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रैपिड रेल और मेट्रो ट्रेन में क्या है असली अंतर? 100 में से 99 लोग नहीं जानते ये 3 तकनीकी बातें, आप भी जान लें

क्या आप भी मेट्रो और रैपिड रेल को एक ही समझते हैं? 180 किमी/घंटा की रफ्तार और 250 किमी तक का सफर—इन दोनों ट्रेनों के बीच के तकनीकी अंतर आपको हैरान कर देंगे। जानें वो 3 खास बातें जो इन्हें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बनाती हैं।

By Pinki Negi

रैपिड रेल और मेट्रो ट्रेन में क्या है असली अंतर? 100 में से 99 लोग नहीं जानते ये 3 तकनीकी बातें, आप भी जान लें
रैपिड रेल और मेट्रो ट्रेन में अंतर

भारत में ट्रांसपोर्ट के आधुनिक साधन के रूप में रैपिड रेल और मेट्रो दोनों ही काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। पहली नज़र में ये दोनों ट्रेनें एक जैसी दिखती हैं—दोनों बिजली से चलती हैं, समय की पाबंद हैं और पर्यावरण के अनुकूल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके बीच का अंतर 100 में से 99 लोगों को नहीं पता? जहाँ मेट्रो शहर के भीतर कम दूरी के सफर के लिए बनाई गई है, वहीं रैपिड रेल लंबी दूरी को बेहद कम समय में तय करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

रैपिड रेल और मेट्रो की शानदार खूबियाँ

रैपिड रेल और मेट्रो, दोनों ही ट्रेनें आज के दौर की लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और सुख-सुविधाओं से लैस हैं। यात्रियों के सफर को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए इनमें ऑटोमैटिक दरवाजे, पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) कोच, डिजिटल अनाउंसमेंट और सीसीटीवी कैमरों जैसी एडवांस सुविधाएं दी गई हैं। ये दोनों ही ट्रेनें शहरी परिवहन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं, जो शहर और उसके आसपास के इलाकों को आपस में जोड़कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहद सुगम बनाती हैं।

मेट्रो ट्रेन की खासियत

मेट्रो और रैपिड रेल के बीच का सबसे बड़ा अंतर उनके परिचालन और दूरी में छिपा है। मेट्रो ट्रेन एक ऐसी हाई-स्पीड बिजली से चलने वाली परिवहन प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से महानगरों के भीतर यात्रा के लिए बनाया गया है। यह शहर की भीड़भाड़ को कम करने के लिए ज़मीन के नीचे (अंडरग्राउंड), ऊंचे ट्रैक (एलिवेटेड) या ज़मीन की सतह पर चलती है। इसका मुख्य उद्देश्य शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक की कम दूरी को तेज़ी से तय करना है।

मेट्रो और ‘नमो भारत’

मेट्रो जहाँ शहर के भीतर ट्रैफिक जाम को खत्म कर एक ठंडा और आरामदायक सफर देती है, वहीं रैपिड रेल (RRTS) एक सेमी-हाई स्पीड ट्रेन है। भारत में इसे ‘नमो भारत’ के नाम से जाना जाता है, जो 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की जबरदस्त रफ्तार से दौड़ती है। मेट्रो का फोकस शहर के अंदर कम दूरी तय करना है, जबकि रैपिड रेल को दो बड़े शहरों के बीच लंबी दूरी को मिनटों में तय करने के लिए डिजाइन किया गया है।

दो शहरों को जोड़ने वाली रैपिड रेल

रैपिड रेल की रफ्तार मेट्रो ट्रेन से कहीं अधिक होती है, लेकिन यह बुलेट ट्रेन जितनी तेज नहीं होती। इसे विशेष रूप से 100 से $250 किलोमीटर के इंटरसिटी (दो शहरों के बीच) रूट्स के लिए तैयार किया गया है। जहाँ मेट्रो शहर के अंदर के ट्रैफिक को संभालती है, वहीं रैपिड रेल का मुख्य उद्देश्य दो बड़े शहरों के बीच की दूरी को कम समय में तय करना है, ताकि लंबी दूरी का सफर भी मिनटों जैसा महसूस हो।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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