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महंगा हो गया रसोई गैस सिलेंडर! सरकार ने पहली बार बताई दाम बढ़ने की असली वजह, देखें डिटेल्स

सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ाकर तुरंत लागू कर दी, जिससे रसोई बजट और सियासत दोनों गर्म हैं। सरकार फैक्ट शीट में दावा कर रही है कि सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस 542 डॉलर प्रति टन तक पहुंचने और 60% से ज़्यादा एलपीजी आयात के बावजूद वह पूरी लागत पास‑ऑन नहीं कर रही, उज्ज्वला लाभार्थियों को सस्ती गैस और उपभोक्ताओं को क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में कम दाम दे रही है।

By Pinki Negi

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एलपीजी सिलेंडर फिर महंगा हो गया है और सियासत से लेकर आम रसोई तक गर्माहट बढ़ गई है। सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाने की मंजूरी दी है, जो तुरंत लागू हो गई है। विपक्ष इसे आम आदमी पर नया बोझ बता रहा है, जबकि सरकार फैक्ट शीट के ज़रिए दावा कर रही है कि उसने वैश्विक बाज़ार की अस्थिरता से उपभोक्ताओं को काफी हद तक बचाया है।

दिल्ली में कीमतें, सरकार का ‘आंशिक बोझ’ वाला तर्क

दिल्ली में अब 14.2 किलो के गैर‑सब्सिडी घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये के आसपास है, हालांकि सरकार का कहना है कि उसकी वास्तविक बाजार‑आधारित दर करीब 987 रुपये पड़ती है। यानी केंद्र के अनुसार उपभोक्ता से 134 रुपये कम वसूले जा रहे हैं और यह अंतर सरकार तथा तेल विपणन कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। यही तर्क देकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस बढ़ोतरी को ‘आंशिक बोझ’ बताया, न कि पूरी लागत का पास‑थ्रू।

सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस और आयात पर निर्भरता

सरकार की फैक्ट शीट के मुताबिक एलपीजी की कीमतों का बेस सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सीपी) है, जो भारत के लिए प्रमुख वैश्विक मानक माना जाता है। मार्च 2026 में सऊदी सीपी 542 डॉलर प्रति मेट्रिक टन तक पहुंच गया, जबकि नवंबर 2025 में यही कीमत 466 डॉलर के न्यूनतम स्तर पर थी।

2020‑21 में औसत 415 डॉलर से 2022‑23 में 712 डॉलर प्रति एमटी तक इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया, यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी लगातार महंगी होती चली गई। भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक झटकों का सीधा असर घरेलू रसोई तक पहुंचना लगभग तय माना जाता है।

ओएमसी को मुआवजा और उज्ज्वला सिलेंडर की नियंत्रित कीमत

इसके बावजूद, सरकार का दावा है कि उपभोक्ताओं पर पूरा भार नहीं डाला गया। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को वित्त वर्ष 2022‑23 में 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया, ताकि वे भारी अंडर‑रिकवरी के बावजूद आपूर्ति जारी रख सकें। मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सऊदी सीपी औसतन 575 डॉलर प्रति एमटी के आसपास रहा और एक समय यह 636 डॉलर तक भी पहुंचा, फिर भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों के लिए सिलेंडर 503 से 613 रुपये की रेंज में रखा गया।

उज्ज्वला परिवारों पर रोज़ का असर कितना?

फैक्ट शीट में सबसे ज्यादा ज़ोर पीएमयूवाई परिवारों पर असर को “मामूली” बताने पर है। सरकार के अनुसार उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 14.2 किलो का सिलेंडर दिल्ली में फिलहाल लगभग 613 रुपये में मिल रहा है, जबकि वही सिलेंडर पाकिस्तान में करीब 1,046, श्रीलंका में लगभग 1,241 और नेपाल में लगभग 1,207 रुपये के बराबर पड़ा रहा है। मंत्रालय का आकलन है कि हालिया बढ़ोतरी से इन परिवारों की खाना पकाने की दैनिक लागत 7.31 रुपये से बढ़कर लगभग 8.11 रुपये प्रति दिन हुई है, यानी प्रति परिवार सिर्फ 80 पैसे और प्रति व्यक्ति करीब 20 पैसे अतिरिक्त बोझ।

कमर्शियल सिलेंडर, होटल‑उद्योग और ओएमसी का घाटा

व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों के मोर्चे पर भी तस्वीर साफ है कि बाजार‑हकीकत सीधे पास‑ऑन हो रही है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत मार्च 2024 में जहां लगभग 1,646 रुपये थी, वह मार्च 2026 में बढ़कर करीब 1,883 रुपये तक पहुंच गई। होटल, रेस्तरां और छोटे उद्योगों पर इसका सीधा असर दिखने लगा है, लेकिन सरकार इसे “ग्लोबल रियलिटी” का प्रतिबिंब बता रही है। ओएमसी ने 2024‑25 में करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलने का दावा किया है, जिसके बदले केंद्र से 30,000 करोड़ की सहायता दी गई है।

2014 के बाद एलपीजी नेटवर्क का तेजी से विस्तार

सरकारी आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि 2014 के बाद एलपीजी का दायरा और बुनियादी ढांचा दोनों तेज़ी से बढ़े हैं। सक्रिय घरेलू ग्राहकों की संख्या 14.51 करोड़ से बढ़कर 33.31 करोड़ हो चुकी है, जबकि खपत 17.6 एमएमटी से लगभग 32 एमएमटी तक पहुंच गई है। बॉटलिंग क्षमता 13,235 टीएमटीपीए से बढ़कर 23,113 टीएमटीपीए, एलपीजी पाइपलाइन की लंबाई 2,311 किलोमीटर से 6,242 किलोमीटर और आयात क्षमता 32.3 एमएमटीपीए के आसपास लगभग तिगुनी हो गई है।

पीएमयूवाई परिवारों की प्रति व्यक्ति खपत भी 2016‑17 के 3.81 सिलेंडर से बढ़कर 2025‑26 तक करीब 4.83 सिलेंडर बताई जा रही है, जिसे सरकार साफ संकेत मानती है कि लोग लकड़ी‑कोयले की जगह गैस पर टिक रहे हैं।

पेट्रोल‑डीजल के आंकड़ों से तुलना की कोशिश

केंद्र अपनी ईंधन नीति को व्यापक स्तर पर सफल बताने के लिए पेट्रोल‑डीजल के आंकड़े भी सामने रख रहा है। फैक्ट शीट के अनुसार फरवरी 2022 से 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 0.67 प्रतिशत गिरी, जबकि डीजल में सिर्फ 1.15 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। इसके विपरीत, पाकिस्तान में पेट्रोल 55 प्रतिशत तक महंगा हुआ और श्रीलंका में डीजल की कीमतों में 81 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया। इन आंकड़ों के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वैश्विक उथल‑पुथल के बावजूद भारत ने तुलनात्मक रूप से कीमतों को नियंत्रित रखा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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