
बदलते डिजिटल दौर में व्हाट्सऐप जैसी ऐप्स न सिर्फ बातचीत का जरिया बनी हैं, बल्कि कानूनी जंग का हथियार भी। क्या आपकी चैट आपको जेल से बचा सकती है या उल्टा भेज सकती है? भारतीय अदालतें इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्यता देती हैं, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स के हालिया फैसलों ने स्पष्ट किया कि धारा 65B का प्रमाणपत्र न होने पर चैट बेकार है।
कानूनी ढांचा और धारा 65B
भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 (अब 2023 में अपडेटेड) की धारा 65B इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को द्वितीयक साक्ष्य बनाती है। यह प्रमाणपत्र डिवाइस मालिक द्वारा जारी होता है, जो चैट की प्रामाणिकता, डिलीवरी और छेड़छाड़ न होने की गारंटी देता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने डेल बनाम आदिल फिरोज (2024) में फैसला दिया कि बिना सर्टिफिकेट के स्क्रीनशॉट सबूत नहीं। सुप्रीम कोर्ट के अनवर पीवी बनाम पीके बशीर (2014) फैसले ने इसे पुख्ता किया- डिजिटल चैट प्राथमिक या माध्यमिक साक्ष्य हो सकती है, बशर्ते प्रमाणित।
ब्लू टिक (डबल टिक) मैसेज पढ़े जाने का संकेत देता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने करुणा आभूषण बनाम अचल केडिया (2020) में इसे स्वीकारा, लेकिन धारा 65B अनिवार्य बताया। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में चैट को मंजूर किया (फरवरी 2026)। एमपी हाईकोर्ट ने तलाक केस में प्राइवेसी को निष्पक्ष सुनवाई पर भारी न बताते हुए चैट को सबूत माना।
बेगुनाही साबित करने का हथियार?
हां, चैट डिफेंस में काम आ सकती है। क्रिमिनल या सिविल केस में आरोपी अपनी निर्दोषता के लिए मैसेज, फोटो या वॉयस नोट पेश कर सकता है। लेकिन स्क्रीनशॉट आसानी से एडिट हो जाते हैं, इसलिए अदालत पूरा चैट एक्सपोर्ट या फोन की मांग करती है। फॉरेंसिक जांच (FSL) में डिलीटेड डेटा रिकवर हो सकता है, इसलिए फोन फॉर्मेट न करें। सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में गुप्त रिकॉर्डिंग को सबूत माना (2025)।
| स्थिति | स्वीकार्यता | उदाहरण |
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| स्थिति | स्वीकार्यता | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रमाणपत्र के साथ | हां | तलाक, भरण-पोषण |
| स्क्रीनशॉट अकेला | नहीं | डेल केस |
| ब्लू टिक | सहायक | करुणा आभूषण |
| फर्जी चैट | जेल | छेड़छाड़ IPC |
जेल का खतरा और जोखिम
चैट जेल न बचा ले, बल्कि भेज भी सकती है। फॉरवर्डेड आपत्तिजनक मैसेज (IPC 153A, 295A, IT एक्ट) से ग्रुप एडमिन तक जिम्मेदार। फर्जी सरकारी दस्तावेज शेयर करने पर धोखाधड़ी। फॉरेंसिक ऑडिट में फेक चैट पकड़ी गई तो जुर्माना-सजा। प्राइवेट चैट बिना अनुमति पब्लिक करना राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन।
सावधानियां और सलाह
- चैट एक्सपोर्ट करें, बैकअप सुरक्षित रखें।
- विवादास्पद फॉरवर्ड न करें; IT सेल में शिकायत करें।
- एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है, लेकिन फोन चोरी जोखिम।
वकील से प्रमाणपत्र बनवाएं। 2026 तक IT रूल्स ने डिजिटल सबूत मजबूत किए हैं।









