क्या आप बिहार के निवासी हैं और जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र बनाने की सोच रहें हैं तो आपके लिए जरुरी खबर है। बता दें बिहार सरकार ने इन सर्टिफिकेट को बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में बदलाव किया है। आरटीपीएस पोर्टल पर अब सिर्फ आधार कार्ड दिखाने से काम नहीं चलेगा। अतिरिक्त दस्तावेज जमा करना अनिवार्य हो गया है, जिससे लाखों लोगों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। यह कदम फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्यों बदले नियम?
सरकार का मानना है कि पहले कई आवेदन बिना पूरी जांच के पास हो जाते थे। अब हर दस्तावेज की गहन पड़ताल होगी। ग्रामीण इलाकों में तो यह बदलाव सबसे ज्यादा असर दिखा रहा है, जहां डिजिटल साक्षरता कम है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।
जाति प्रमाणपत्र के नए दस्तावेज
जाति प्रमाणपत्र के लिए पहचान पत्र जैसे आधार, वोटर कार्ड या पैन कार्ड जरूरी है। पासपोर्ट साइज फोटो के साथ माता-पिता का पुराना जाति प्रमाणपत्र या राशन कार्ड में दर्ज जाति का विवरण भी अपलोड करना पड़ेगा। पता साबित करने के लिए बिजली बिल या वोटर कार्ड जैसा प्रमाण जोड़ें। ये सभी दस्तावेज साफ स्कैन करके पीडीएफ या जेपीजी फॉर्मेट में जमा करें।
आय प्रमाणपत्र में आय का ठोस प्रमाण
आय प्रमाणपत्र अब सबसे जटिल लग रहा है। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी स्लिप, फॉर्म 16 या आयकर रिटर्न दिखाना होगा। स्वरोजगार वाले बैंक स्टेटमेंट, आय घोषणा पत्र और व्यवसाय की रसीदें दें। राशन कार्ड, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी जोड़ें। कई आवेदन सिर्फ घोषणा पत्र के अभाव में लौट आए हैं।
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निवास प्रमाणपत्र के लिए मजबूत पता प्रमाण
निवास प्रमाणपत्र में बिजली, पानी या टेलीफोन बिल अनिवार्य है। किराएदारों को एग्रीमेंट और रसीद दें। राशन कार्ड या परिवार रजिस्टर की कॉपी से स्थायी निवास साबित करें। पुराना प्रमाणपत्र उपलब्ध हो तो उसे भी अपलोड करें।
आवेदन कैसे करें?
सबसे पहले आपको आरटीपीएस पोर्टल पर रजिस्टर करना है, फिर मोबाइल से ओटीपी वेरिफाई करें। सही सेवा चुनें जैसे अंचल अधिकारी स्तर। फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें। धुंधले स्कैन से बचें। स्थिति एसएमएस से पता चलेगी। अनुमोदन पर प्रमाणपत्र डाउनलोड करें। सही स्तर चुनना महत्वपूर्ण है, गलती से देरी हो सकती है।
क्या करें आवेदन रिजेक्ट होने पर?
पहले सभी दस्तावेज तैयार रखें। आधार के साथ कम से कम दो सहायक प्रमाण जोड़ें। फोटो और स्कैन स्पष्ट रखें। रिजेक्ट होने पर अपील करें। ग्रामीणों के लिए जागरूकता कैंप चल रहे हैं। यह बदलाव 2026 से लागू हुआ, जब फर्जी मामलों का पर्दाफाश हुआ। अब प्रमाणपत्र बनवाना पहले से कठिन है, लेकिन सही तरीके से सब आसान।









