राहकों को राहत मिलेगी। विभाग ने कंपनियों को नोटिस भेजने का इशारा दिया है।

आगे की राह

अगर बदलाव आया तो सौ करोड़ से ज्यादा सिम प्रभावित होंगे। उपभोक्ता शिकायतें बढ़ रही हैं। नियामक की रिपोर्ट पर नजरें टिकी हैं। क्या यह टेलीकॉम क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा? समय ही बताएगा। 

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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