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ट्रेन का एक पहिया कितना भारी होता है? जवाब सुनकर पहलवान भी रह जाएंगे दंग!

क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन का एक विशाल पहिया कितना भारी होता है? इसका जवाब आपको चौंका सकता है—इतना वज़न कि बड़े-से-बड़ा पहलवान भी दंग रह जाए! जानिए यात्री कोच और इंजन के पहियों के सटीक वज़न के बारे में और क्यों वे इतने मज़बूत बनाए जाते हैं।

By Pinki Negi

ट्रेन का एक पहिया कितना भारी होता है? जवाब सुनकर पहलवान भी रह जाएंगे दंग!
Train Wheel Weight

भारतीय रेलवे आज के समय में तकनीक के मामले में बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है। यह आधुनिकीकरण के तहत बिजली से चलने वाली ट्रेनों (विद्युतीकरण), बेहतर सुरक्षा प्रणालियों और डिजिटल सुविधाओं (जैसे AI, RFID और ऑनलाइन बुकिंग) पर काम कर रहा है, जिसमें वंदे भारत जैसी तेज रफ़्तार ट्रेनें शामिल हैं।

रेलवे का मुख्य उद्देश्य अपनी क्षमता बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और यात्रियों के सफर को बेहतर बनाना है, जो देश के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। रेलवे के नाम पर कई रिकॉर्ड दर्ज हैं, लेकिन हम आपको आज एक ऐसा रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद ही आपने पहले कभी सुना हो।

भारतीय ट्रेनों के पहिये कहाँ बनते हैं?

भारत में ट्रेन के पहिये मुख्य रूप से दो बड़ी सरकारी फैक्ट्रियों में तैयार होते हैं: एक बेंगलुरु (कर्नाटक) में स्थित रेल पहिया फैक्ट्री (RWF) और दूसरी बिहार के सारण जिले में बेला स्थित रेल व्हील प्लांट (RWP)। ये दोनों ही प्लांट भारतीय रेलवे को पहियों और धुरों (axles) की सप्लाई करते हैं।

बेंगलुरु की RWF एक बड़ी फैक्ट्री है जो पहिये, धुरी और पूरा व्हील सेट सब कुछ बनाती है, जबकि बेला का प्लांट मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में पहियों का उत्पादन करता है। इसके अलावा, भारत अब पहियों का निर्यात करने के लक्ष्य से तमिलनाडु में भी पहियों के लिए नई उत्पादन इकाइयाँ लगा रहा है।

अब देश में बनेंगे हाई-स्पीड ट्रेनों के पहिये

भारतीय रेलवे विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अब भारत ने ट्रेनों के पहियों के उत्पादन में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहले हमें ये पहिये विदेशों से मंगाने पड़ते थे, लेकिन अब आयात पर निर्भरता खत्म हो रही है। तमिलनाडु के गुम्मिदीपोंडी में खास फोर्ज्ड पहियों को बनाने के लिए एक नया प्लांट लग रहा है, जिससे भारत जल्द ही इन पहियों का निर्यात भी कर सकेगा।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के रायबरेली में भी सरकारी और निजी कंपनियां हाई-स्पीड ट्रेनों (जैसे वंदे भारत) के लिए स्टील के पहिये बनाने का काम कर रही हैं। इन प्रयासों से भारत अब अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक बाज़ार में भी अपने पहिये बेचने की तैयारी कर रहा है।

ट्रेन के पहियों का वजन

ट्रेन के पहिये का वजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस तरह की ट्रेन में इस्तेमाल हो रहा है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अनुसार, ट्रेन के पहियों का वजन अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, LHB कोच (आधुनिक सवारी डिब्बे) के पहिये का वजन लगभग 326 किलोग्राम होता है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन के पहिये का वजन 554 किलोग्राम तक हो सकता है।

रेलगाड़ी में इस्तेमाल होने वाले पहियों का वज़न उनके काम के हिसाब से अलग-अलग होता है। सामान्य यात्री कोच के पहिये लगभग 384 किलोग्राम के होते हैं, जबकि डीजल इंजन के पहिये करीब 528 किलोग्राम के होते हैं। इंजन के पहिये ज़्यादा वज़नदार इसलिए होते हैं क्योंकि उन्हें पूरी ट्रेन को खींचने के लिए अधिक मज़बूत बनाया जाता है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, इन पहियों की हर 30 दिन में जाँच करना बहुत ज़रूरी होता है, और कोई भी खराबी पाए जाने पर उन्हें तुरंत बदल दिया जाता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।