
दिल्ली की महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बड़ी राहत और सशक्तिकरण की दिशा में दिल्ली सरकार ने 2 मार्च 2026 से ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ योजना की औपचारिक शुरुआत कर दी है। यह डिजिटल कार्ड न सिर्फ डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का अधिकार देता है, बल्कि नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के रूप में भी काम करेगा, जिससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का अनुभव पहले से ज्यादा आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनने जा रहा है।
गुलाबी टिकट से डिजिटल स्मार्ट कार्ड तक का सफर
अब तक महिलाएं डीटीसी व क्लस्टर बसों में फ्री यात्रा के लिए गुलाबी कागजी टिकट पर निर्भर थीं, जो न तो पूरी तरह पारदर्शी थे और न ही तकनीकी रूप से भविष्य के अनुरूप। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड इन्हीं पेपर टिकटों की जगह लेने वाला एक पर्सनलाइज्ड डिजिटल पास है, जिस पर लाभार्थी का नाम और फोटो दर्ज रहेगा। बस में चढ़ते ही यह कार्ड सिर्फ कंडक्टर की इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन (ETM) पर टैप करना होगा, और यात्रा स्वतः दर्ज हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि फ्री यात्रा का डेटा पूरी तरह डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगा, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और योजना की वास्तविक पहुंच स्पष्ट दिखेगी।
कौन बनवा सकता है पिंक सहेली कार्ड?
इस योजना का लाभ दिल्ली की महिला निवासियों और ट्रांसजेंडर समुदाय को मिलेगा, जो राजधानी की सीमाओं के भीतर रहते हैं और नियमित या आंशिक रूप से बसों का इस्तेमाल करते हैं। पात्रता के तहत आवेदक की आयु सामान्यतः 12 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए, हालांकि कुछ केंद्रों पर 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों के लिए भी छूट की व्यवस्था रखी गई है।
इससे स्कूली छात्राओं, कॉलेज जाने वाली लड़कियों, कामकाजी महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को एक समान सुविधा मिलेगी। योजना में आय सीमा जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई है, लेकिन दिल्ली का पता वाला आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि केवल वास्तविक निवासी ही लाभ उठा सकें।
ऑफलाइन आवेदन: तुरंत हाथों-हाथ कार्ड
अगर आप तुरंत कार्ड बनवाना चाहती हैं, तो सबसे तेज़ और व्यावहारिक तरीका ऑफलाइन आवेदन है। दिल्ली भर में लगभग 50 अधिकृत केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें जिला मजिस्ट्रेट (DM) ऑफिस, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) ऑफिस और चुनिंदा डीटीसी बस डिपो शामिल हैं। इन केंद्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक, हफ्ते के सातों दिन पिंक सहेली कार्ड बनवाने की सुविधा उपलब्ध है।
आवेदक को अपने साथ दिल्ली के पते वाला मूल आधार कार्ड और सक्रिय मोबाइल नंबर ले जाना होगा। केंद्र पर आपका आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होते ही कार्ड वहीं पर उसी समय हाथों-हाथ दे दिया जाएगा। इस त्वरित व्यवस्था से खास तौर पर उन महिलाओं को बड़ी सुविधा मिलेगी, जो रोज़ाना काम पर जाने के लिए बस पर निर्भर हैं और कार्ड के लिए लंबा इंतजार नहीं कर सकतीं।
ऑनलाइन आवेदन: घर बैठे डिजिटल सुविधा
जो महिलाएं या ट्रांसजेंडर व्यक्ति लाइन में लगने से बचना चाहते हैं या ऑफलाइन केंद्र तक पहुंचना उनके लिए संभव नहीं है, वे ऑनलाइन माध्यम से भी डिजिटल पास के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए डीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट या समर्पित पिंक सहेली पोर्टल पर जाकर “Apply for Pink Saheli Card” विकल्प चुनना होगा। वहां अपना नाम, पता, उम्र, जेंडर, मोबाइल नंबर जैसी बुनियादी जानकारियां भरनी होंगी और साथ में आधार कार्ड की स्कैन कॉपी तथा पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी होगी।
ऑनलाइन सबमिशन के बाद आपका आवेदन डिजिटल तरीके से वेरिफाई किया जाएगा, और प्रक्रिया पूरी होने पर 7 से 10 कार्य दिवस के भीतर स्मार्ट कार्ड स्पीड पोस्ट के जरिए आपके पंजीकृत पते पर भेज दिया जाएगा। यह सुविधा खास तौर पर बुजुर्ग महिलाओं, गृहणियों और उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिनके पास केंद्रों तक जाने का समय या साधन सीमित है।
बस से आगे मेट्रो और RRTS तक
पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड की सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ बसों तक सीमित नहीं है। यह नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के रूप में भी काम करता है, यानी इसे रिचार्ज करके दिल्ली मेट्रो और नमो भारत (RRTS) में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जहां डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए यात्रा मुफ्त रहेगी, वहीं मेट्रो या RRTS में सामान्य किराया कटेगा, लेकिन कार्ड एक ही रहेगा। इससे अलग-अलग कार्ड या टोकन रखने की जरूरत खत्म होगी और पूरी दिल्ली-एनसीआर में एक ही स्मार्ट कार्ड से यात्रा करना संभव हो सकेगा।
हर महीने 1200–2400 रुपये तक की बचत
नियमित बस यात्रियों के लिए यह योजना आर्थिक रूप से भी बड़ा सहारा साबित हो सकती है। अनुमान के अनुसार जो महिलाएं रोज़ाना ऑफिस, कॉलेज या अन्य काम से बस से आती-जाती हैं, उनकी जेब से हर महीने लगभग 1200 से 2400 रुपये तक बस किराए पर खर्च हो जाते हैं। पिंक सहेली कार्ड के आने के बाद यह राशि पूरी तरह बचाई जा सकती है, जिसे परिवार के अन्य ज़रूरी कामों, शिक्षा या बचत में लगाया जा सकता है। दिल्ली जैसे महानगर में जहां रोजमर्रा का खर्च लगातार बढ़ रहा है, वहां यह राहत सीधे घर के बजट को संतुलित करने में मदद करेगी।









