
उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए जल्द ही एक बड़ा बदलाव आने वाला है। अब आपकी बिजली बिल की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि आप बिजली कब और कितनी मात्रा में उपयोग करते हैं। राज्य की ऊर्जा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीकी बनाने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने टाइम ऑफ डे टैरिफ (Time of Day Tariff) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मांग के हिसाब से बदलेगी बिजली की दर
नई व्यवस्था के तहत बिजली की कीमतें मांग के स्तर के अनुसार तय की जाएंगी। यानी, जब बिजली की मांग अधिक होगी, तो दरें बढ़ जाएंगी, और जब मांग कम होगी, तो दरें घट जाएंगी। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत बेहतर ढंग से नियंत्रित करने का मौका मिलेगा, वहीं राज्य की बिजली आपूर्ति प्रणाली पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
2027-28 से सभी उपभोक्ताओं पर लागू होगा नया टैरिफ पैटर्न
UPCL ने प्रस्ताव रखा है कि वित्त वर्ष 2027-28 से यह नया टैरिफ पैटर्न राज्य के सभी उपभोक्ताओं पर लागू किया जाए—सिवाय कृषि श्रेणी के। यह प्रस्ताव उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) के समक्ष भेजा गया है। आयोग ने इस पर सार्वजनिक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं, जिन्हें 31 जनवरी 2026 तक दर्ज कराया जा सकता है।
स्मार्ट मीटर से मिलेगी रियल-टाइम पारदर्शिता
स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम इस पूरी योजना की रीढ़ होगा। इससे रियल-टाइम डेटा के जरिए उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को मॉनिटर कर सकेंगे। UPCL का दावा है कि इससे उपभोक्ताओं को अपने बिल की बेहतर समझ होगी और उन्हें बिजली के उपयोग पर सटीक नियंत्रण मिलेगा।
इसके अलावा, अलग-अलग समय स्लॉट पीक, नॉन-पीक और ऑफ-पीक में अलग-अलग दरें लागू होंगी। यह बदलाव राज्य में डिमांड मैनेजमेंट को आसान बनाएगा और बिजली उत्पादन प्रणाली की दक्षता बढ़ाएगा।
प्रीपेड और ग्रीन पावर टैरिफ को भी मिलेगी बढ़ावा
UPCL सिर्फ दरों में बदलाव नहीं, बल्कि कई नई सुविधाएं भी लेकर आ रहा है। निगम ने घोषणा की है कि प्रीपेड मीटरिंग सिस्टम को जारी रखा जाएगा ताकि उपभोक्ता पहले से भुगतान कर सकें और अपने बजट को नियंत्रित रख सकें।
साथ ही, सभी उपभोक्ताओं के लिए ग्रीन पावर टैरिफ का विकल्प भी रहेगा, जिससे वे स्वेच्छा से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ा सकेंगे। ऑनलाइन बिल भुगतान पर मिलने वाली छूट योजना को भी जारी रखने का प्रस्ताव है।
2036 करोड़ रुपये की राजस्व आवश्यकता का अनुमान
UPCL ने 2026-27 के लिए आयोग के समक्ष वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) की विस्तृत याचिका भी दाखिल की है। निगम के अनुसार, बढ़ती बिजली खरीद लागत, नेटवर्क विस्तार, स्मार्ट मीटरिंग, अनुरक्षण खर्च और ब्याज देनदारियों को जोड़ते हुए लगभग 2036.99 करोड़ रुपये की आवश्यकता सामने आई है। UPCL का कहना है कि इस निवेश से राज्य में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सकेगा और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों की तैयारी की जा सकेगी।
बीपीएल उपभोक्ताओं को राहत, सामान्य उपभोक्ताओं पर सीमित असर
कंपनी के मुताबिक, बीपीएल उपभोक्ताओं पर इस पूरे बदलाव का न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। उनके फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है। वहीं अन्य श्रेणियों में जो भी संशोधन प्रस्तावित हैं, वे सेवा गुणवत्ता और आधुनिक तकनीकों को लागू करने की जरूरत से जुड़े हैं।
डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
ऊर्जा क्षेत्र में इस कदम को डिजिटल पारदर्शिता और उपभोक्ता सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्मार्ट मीटर पर आधारित यह तकनीकी टैरिफ व्यवस्था न सिर्फ बिजली की खपत में अनुशासन लाएगी, बल्कि भविष्य में राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ और टिकाऊ तरीके से पूरा करने की दिशा में मददगार भी साबित होगी।









