इस शादी के मौसम में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं। प्रति दस ग्राम का भाव अब डेढ लाख सत्तर हजार रुपये के पार पहुंच चुका है। बाजारों में चहल-पहल बढ़ी है, लेकिन ज्वेलर्स की दुकानों पर खरीदार थोड़ा सोच-समझकर सामान ले रहे हैं। हर तरफ यही चर्चा है कि आखिर ये तेजी कब थमेगी और कब मिलेगी राहत। परिवारों के बजट पर असर पड़ रहा है, फिर भी मांग में कमी नहीं आ रही।

बढ़ती कीमतों का राज क्या है?
सबसे पहले तो वैश्विक हालात जिम्मेदार हैं। दुनिया भर में चल रहे तनाव ने सोने को सबसे सुरक्षित निवेश बना दिया है। लोग शेयर बाजार से डरकर यहां की ओर रुख कर रहे हैं। ऊपर से हमारा रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ रहा है, जिससे आयात महंगा हो गया। केंद्रीय बैंक भी सोना खरीदने में जुटे हैं, ताकि अपने भंडार मजबूत रखें। ऊपर से शादियों का सीजन चला है।
उत्तर भारत में शादियों का सीजन चल रहा है, जहां हर घर में गहने खरीदने की होड़ लग जाती है। लड़कियों के लिए मंगलसूत्र से लेकर मां के लिए सेट तक सबकी डिमांड है। त्योहारों के बाद ये पीक टाइम होता ही है। पिछले कुछ महीनों में भाव दस फीसदी से ज्यादा ऊपर चढ़े हैं। जनवरी में तो रिकॉर्ड हाई देखने को मिला था। फरवरी में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन फिर उछाल आ गया।
कब आएगी कीमतों में कमी?
विशेषज्ञों की नजर आने वाले बजट पर है। सरकारी फैसले से कुछ राहत मिल सकती है। अमेरिका की ब्याज दरें नीचे आने पर भी बाजार को संतुलन मिलेगा। अगर वैश्विक तनाव कम होता है तो भाव पांच से दस फीसदी नीचे आ सकते हैं। शादियां खत्म होने के बाद मांग अपने आप कम हो जाएगी। अभी जो लोग लग्न के लिए सामान लेना चाहते हैं, वे थोड़ा इंतजार करें। डेढ लाख साठ हजार के आसपास भाव आए तो अच्छा सौदा होगा। लेकिन लंबे समय के लिए सोचना है तो घबराएं नहीं। सोना हमेशा से ही स्थिर निवेश रहा है।
क्या करें आम खरीदार?
अगर शादी के गहने लेने हैं तो छोटे-छोटे टुकड़ों में खरीदें। डिजिटल गोल्ड या सिक्के भी बढ़िया विकल्प हैं। बड़े निवेश के लिए मासिक प्लान जॉइन करें। ज्वेलर्स से पुराना सोना बेचने का फायदा उठाएं। देहरादून के बाजारों में ग्राहक अब स्मार्ट हो गए हैं। वे हॉलमार्क वाले ही माल लेते हैं और भाव की तुलना कर लेते हैं। कुल मिलाकर ये मौसम चुनौतीपूर्ण है, लेकिन अवसर भी छिपा है। बाजार की नजरें अब अगली बड़ी खबरों पर टिकी हैं। सावधानी से कदम बढ़ाएं तो नुकसान नहीं होगा।









