
अक्सर हम अपनी पहली नौकरी का सैलरी अकाउंट या किसी ऑफर के चक्कर में खुला ‘जीरो बैलेंस’ खाता इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं और उसे ऐसे ही लावारिस पड़ा रहने देते हैं। समय के साथ ये खाते हमारे लिए “डेड इन्वेस्टमेंट” बन जाते हैं, लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि इन खातों को नजरअंदाज करना आपको आर्थिक नुकसान पहुँचा सकता है।
चाहे वह मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला जुर्माना हो या सालाना डेबिट कार्ड फीस, ये पुराने खाते आपकी जेब पर चुपचाप भारी पड़ सकते हैं। इसलिए, अगर आप किसी बैंक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो उसे सही तरीके से बंद कराना ही समझदारी है।
पुराने बैंक खाते पर पेनल्टी का खतरा
अगर आपके पास कोई ऐसा बैंक खाता है जिसका आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो सबसे पहले यह जाँच लें कि उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क तो नहीं लग रहा। कई खातों में मिनिमम बैलेंस (न्यूनतम राशि) बनाए रखना अनिवार्य होता है, और ऐसा न करने पर बैंक हर महीने भारी पेनल्टी काट सकता है।
यह कटौती धीरे-धीरे आपके जमा पैसों को खत्म कर देती है और कई बार आपका अकाउंट बैलेंस निगेटिव (ऋण) में भी जा सकता है। इसलिए, बिना इस्तेमाल वाले खातों में बैलेंस चेक करना और उन्हें समय पर मैनेज करना बेहद जरूरी है।
सावधान! जीरो बैलेंस खाता भी हो सकता है ‘डॉर्मेंट’
भले ही आपका बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस वाला हो, लेकिन अगर आप लंबे समय तक उसमें कोई लेन-देन नहीं करते हैं, तो बैंक उसे ‘डॉर्मेंट’ (Dormant) यानी निष्क्रिय घोषित कर सकता है। एक बार खाता डॉर्मेंट हो जाने पर आप उससे न तो पैसे निकाल पाएंगे और न ही जमा कर पाएंगे। इसे दोबारा चालू कराने के लिए आपको फिर से बैंक के चक्कर काटने होंगे, नई KYC करानी होगी और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए, अपने पुराने खातों को पूरी तरह भूलने के बजाय, उनमें छोटा-मोटा ट्रांजैक्शन करते रहना या उन्हें बंद कर देना ही बेहतर विकल्प है।
पुराना बैंक खाता बंद करने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल
बैंक खाता बंद करने का फैसला लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह आपके किसी लोन की EMI, बीमा प्रीमियम (Insurance) या ऑटो-डेबिट सुविधा से तो नहीं जुड़ा है। यदि बिना जानकारी के खाता बंद कर दिया गया और कोई भुगतान मिस हो गया, तो इसका सीधा बुरा असर आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) पर पड़ सकता है।
हालांकि बचत खाता सीधे क्रेडिट हिस्ट्री को प्रभावित नहीं करता, लेकिन यदि आपके खाते में ओवरड्राफ्ट (Overdraft) की सुविधा है और उस पर कोई बकाया राशि (Balance) रह जाती है, तो उसे ‘अनपेड लोन’ माना जा सकता है। इसलिए, किसी भी पुराने खाते को बंद करने से पहले उसकी सभी देनदारियों को सही तरीके से निपटाना बहुत जरूरी है।
पुराने बैंक खाते और फ्रॉड का खतरा
जिस बैंक अकाउंट का हम लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करते, वह साइबर अपराधियों के लिए एक आसान निशाना बन सकता है। सुरक्षा के लिहाज से ऐसे खातों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:
- फ्रॉड का बढ़ा हुआ रिस्क: एक्टिव न रहने वाले खातों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर हमारा ध्यान नहीं जाता, जिससे धोखाधड़ी का पता बहुत देर से चलता है।
- अलर्ट मिस होना: अगर आपने अपना मोबाइल नंबर या ईमेल बदल लिया है और पुराने खाते में अपडेट नहीं किया, तो बैंक की ओर से आने वाले ट्रांजैक्शन मैसेज आप तक नहीं पहुँच पाएंगे।
- देर से जानकारी: खाते में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर आपको तब पता चलेगा जब नुकसान हो चुका होगा, जिससे रिकवरी करना मुश्किल हो जाता है।
बैंक अकाउंट बंद करने का सही तरीका
सिर्फ बैलेंस जीरो कर देना या पैसे निकाल लेना खाता बंद करना नहीं कहलाता। सही तरीके से अकाउंट क्लोज करने के लिए इन बातों का पालन करें:
- औपचारिक क्लोजर रिक्वेस्ट: सबसे पहले अपनी बैंक शाखा (Branch) जाएं, वहां ‘अकाउंट क्लोजर फॉर्म’ भरें और उसे आधिकारिक रूप से जमा करें।
- डेबिट कार्ड और चेकबुक: खाते से जुड़े सभी डेबिट कार्ड्स को कैंसिल कराएं और बची हुई चेकबुक बैंक को सौंप दें या उसे नष्ट कर दें।
- स्टेटमेंट डाउनलोड करें: खाता बंद होने से पहले पिछले 1-2 साल के बैंक स्टेटमेंट जरूर डाउनलोड कर लें, क्योंकि भविष्य में इनकम टैक्स या अन्य कामों के लिए इनकी जरूरत पड़ सकती है।
- लिखित कंफर्मेशन: बैंक से अकाउंट बंद होने की ‘क्लोजर रसीद’ (Acknowledgment) या लिखित कंफर्मेशन जरूर लें, ताकि भविष्य में किसी भी चार्ज या विवाद से बचा जा सके।









