
दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों में शुमार एप्पल में एक बड़े रणनीतिक बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है। दिग्गज तकनीकी कंपनी को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिल गया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वर्तमान सीईओ टिम कुक अपने पद से हट जाएंगे और उनकी जगह हार्डवेयर इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख रहे जॉन टर्नस 1 सितंबर 2026 से कंपनी की रोज़मर्रा की नेतृत्व की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।
टिम कुक सीईओ पद छोड़ने के बावजूद कंपनी के पास बने रहेंगे, लेकिन अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन जैसी सीमित भूमिका में स्ट्रैटेजिक गाइडेंस और बॉर्ड लेवल पर डिसीजन मेकिंग में शामिल होंगे।
जॉन टर्नस: एप्पल के नए बॉस कौन हैं?
50 वर्षीय जॉन टर्नस एप्पल के ऐसे पहले सीईओ होंगे, जिनका मुख्य बैकग्राउंड स्पष्ट रूप से हार्डवेयर इंजीनियरिंग से जुड़ा है। इसका मतलब है कि कंपनी की ओर से एक शुद्ध ऑपरेशनल और प्रोडक्ट‑फोकस्ड लीडर को आगे बढ़ाया जा रहा है, न कि केवल एक फाइनेंस‑ओरिएंटेड या मार्केटिंग‑बैकग्राउंड वाला एक्जीक्यूटिव। टर्नस की यह डिप्लोमा अभी उत्कृष्टता वाली हार्डवेयर लीडरशिप को एक बड़ा संकेत है कि आने वाले दशक में एप्पल का फोकस प्रोडक्ट डिज़ाइन और टेक्निकल इनोवेशन पर और ज़्यादा तीव्र होगा।
शुरुआती सफर की बात करें तो टर्नस ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की है। उनकी पढ़ाई के बाद करियर की पहली कड़ी वर्चुअल रियलिटी और 3D विज़ुअलाइज़ेशन जैसे नवीन मॉडल पर काम करने वाले एक छोटे‑से स्टार्टअप से जुड़ी, जहां उनकी तकनीकी जानकारी और हार्डवेयर डिज़ाइन की समझ धीरे‑धीरे तैयार हुई। यहीं से उनकी एक छोरी एप्पल तक पहुंची, जहां वे 2001 में जॉइन हुए और लगभग 24 साल तक एक ही कंपनी से जुड़े रहे।
एप्पल में उन्होंने सबसे पहले मैक की हार्डवेयर डिज़ाइन टीम में काम किया, खासकर डिस्प्ले और स्क्रीन‑रिलेटेड कॉम्पोनेंट्स पर। इसी छोटी सी भूमिका से शुरुआत करते हुए वे धीरे‑धीरे पूरे डेस्कटॉप और लैपटॉप पोर्टफोलियो की ज़िम्मेदारी संभालने लगे, फिर आइफोन, आइपैड, वॉच और एयरपॉड्स जैसे मोबाइल डिवाइसेज़ की हार्डवेयर टीम तक पहुंच गए। आज वे एप्पल के हार्डवेयर इंजीनियरिंग के प्रमुख रह चुके हैं, जिसका मतलब है कि कंपनी के हर मुख्य प्रोडक्ट लाइन के डिज़ाइन और इंजीनियरिंग के पीछे उनकी सीधी या अप्रत्यक्ष उपस्थिति रही है।
प्रमुख उपलब्धियां: जो बनाती हैं टर्नस को उत्तराधिकारी
जॉन टर्नस के नाम से जुड़ी कई बड़ी उपलब्धियां उन्हें टिम कुक के उत्तराधिकारी के रूप में उभरने में मदद करती हैं। सबसे नज़र उठाने वाला कदम 2020 में अपना खुद का चिप प्लेटफॉर्म लॉन्च करना है, जिसमें एप्पल ने इंटेल की प्रोसेसर्स को हटाकर अपने M‑सीरीज़ चिप्स का इस्तेमाल मैकबुक और आइमैक जैसे डिवाइस में शुरू किया। इस बदलाव की नेतृत्व टीम में टर्नस का एक महत्वपूर्ण रोल रहा, जहां उन्होंने हार्डवेयर डिज़ाइन, थर्मल मैनेजमेंट और उत्पादन की लागत को संतुलित रखने में काम कियchgा।
एक और महत्वपूर्ण उदाहरण है हाल के वर्षों में आइफोन के कैमरा और सेंसर आर्किटेक्चर को ऑप्टिमाइज़ करना। जब आइपड में लेजर बेस्ड लाइडार या डीप‑सेंसिंग कैमरा सिस्टम जोड़ने का प्रस्ताव आया, तो टर्नस ने यह सुझाव दिया कि इस तरह के महंगे और ऊंची लागत वाले कॉम्पोनेंट्स को केवल प्रीमियम “प्रो” मॉडल्स तक ही सीमित रखा जाए, जिससे बेसिक या बजट‑फ्रेंडली मॉडल्स की कीमत और मार्जिन पर ज़्यादा दबाव न पड़े। यह तरह उनकी कार्यशैली में टैक्निकल इनोवेशन के साथ‑साथ “मुनाफे की सुरक्षा” (बॉटम लाइन प्रोटेक्शन) का भी क्लियर टोन दिखता है।
एक अन्य बड़ी उपलब्धि जो उनके नाम से जुड़ी है, वह है “आईफोन एयर” या थिन और लाइटवेट फॉर्म‑फैक्टर वाले आइफोन मॉडल की डिज़ाइन और इंजीनियरिंग का काम, जिसमें टिम कुक की तरह उन्होंने भी एक ऐसी डिवाइस लॉन्च की जो बाज़ार में आकर्षक डिज़ाइन और बेहतर यूज़र अनुभव के साथ‑साथ ऑपरेशनल दक्षता को भी बनाए रखती है।
कार्यशैली: टिम कुक जैसा, लेकिन एक इंजीनियर दिमाग
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जॉन टर्नस की कार्यशैली स्टीव जॉब्स के विज़नरी और जोखिम भरे अंदाज़ से ज़्यादा टिम कुक के “स्थिर, प्रबंधकीय और ऑपरेशनल दृष्टिकोण” से मेल खाती है। टर्नस ऐसे नेता के रूप में उभरे हैं जो भावनात्मक या ड्रामेटिक डिसीजन लेने की बजाय डेटा, कॉस्ट स्ट्रक्चर, मार्जिन और लॉन्ग‑टर्म प्रोडक्ट रोडमैप के आधार पर चीज़ें तय करते हैं। इसका फायदा यह है कि एप्पल की निर्माण लागत, सप्लाई चेन और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे जटिल मुद्दों पर उनकी गहरी समझ और संयमित फैसलेबाज़ी कंपनी को अस्थिरता से बचाए रख सकती है।
टर्नस को कंपनी के अंदर “मैन ऑफ द पीपल” भी कहा जाता है। जब उन्हें सीनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में प्रमोट किया गया, तो उन्होंने अपने लिए अलग केबिन या क्लोज्ड ऑफिस लेने से इनकार कर दिया और टीम के साथ ओपन‑प्लैन वर्कस्पेस में बैठना पसंद किया।









