
फरवरी महीने में कोटे की दुकानों से राशन लेने वाले लाभार्थियों के लिए वितरण के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। खाद्य आयुक्त के नए निर्देशों के अनुसार, अब अंत्योदय और पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को पहले के मुकाबले गेहूं की मात्रा कम दी जाएगी, जबकि उसके बदले चावल की मात्रा बढ़ा दी गई है।
शासन द्वारा खाद्यान्न वितरण प्रणाली में यह संशोधन सरकारी गोदामों में अनाज की उपलब्धता और नई नीति के तहत किया गया है। इसलिए, इस बार राशन की दुकान पर जाने से पहले कार्डधारक अपनी बदली हुई मात्रा की जानकारी जरूर कर लें।
अंत्योदय कार्डधारकों को झटका
नई व्यवस्था के तहत अंत्योदय कार्डधारकों को मिलने वाले कुल 35 किलो राशन का गणित बदल गया है। अब फरवरी महीने से लाभार्थियों को 14 किलो के बजाय केवल 10 किलो गेहूं ही मिलेगा। गेहूं में की गई इस 4 किलो की कटौती की भरपाई चावल से की गई है, जिससे अब चावल की मात्रा 21 किलो से बढ़कर 25 किलो हो गई है। हालांकि कुल राशन अभी भी 35 किलो ही मिलेगा, लेकिन गेहूं कम और चावल ज्यादा मिलने से कार्डधारकों की रसोई के बजट और खान-पान पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
अब प्रति यूनिट मिलेगा सिर्फ 1 किलो गेहूं
पात्र गृहस्थी कार्डधारकों के लिए भी राशन का कोटा बदल गया है। अब प्रति व्यक्ति मिलने वाले कुल 5 किलो राशन में गेहूं की मात्रा 2 किलो से घटाकर केवल 1 किलो कर दी गई है। इसकी जगह अब लाभार्थियों को 4 किलो चावल दिया जाएगा। खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फरवरी माह के लिए कोटे की दुकानों पर नए अनुपात के अनुसार अनाज की सप्लाई भेज दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा आवंटित मात्रा के अनुसार ही वितरण करना अनिवार्य है, इसलिए अब सभी श्रेणियों के कार्डधारकों को इस महीने गेहूं की कमी और चावल की अधिकता का सामना करना होगा।
गेहूं की मांग ज्यादा, चावल कैसे बांटें?” सरकारी आदेश के बाद बढ़ी मुश्किलें
राशन की मात्रा में बदलाव के कारण कोटेदारों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल है। कोटेदारों का कहना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कार्डधारक गेहूं की मांग अधिक करते हैं, ऐसे में चावल की मात्रा बढ़ाने और गेहूं घटाने से उन्हें लोगों को समझाने में काफी दिक्कत होगी।
कुछ कोटेदारों का तो यहाँ तक मानना है कि यदि सरकार को कटौती करनी ही थी, तो पूरा चावल ही आवंटित किया जाता, जिससे वितरण प्रक्रिया सरल रहती। हालांकि, खाद्य विभाग ने साफ कर दिया है कि फरवरी माह का वितरण इसी नए नियम के तहत होगा, क्योंकि शासन ने अनाज की आपूर्ति इसी अनुपात में की है और इसमें कोई बदलाव संभव नहीं है।









